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तीन देशों की सफल कूटनीतिक यात्रा के बाद स्वदेश लौटे प्रधानमंत्री मोदी, वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका हुई और मजबूत

  • rounak group

इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरे में रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, निवेश और भारतीय समुदाय से संवाद पर रहा विशेष जोर

नई दिल्ली,।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न कर रविवार दोपहर नई दिल्ली लौट आए। इस बहुपक्षीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने, व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर महत्वपूर्ण चर्चा की।

स्वदेश लौटने के बाद प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यात्रा के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा शुरू की। माना जा रहा है कि इस दौरे में हुए समझौतों और रणनीतिक निर्णयों को लेकर आगामी दिनों में विभिन्न मंत्रालयों के साथ विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीयों से संवाद

ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मेलबर्न में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया तथा भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने और आर्थिक एवं सामरिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

न्यूजीलैंड में द्विपक्षीय वार्ता

न्यूजीलैंड में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने व्यापारिक समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर भारत में निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

इंडोनेशिया में रणनीतिक साझेदारी पर जोर

जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। उन्होंने भारतीय समुदाय से भी मुलाकात कर उन्हें भारत की विकास यात्रा का सहभागी बनने का आह्वान किया।

भारत की वैश्विक भूमिका को मिली नई मजबूती

विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल औपचारिक राजनयिक दौरा नहीं रही, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका, आर्थिक साझेदारी और वैश्विक प्रभाव को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।

स्वदेश लौटने के बाद अब केंद्र सरकार की प्राथमिकता इस यात्रा के दौरान हुए निर्णयों और समझौतों को तेजी से अमल में लाने पर रहेगी, ताकि भारत के आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक हितों को और मजबूती मिल सके।

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