आगरा । भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर से ठीक पहले आगरा में आयोजित उद्योग संवाद ने इस समझौते को केवल टैरिफ कटौती तक सीमित न मानकर एक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के रूप में स्थापित कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की संयुक्त अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और FTA से मिलने वाले अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।
इस संवाद का केंद्रीय संदेश स्पष्ट था—यह FTA व्यापार, निवेश, प्रतिभा के आवागमन, शिक्षा, पर्यटन और जन-संपर्क जैसे कई आयामों को जोड़ने वाला बहु-स्तरीय फ्रेमवर्क है। सरकार का दृष्टिकोण इसे “जन-केंद्रित आर्थिक साझेदारी” के रूप में विकसित करने का है, जिससे MSME, महिला उद्यमी, किसान और कुशल पेशेवर सभी को लाभ मिल सके।
आगरा का चमड़ा उद्योग इस समझौते का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर सकता है। वर्तमान में भारत के कुल लेदर फुटवियर उत्पादन का लगभग 75% हिस्सा आगरा से आता है। FTA लागू होने के बाद जूते और चमड़े के उत्पादों पर 5% तक का टैरिफ शून्य हो जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। उद्योग जगत ने इस क्षेत्र के 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावनाएं जताई हैं। न्यूजीलैंड के कच्चे चमड़े के संसाधन और भारत की मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता इस सहयोग को और मजबूती देंगे।
फार्मा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में भी FTA को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। त्वरित नियामक स्वीकृति, GMP और GCP रिपोर्टों की पारस्परिक मान्यता से भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश आसान होगा। विशेष रूप से आयुष को लेकर समझौते में एक समर्पित अध्याय शामिल किया जाना एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगा।
पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से अपील की कि वे इस समझौते को केवल व्यापार तक सीमित न रखें, बल्कि शिक्षा, स्किल मोबिलिटी और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भागीदारी करें। उन्होंने MSME सेक्टर तक इसके लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। वहीं टॉड मैक्ले ने भारत को न्यूजीलैंड की रणनीतिक प्राथमिकता बताते हुए इसे अब तक का “उच्च गुणवत्ता वाला FTA” करार दिया और संयुक्त उद्यमों व निवेश के नए अवसरों पर बल दिया।
महज नौ महीनों में तैयार हुआ यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। आगरा में हुआ यह उद्योग संवाद इस बात का संकेत है कि FTA केवल एक कागजी समझौता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उद्योगों, रोजगार और निर्यात को नई दिशा देने वाला परिवर्तनकारी कदम साबित हो सकता है।