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बाघों के संरक्षण के मामले में मोदी सरकार मनमोहन सरकार से पीछे

  • rounak group

नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी द्वारा इन दिनों मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों के बारे में सोशल मीडिया पर बढ़-चढ़कर प्रचार किया जा रहा है इस प्रचार में यह भी शामिल किया गया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में बाघों के संरक्षण में रिकार्ड बढ़ोतरी हुई है सोशल मीडिया पर भाजपा द्वारा यह प्रचार किया जा रहा है पिछले 8 सालों में बाघों में 42% की रिकार्ड बढ़ोतरी हुई है । भाजपा सोशल मीडिया ने एक कैप्शन है किया गया है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैमरे के द्वारा जंगल में फोटो शूट कर रहे हैं ।

  उस कैप्शन में साल 2014 और 2022 के बाघों की संख्या एवं रिकॉर्ड बढ़ोतरी की प्रतिशत हो अंकित किया गया है जिसमें साल 2014 में भारत में बाघों की संख्या 2226 और साल 2022 में बाघों की संख्या 3167 दिखाई गई है। इस हिसाब से 2014 से 2022 तक 42% बढ़ोतरी की गई है जिसे एक रिकॉर्ड  के रूप में दर्शाया गया है अगर इसके पिछले गणना को देखें तो साल 2006 में बाघों की संख्या 1411 थी । अगर इसी गणना को आधार मानें तो साल 2006 में बाघों की संख्या की बढ़ोतरी साल 2014 तक 58% यानी 2226 हो गई हैं इस हिसाब से बाघों की संख्या में जो वृद्धि मनमोहन सरकार में हुई उसके लिहाज से मोदी सरकार में वृद्धि दर लगभग 16% कम रही तो फिर किस नजरिए से भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रचारित किया जा रहा है यह समझ से परे है क्या भारतीय जनता पार्टी द्वारा सोशल मीडिया पर अधूरे आंकड़ों का प्रचार कर मोदी सरकार का महिमामंडन कर आम जनता को गुमराह किया जा रहा है । 

बता दें कि 50 वर्ष पहले भारत में टाइगर संरक्षण प्रोजेक्ट शुरू हुआ था जिसके तहत बाघों के संरक्षण के लिए लगातार सरकारी प्रयास करती रही हैं और यह लगातार जारी है किंतु इस तरह अधूरी जानकारी देकर आम जनता को लोकतंत्र में कब तक गुमराह किया जाता रहेगा इसमें कोई दो राय नहीं कि पूर्ववर्ती सरकार एवं वर्तमान सरकार दोनो ने ही बाघों के संरक्षण में महत्वपूर्ण पहल किए हैं किंतु अधूरे आंकड़े प्रस्तुत कर आम जनता को लोकतंत्र में गुमराह करना क्या सही है ।

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