शुभम दुबे की रिपोर्ट
नवागढ़ / शौर्यपथ / नगर के मिश्रा पारा वार्ड 07 में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिवस में कथावाचक अंतरराज्यीय ख्याति प्राप्त मानस चिंतक पंडित अरुण दुबे ने प्रह्लाद चरित्र के बारे में विस्तार से सुनाया और बताया कि भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी है और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए एवं हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि भक्त और भगवान के बीच जो भावनात्मक संबंध होतेे हैं, उनका वर्णन नहीं किया जा सकता है। भक्तों के कष्ट दूर करने के लिए उनकी एक ही पुकार पर भगवान दौड़े चले आते हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब भक्त निश्छल और कपटरहित हृदय से उनका स्मरण करता है।
कथा व्यास पंडित दुबे बताते हैं कि परमात्मा का वास सब जगह है, बस जरूरत है उसे पहचानने की, जो भी उसे सच्चे मन से स्मरण करता है वह अवश्य ही उसे प्राप्त होता है। उन्होंने भगवन्नाम स्मरण का महात्म्य बताते हुए अजामिल की कथा सुनाई, बताया कि दुष्टात्मा अजामिल ने अपने पुत्र का नाम नारायण रख लिया और अपने अंत समय में जब उसने नारायण को पुकारा तो भगवान स्वयं वहां पधारे और उसकी ज्योति को अपने में विलीन कर उसे मुक्ति प्रदान की।उ न्होंने कहा कि गो, ब्राह्मण, संत और सत्संगी जीवों पर जब भी विपत्ति आती है और वे निर्मल मन से जब भगवान का स्मरण करते हैं तब परमात्मा किसी न किसी रूप में इस धरा पर आकर भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं।
संगीतकारो ने बढ़ाई रौनक
कथा के दौरान वृंदावन धाम से आये संगीतकार पंडित आलोक वशिष्ठ, सत्यम भारद्वाज एवं राजेश दुबे ने भजन "काली कमली वाला मेरा यार है" की जब प्रस्तुति दी।उस भजन पर भक्तजन भाव विभोर हो गए।और नाचने झूमने पर मजबूर हो गए।
कथा श्रवण के लिए कमलेश शर्मा,महेश मिश्रा, राजेन्द्र मिश्रा, मनभर मिश्रा, राकेश जायसवाल, अश्वनी धर दीवान,दारा मिश्रा, पं सुंदरम पाठक, रामावतार, संतोष, दिनेश, बीरबल, सन्तु, विनोद, कृष्णकुमार, बबला, रमेश चौहान, तुलसीराम चौहान, दिनेश साहू, सालिकराम श्रीवास्तव, जुठेल सिन्हा, रामनारायण पाठक, खेलन यादव, बहोरन ठाकुर, बिहारी श्रीवास्तव, कन्हैया भोई, रामनाथ ध्रुव, कयूम खान, बसीर खान सहित आसपास के तमाम भक्त मौजूद रहे।