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वेलेन्टाइन डे की जगह मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाएं युवा सेवा संघ के अध्यक्ष सोनू साहू की प्रार्थना।

  • rounak group

बेमेतरा / शौर्यपथ / 14 फरवरी को माता-पिता का पूजन कर मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने का अपील संस्कृतिप्रिय सभी जिले एवं प्रदेशवासियों से परम पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू द्वारा प्रेरित युवा सेवा संघ बेमेतरा के अध्यक्ष सोनू साहू ने किया और साहू जी ने बताया 14 फरवरी को पश्चिमी देशों में युवक युवतियाँ एक दूसरे को ग्रीटिंग कार्डस, फूल आदि देकर वेलेन्टाइन डे मनाते हैं । यौन जीवन संबंधी परम्परागत नैतिक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों की चारित्रिक सम्पदा नष्ट होने का मुख्य कारण ऐसे वेलेन्टाइन डे हैं जो लोगों को अनैतिक जीवन जीने को प्रोत्साहित करते हैं । इससे उन देशों का अधःपतन हुआ है । इससे जो समस्याएँ पैदा हुईं, उनको मिटाने के लिए वहाँ की सरकारों को स्कूलों में केवल संयम अभियानों पर करोड़ों डॉलर खर्च करने पर भी सफलता नहीं मिलती । अब यह कुप्रथा हमारे भारत में भी पैर जमा रही है । हमें अपने परम्परागत नैतिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए ऐसे वेलेन्टाइन डे का बहिष्कार करना चाहिए ।
इस संदर्भ में विश्ववंदनीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने की है एक नयी पहल ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’। देश में कई लोग वेलेन्टाइन डे मनाते हैं परंतु क्या कोई ये जानने कि कोशिश करता है कि ये ‘वेलेन्टाइन डे’ कहाँ से शुरू हुआ अथवा इसके पीछे क्या राज है। “हजारों-हजारों युवक-युवतियाँ तबाही के रास्ते जा रहे हैं । वेलेंटाइन डे’ के बहाने ‘आई लव यू–आई लव यू’ करते करते दिन-दहाड़े लड़का-लड़की एक-दूसरे को छुएँगे तो रज- वीर्य का नाश होगा । आने वाली संतति तो तबाह होगी लेकिन वर्तमान में वे बच्चे-बच्चियाँ भी तो तबाह हो रहे हैं । तो लाखों-लाखों माता-पिताओं के हृदय की पीड़ा से मेरा हृदय द्रवित हुआ । मेरा हृदय इसका समाधान खोजते-खोजते जहाँ सभी समस्याओं का सही उत्तर मिलता है, उधर गया तो मैंने कहा : विरोध नहीं, विद्रोह नहीं । तो ऐसी गंदगी हमारे देश में न आये इसलिए मैंने वेलेंटाइन डे’ मनाने के बदले ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस ‘ मनाने का आह्वान किया है।
दूरदृष्टि के धनी ऋषि-मुनियों के देश के बच्चों व युवान-युवतियों को अपने ओज, तेज, बल,वीर्य का नाश करने वाले ‘वेलेन्टाईन डे’ का त्याग करना चाहिए । इस दिन मातृ-पितृ पूजन दिवस’ मनायें । बच्चे-बच्चियाँ माता-पिता का आदर-पूजन करें और उनके सिर पर पुष्प रखें, प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें । इस दिन बच्चे माता-पिता का सम्मान करें और माता-पिता बच्चों पर स्नेहाशीष बरसायें । प्रभु के नाते एक दूसरे को प्रेम करके अपने दिल के परमेश्वर को छलकने दें । बेटी माँ को तिलक करे, माँ बेटी को तिलक करे । बेटा बाप को तिलक करे, बाप बेटे को तिलक करे और माता-पिता संतानों को आशीर्वाद दें त्रिलोचन भव । तुम्हारी बाहर की आँख के साथ भीतर की, विवेक की, ज्ञान की कल्याणकारी आँख जाग्रत हो । मातृदेवो भव। पितृदेवो भव।बालिकादेवो भव। कन्यादेवो भव। पुत्रदेवो भव । संस्कृति तो भलाई करती है और विकृति पतन।
हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देव कहा गया है । मातृदेवो भव । पितृदेवो भव । आचार्यदेवो भव । माता-पिता ने हमारे पालन-पोषण में कितना कष्ट उठाया है और हमारे आचार्यों ने हमें सही ज्ञान की सीख दी है । इनकी पूजा-अर्चना व सेवा करने से छोटे-से-छोटा व्यक्ति भी महान बन जाता है । माता-पिता एवं गुरु की सेवा करनेवाला स्वयं चिरआदरणीय बन जाता है । इस सिद्धांत को जिन्होंने भी अपनाया वे खुद भी आदरणीय और पूजनीय बन गये, फिर चाहे वे भगवान गणेशजी हों, भगवान श्रीरामचंद्रजी हों, भीष्म पितामह हों अथवा एक साधारण सा बालक श्रवणकुमार हो या फिर अपने माता -पिता व सदगुरु की सेवा-भक्ति करने वाले विश्वयापी संत श्री आशारामजी बापू हो ।
मंदिर में तो पत्थर की मूर्ति में भगवान की भावना की जाती है जबकि जीते जागते माता-पिता एवं गुरुदेव में तो सचमुच भगवान बसे हैं । ऐसे देवस्वरूप माता-पिता व गुरुजनों का जहाँ आदर-पूजन होता हो वहाँ की धरती माता भी अपने आपको सौभाग्यशाली मानती है ।

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