नई दिल्ली / शौर्यपथ / जिस तरह आदिपुरुष फिल्म में सनातन धर्म का मजाक उदय वह निंदनीय है आज भले ही भाजपा के कद्दावर नेता इसका विरोध कर रहे है किन्तु यही नेता कुछ दिनों पहले ट्रेलर देख सोशल मिडिया पर इसके पक्ष में बड़ी बड़ी बात कर रहे थे कई भाजपा शासित प्रदेशो के मुख्यमंत्रियों ने फिल निर्माता को बधाई भी दी सनातन धर्म को समाज के सामने प्रस्तुत करने वाले फिल्म निर्माता के कशीदे पढ़ते देखे गए किन्तु फिल्म रिलीज होने के बाद गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए दिखे . एक पुरानी कहावत है बड़े बुजुर्गो ने कहा है कि हमेशा वह सत्य नहीं होता जो दिखता है कभी कभी सामने कुछ और दिखता है किन्तु जब इसकी गहराइयो में जाओ तो मंजर अलग ही होता है . रिलीज के पहले कई बिकाऊ मिडिया चेनल फिल्म की समीक्षा करते हुए सनातन धर्म की बात करते हुए तारीफ़ करते भी नजर आये किन्तु फिल्म के रिलीज के बाद सब निर्माताओ को दोष दे रहे है . किन्तु परदे के पीछे उन्हें कुछ नहीं कह रहे है जो ऐसी फिल्मो को जनता के सामने लाने की अनुमति दे रहे है .
भारत में कोई भी फिल्म तभी आम जनता के सामने प्रदर्शित होती है जब उसे भारतीय सेंसर बोर्ड अनुमति प्रमाण पत्र देता है अगर सेंसर बोर्ड की अनुमति नहीं मिलती तो यह फिल्म रिलीज ही नहीं होती किन्तु सनातन धर्म का मजाक बना कर जनता के सामने परोसने में जितनी अहम् भूमिका निर्माता की है उससे भी ज्यादा अहम् भूमिका उनकी भी है जिन्होंने इसे प्रमाण पत्र दिया क्या उन्हें धर्म की जानकारी नहीं क्या सनातन धर्म में इस तरह की भाषा का प्रयोग होता है जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है , क्या सेंसर बोर्ड में बैठे जिम्मेदार लोगो ने सनातम धर्म का मजाक नहीं बनाया जिन्होंने इसे आम जनता के सामने परोसने में अहम् भूमिका नहीं निभाई . क्या इसमें जिम्मेदार लोगो पर कार्यवाही नहीं होनी चाहिए किन्तु आज सब निर्माताओ पर दोष लगा रहे है यहाँ तक भाजपा के कद्दावर नेता भी विरोध कर रहे किन्तु सिर्फ निर्माताओ पर दोष लगा कर अपने आप को धर्म रक्षक बता रहे है जबकि उनकी ही सरकार के अधीन सेंसर बोर्ड के जिम्मेदारो पर मौन है जिनकी प्रदर्शन के लिए अनुमति देने की महत्तवपूर्ण भूमिका थी आखिर ऐसे डिहरी राजनीती से क्या धर्म का मजाक नहीं बन रहा .
क्या होता है सेंसर बोर्ड ,कितने मेंबर होते हैं और वो कौन होते हैं
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का एक अध्यक्ष होता है। वर्तमान में सीबीएफसी के अध्यक्ष गीतकार प्रसून जोशी हैं। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड में देशभर से 25 सदस्य और 60 सलाहकार पैनल के सदस्य शामिल हैं। इन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा नियुक्त किया जाता है। बोर्ड के सदस्य आम तौर पर फिल्म और टीवी दुनिया से जुड़े लोग होते हैं। जबकि सलाहकार पैनल के सदस्य अक्सर इंडस्ट्री के बाहर से होते हैं। अध्यक्ष और बोर्ड के सदस्य तीन साल के लिए और सलाहकार पैनल के सदस्य दो साल के लिए काम करते हैं। प्रमाणन बोर्ड के एक सीईओ भी होते हैं, जो मुख्य रूप से प्रशासनिक कामकाज के प्रभारी होते हैं। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी फिल्मों को सर्टिफिकेट देने वाली जांच समितियों का हिस्सा होते हैं।
प्रसून जोशी
प्रसून ही क्यों बने चेयरमैन?
प्रसून जोशी की नियुक्ति के बाद से ही उनकी चर्चा हो रही है और बॉलीवुड ने उनके चेयरमैन बनने पर खुशी जाहिर की है। लेकिन सबके मन सवाल ये भी है कि उन्हीं को क्यों चैयरमैन बनाया गया। दरअसल चर्चाओं का बाजार इसलिए भी गर्म है क्योंकि प्रसून के चेयरमैन बनने के पीछे उनके NDA सरकार से नजदीकियों को वजह बताया जा रहा है। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के प्रचार अभियान में प्रसून ने अहम भूमिका निभाई थी। प्रसून ने बीजेपी के लिए "मैं देश नहीं झुकने दूंगा" प्रचार गीत बनाया था हालांकि इस गाने को बाद में पार्टी ने वापस ले लिया था। साल 2014 की जीत के बाद भी प्रसून बीजेपी के लिए विभिन्न विधानसभा चुनावों में सहयोग करते रहे हैं। प्रसून को बीजेपी में वित्त मंत्री अरुण जेटली का करीबी माना जाता है और सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी के साथ भी वो कई मौकों पर नजर आ चुके हैं।
केन्द्रीय सुचना एवं प्रसारण मंत्री
अनुराग ठाकुर क्यों है अब तक मौन ...
धर्म के नाम पर किसी अन्य प्रदेश में जहा भाजपा का शासन नहीं होता वह कुछ बात हो जाति तो केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर बड़ी बड़ी बात करते किन्तु उनके ही विभाग के अंतर्गत आने वाले सेंसर बोर्ड ने खुल कर धर्म का मजाक बनने वाली फिल्म आदि पुरुष को प्रदर्शित करने की अनुमति दे दी अब केन्द्रीय सुचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर क्या समिति के सदस्यों पर कोई सख्त कदम उठाएंगे या मौन रहकर धर्म की रक्षा की बात का सिर्फ बखान करते रहेंगे .