पीयूष गोयल ने पेश की चार स्तंभों वाली रूपरेखा, करीब 40 प्रमुख जापानी कंपनियां शामिल; ्रढ्ढ, सेमीकंडक्टर, रक्षा और डीप-टेक में निवेश पर जोर
टोक्यो/नई दिल्ली( पीआईबी )
भारत और जापान ने स्टार्टअप, डीप-टेक, नवाचार और एमएसएमई के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। टोक्यो में आयोजित भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज सम्मेलन में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम की क्षमता को जापानी तकनीक, निवेश और विनिर्माण विशेषज्ञता के साथ जोडऩे पर जोर दिया। सम्मेलन में करीब 40 प्रमुख जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित निवेशक, उद्योग जगत के दिग्गज, स्टार्टअप और दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल हुए। केन्द्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और पिछले एक दशक में करीब 2.50 लाख स्टार्टअप शुरू हुए हैं। उन्होंने भारत के विशाल घरेलू बाजार, स्ञ्जश्वरू क्षेत्र में उपलब्ध कुशल प्रतिभा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से विकसित हो रहे नवाचार तंत्र को जापानी कंपनियों के लिए निवेश एवं तकनीकी साझेदारी का बड़ा अवसर बताया।
सहयोग के लिए चार स्तंभों की रूपरेखा
केंद्रीय मंत्री ने भारत-जापान स्टार्टअप सहयोग के अगले चरण के लिए चार प्रमुख स्तंभों वाली रूपरेखा सामने रखी। इसमें जापान-भारत डीप-टेक कैपिटल कॉरिडोर, दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, इनक्यूबेटरों, क्र&ष्ठ संस्थानों, प्रयोगशालाओं और परीक्षण सुविधाओं को जोडऩे वाला द्विपक्षीय इनोवेशन ब्रिज, भारत की विनिर्माण क्षमता और इंजीनियरिंग प्रतिभा को जापान की सटीक इंजीनियरिंग एवं तकनीकी क्षमता से जोडऩा तथा भारतीय संस्थापकों, जापानी कंपनियों और निवेशकों के बीच नियमित संवाद के लिए संयुक्त स्टार्टअप पिचिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं। गोयल ने भारत सरकार के करीब 1 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रस्तावित दूसरे 'फंड ऑफ फंड्सÓ का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य डीप-टेक कंपनियों को समर्थन देना है। उन्होंने जापानी निवेशकों से इस फंड में अधिक भागीदारी का आह्वान किया।
65 भारतीय स्टार्टअप्स को 100 जापानी कंपनियों से जोड़ा
भारत में जापान की राजदूत नगमा मोहम्मद मलिक ने दोनों देशों के बीच बढ़ते स्टार्टअप सहयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इंडिया-जापान पिचिंग सीरीज के माध्यम से अब तक 65 भारतीय स्टार्टअप्स को करीब 100 जापानी कंपनियों से जोड़ा जा चुका है और इससे 30 से अधिक व्यावसायिक साझेदारियां विकसित हुई हैं। 222 सदस्यीय भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी को भी दोनों देशों के नवाचार इकोसिस्टम के बीच दीर्घकालिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
्रढ्ढ से अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर तक निवेश की संभावनाएं
संयुक्त उद्यम पूंजी निवेशकों ने भविष्य के भारत-जापान निवेश सहयोग के लिए ्रढ्ढ, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य सेवा, अंतरिक्ष, रक्षा, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी। चर्चा में यह भी सामने आया कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल इंटरनेट और सॉफ्टवेयर आधारित कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से विनिर्माण और प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों की ओर बढ़ रहा है।
भारतीय स्टार्टअप्स ने एयरोस्पेस एवं रक्षा, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य सेवा, कृत्रिम अंग, रोबोटिक्स, वेयरहाउस ऑटोमेशन, मोबिलिटी और डिजिटल हेल्थ जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। कंपनियों ने जापानी भागीदारों के साथ तकनीकी सत्यापन, सटीक विनिर्माण, निवेश, बाजार पहुंच और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल होने की संभावनाओं पर चर्चा की।
भारत की प्रतिभा और जापान की तकनीक का मेल
छ्वढ्ढष्ट्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शोहेई हारा ने भारत और जापान की पूरक क्षमताओं पर जोर दिया। जापानी पक्ष ने भारत के बड़े बाजार और स्टार्टअप इकोसिस्टम में मौजूद अवसरों के प्रति रुचि दिखाई। छ्वढ्ढष्ट्र ने जापानी स्टार्टअप्स को भारतीय बाजार के अवसरों से अधिक से अधिक जोडऩे की इच्छा भी जताई।
सम्मेलन में टोक्यो मेट्रोपॉलिटन सरकार और छ्वश्वञ्जक्रह्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। उद्योग प्रतिनिधियों ने स्टार्टअप और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ एमएसएमई को जोडऩे तथा भारत में विनिर्माण और विस्तार की इच्छुक कंपनियों के लिए प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत बताई।
गोलमेज सम्मेलन में इस बात पर जोर रहा कि भारत की प्रतिभा, डिजिटल क्षमता, विशाल बाजार और उद्यमशीलता को जापान की उन्नत तकनीक, दीर्घकालिक पूंजी, सटीक इंजीनियरिंग और विनिर्माण उत्कृष्टता के साथ जोड़कर विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यम विकसित किए जा सकते हैं। बैठक का समापन भारत-जापान स्टार्टअप सहयोग को नियमित निवेश संवाद, सह-निवेश, तकनीकी साझेदारी तथा विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, इनक्यूबेटरों और उद्योगों के बीच मजबूत संस्थागत संबंधों के माध्यम से नई ऊंचाई देने के संकल्प के साथ हुआ।