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May 24, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

  रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक विकास और तकनीकी सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर अपने जापान प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की उद्योगोन्मुखी और निवेश प्रोत्साहनकारी नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जापान तकनीकी दृष्टि से अग्रणी देश है और वहां की उन्नत विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के निवेश और सहयोग से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार हुआ है, जिससे उद्योगों के विस्तार के लिए बेहतर संभावनाएं उपलब्ध हो रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में अपने निवेश को और बढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की।
इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, एफसेनल के डायरेक्टर युकीहिरो मोमोसे, कोनोइके ट्रांसपोर्ट के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर तोशीहीरो फूजीवारा, एफएसएनएल के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील कुमार दीक्षित तथा हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के पूर्व सीएमडी के. डी. दीवान उपस्थित थे।

₹56.11 लाख की लागत से हुआ ऐतिहासिक विद्युतीकरण, दुर्गम जंगलों के बीच टीम ने रचा नया कीर्तिमान

रायपुर ।
छत्तीसगढ़ के सुदूर और दुर्गम क्षेत्र Abujhmad के छोटे से गांव Irpanar Village में आखिरकार दशकों का अंधेरा टूट गया। वर्षों तक लालटेन और लकड़ी की रोशनी पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के घरों में जब पहली बार बिजली के बल्ब जले, तो गांव ने सिर्फ उजाला ही नहीं, बल्कि विकास की एक नई शुरुआत को महसूस किया।

यह गांव जिला मुख्यालय Narayanpur से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है, लेकिन यहां तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं। कच्चे रास्ते, ऊंची पहाड़ियां, घने जंगल और कई स्थानों पर पैदल सफर—इन कठिन परिस्थितियों के बीच यह कार्य पूरा किया गया।


घने जंगलों के बीच चला विकास का मिशन

इस चुनौतीपूर्ण कार्य को Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited के नारायणपुर संभाग ने प्राथमिकता से पूरा किया। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में मिशन मोड में कार्य करते हुए गांव तक बिजली पहुंचाने में सफलता हासिल की।

जिला कलेक्टर Namrata Jain ने बताया कि ईरपानार तक बिजली पहुंचाना सामान्य तकनीकी कार्य नहीं था। कई स्थानों पर बिजली के खंभे, तार और उपकरण पहुंचाने के लिए मशीनों के बजाय मानव श्रम और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग का सहारा लेना पड़ा। ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों और सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने समयबद्ध तरीके से लाइन विस्तार, पोल स्थापना और कनेक्शन का कार्य पूरा कर एक मिसाल पेश की।


₹56.11 लाख की लागत, पीढ़ियों तक मिलेगा लाभ

ग्राम ईरपानार के विद्युतीकरण कार्य पर कुल ₹56.11 लाख की लागत आई। इस परियोजना के तहत गांव के परिवारों को पहली बार विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया। यह पहल उस सोच का प्रतीक है, जिसमें अंतिम छोर पर बसे परिवार तक विकास का समान अधिकार पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।


अब बच्चों के सपनों को मिलेगा उजाला

बिजली पहुंचने से गांव के बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। अब उन्हें रात में पढ़ाई के लिए पर्याप्त रोशनी मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग जैसी सामान्य सुविधाएं, जो पहले संभव नहीं थीं, अब आसानी से उपलब्ध होंगी। पंखे, लाइट और छोटे घरेलू उपकरणों से ग्रामीणों का जीवन पहले से अधिक सहज होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली आने से भविष्य में डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, संचार सुविधाएं और छोटे व्यवसायों के नए अवसर भी विकसित हो सकेंगे।


पहली बार जले बल्ब, गांव में छाई खुशी

जब गांव में पहली बार बिजली के बल्ब जले, तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार अपने घरों में स्थायी रोशनी देखी है। वर्षों से लालटेन और सीमित साधनों पर निर्भर जीवन अब तेजी से बदलने लगा है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और बिजली विभाग की टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे गांव के इतिहास का स्वर्णिम दिन बताया।


अबूझमाड़ में विकास की नई शुरुआत

ईरपानार की सफलता अब पूरे अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए एक नई उम्मीद बन गई है। प्रशासन द्वारा अन्य दूरस्थ गांवों को भी प्राथमिकता के आधार पर बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

यह सिर्फ बिजली पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि विकास की उस नई रोशनी की शुरुआत है, जो अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगी।

रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री मोहन तिवारी के पूज्य पिता श्री दिलीप तिवारी जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने शोक संदेश में कहा कि श्री दिलीप तिवारी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।

उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य और संबल दें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के सख्त निर्देश— क्रियान्वयन में ढिलाई पर तय होगी जवाबदेही

रायपुर ।
प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए Vishnu Deo Sai ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 30 जून 2026 तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में बदलाव किया गया है, ताकि छोटे बच्चों को अत्यधिक तापमान और लू के दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके।

निर्णय के तहत अब सभी आंगनबाड़ी केंद्र प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित किए जाएंगे, जबकि बच्चों की उपस्थिति केवल सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक सीमित रहेगी। इससे बच्चों को तेज धूप और गर्म हवाओं से बचाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया है कि बदले हुए समय के बावजूद बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख (ECCE) गतिविधियां निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित होंगी। साथ ही पूरक पोषण आहार का वितरण नियमित रूप से जारी रहेगा, जिससे बच्चों के पोषण और शिक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

गृहभेंट के माध्यम से माताओं को किया जाएगा जागरूक

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केंद्र बंद होने के पश्चात गृहभेंट के माध्यम से पोषण परामर्श सेवा को और प्रभावी बनाएं। इसके तहत कार्यकर्ता घर-घर जाकर माताओं को बच्चों के पोषण और गर्मी से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करेंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि गर्म हवाओं और लू की स्थिति में बच्चों को सुरक्षित रूप से घर तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

मंत्री राजवाड़े ने दिए सख्त निगरानी के निर्देश

महिला एवं बाल विकास मंत्री Laxmi Rajwade ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी सुनिश्चित करें। जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा की जाएगी, ताकि जमीनी स्तर पर निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और निर्देशों के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

01 जुलाई से फिर सामान्य समय पर लौटेंगे केंद्र

ग्रीष्मकाल समाप्त होने के बाद 01 जुलाई 2026 से आंगनबाड़ी केंद्र पुनः अपने सामान्य समय प्रातः 9:30 बजे से 3:30 बजे (6 घंटे) तक संचालित किए जाएंगे।

 

रायपुर ।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है तथा ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। विभाग ने आम नागरिकों से किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार लगातार भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संपर्क में है, ताकि प्रदेश की ईंधन आवश्यकताओं की निर्बाध पूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

प्रदेश में पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति नियमित

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आपूर्ति की साप्ताहिक समीक्षा नियमित रूप से की जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रदेश में संचालित 2,516 पेट्रोल पंपों तथा तीनों प्रमुख ऑयल कंपनियों के डिपो में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है।

आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में प्रदेश की मासिक पेट्रोल आवश्यकता 1.01 लाख किलोलीटर के मुकाबले 1.27 लाख किलोलीटर (126 प्रतिशत) पेट्रोल की आपूर्ति की गई। वहीं अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.60 लाख किलोलीटर पेट्रोल प्राप्त हो चुका है।

इसी प्रकार मार्च 2026 में डीजल की आवश्यकता 1.64 लाख किलोलीटर के विरुद्ध 3.00 लाख किलोलीटर (183 प्रतिशत) डीजल की आपूर्ति की गई। जबकि अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.38 लाख किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की जा चुकी है। यह स्पष्ट करता है कि प्रदेश में मांग के अनुरूप पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई

अधिकारियों ने बताया कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों में आकस्मिक निरीक्षण और छापेमारी की कार्रवाई जारी है। राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। आम नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए विभागीय कॉल सेंटर (1800-233-3663) भी सक्रिय रूप से कार्यरत है।

औद्योगिक उपभोक्ताओं को दिए गए विशेष निर्देश

23 अप्रैल 2026 को खाद्य विभाग के संचालक की अध्यक्षता में तीनों ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह जानकारी सामने आई कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता रिटेल आउटलेट से डीजल खरीद रहे हैं, जिससे अस्थायी दबाव की स्थिति बनती है। इस पर कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करें।

22 दिन का पेट्रोल, 15 दिन का डीजल स्टॉक उपलब्ध

वर्तमान स्थिति के अनुसार प्रदेश में लगभग 77,111 किलोलीटर पेट्रोल उपलब्ध है, जो लगभग 22 दिनों की आवश्यकता के बराबर है। इसी प्रकार 84,295 किलोलीटर डीजल उपलब्ध है, जो करीब 15 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है।

राज्य सरकार ने पुनः आश्वस्त किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में बोले मुख्यमंत्री, गांवों के विकास में जनप्रतिनिधियों की भूमिका बताई अहम

रायपुर ।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डबल इंजन की सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर स्थित डीडीयू ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का समग्र विकास संभव है और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सकता है।

पंचायत से शुरू हुआ मेरा राजनीतिक सफर: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंच और सरपंच के रूप में की थी। पंचायत स्तर पर कार्य करते हुए प्राप्त अनुभव ही आगे की जिम्मेदारियों के निर्वहन में सहायक बने। उन्होंने कहा कि आज अनेक जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्यों से ही प्रभावी नीतियां तैयार होती हैं।

ग्रामीण विकास योजनाओं से गांवों में आया बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से ग्रामीणों को पक्के मकान उपलब्ध हो रहे हैं और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के जरिए बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सुलभ हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। महिलाओं के लिए महतारी सदन का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है, जिनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से पंचायतों में संचालित सभी विकास कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन हो सके। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सुशासन तिहार में निभाएं सक्रिय भूमिका

मुख्यमंत्री ने आगामी सुशासन तिहार का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों पर सरचार्ज माफी और अतिरिक्त रियायत का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों तक पहुंचाने की अपील की।

पंचायतों को हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी सरकार

राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार विकास कार्यों की स्वीकृति दी जा रही है।

सम्मेलन को सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया।


मुख्यमंत्री ने विभिन्न परियोजनाओं के स्टालों का किया अवलोकन

मेगा स्वास्थ्य शिविर और नवाचार आधारित योजनाओं की सराहना

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा आयोजित विभिन्न परियोजनाओं के स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर की सराहना की तथा सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा कर उनके आजीविका संवर्धन के प्रयासों की प्रशंसा की।

मुख्यमंत्री ने नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान हेतु प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा और प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी सहित विभिन्न नवाचार आधारित परियोजनाओं का अवलोकन किया। इस दौरान हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं आर्थिक सहायता भी वितरित की गई।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के अंतर्गत तैयार शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन भी किया। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों को आमजन के लिए लाभकारी बताते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

खरीफ 2026 के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित, कालाबाजारी व जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

रायपुर ।
राज्य में खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों को खाद की किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। पंजीकृत रकबे के अनुरूप सभी किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने यह जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति पर कार्य कर रही है।

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अग्रिम तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से खरीफ सीजन 2026 के लिए केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित किया गया है। इसमें यूरिया 7.25 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 3 लाख मीट्रिक टन, एमओपी 80 हजार मीट्रिक टन, एनपीके 2.5 लाख मीट्रिक टन तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं।

गोदामों में 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध

मंत्री श्री नेताम ने बताया कि वर्तमान में राज्य के गोदामों और सहकारी समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। 30 मार्च की स्थिति के अनुसार स्टॉक में यूरिया 2,43,717 मीट्रिक टन, डीएपी 1,05,631 मीट्रिक टन, एनपीके 1,69,109 मीट्रिक टन, एमओपी 50,431 मीट्रिक टन और एसएसपी 1,78,657 मीट्रिक टन शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य है कि पारदर्शिता के साथ सभी किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जाए।

वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग पर जोर

पश्चिम एशियाई संकट के मद्देनजर रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए विभाग द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत एनपीके 12:32:16, 20:20:0:13, हरी खाद, जैविक खाद तथा नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।

मंत्री श्री नेताम ने स्पष्ट किया कि उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों का गठन किया गया है। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा

कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों का पंजीयन शीघ्र पूर्ण किया जाए तथा बीज एवं उर्वरक वितरण के लिए नई ई-वितरण प्रणाली लागू की जाए।

उन्होंने रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में हरी खाद, जैव उर्वरक और नील-हरित काई के उपयोग को बढ़ावा देने तथा उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी और डायवर्जन रोकने के लिए जिलों को कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए।

दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों पर विशेष फोकस

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (प्राइस सपोर्ट स्कीम) के तहत दलहन और तिलहन फसलों के उपार्जन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक जिले में सुगंधित धान के उत्पादन को बढ़ावा देने, दलहन-तिलहन फसलों के विस्तार तथा उद्यानिकी क्षेत्र में ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

 

बिलासपुर ।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रभावी क्रियान्वयन में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 50 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए हैं। यह सफलता प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), पीएम जनमन योजना तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के समन्वित और प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है, जिससे हजारों जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत मिली है।

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर जिले ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 50 हजार 44 परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए। जिला प्रशासन द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इस दौरान 781.13 करोड़ रुपये की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हस्तांतरित की गई, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और निर्माण कार्यों में तेजी आई।

विकासखंडवार प्रदर्शन में मस्तूरी अव्वल

क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मस्तूरी विकासखंड 14 हजार 973 आवासों के साथ जिले में शीर्ष पर रहा। इसके बाद बिल्हा में 13 हजार 762, कोटा में 11 हजार 205 और तखतपुर में 10 हजार 104 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया। ये आंकड़े प्रशासनिक दक्षता और जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाते हैं।

नारी शक्ति बनी सफलता की मजबूत आधारशिला

इस ऐतिहासिक सफलता में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिले में 113 महिलाओं को ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में प्रशिक्षित कर निर्माण कार्य में शामिल किया गया, जिससे वे आत्मनिर्भर बनीं। वहीं 331 महिलाओं को ‘डीलर दीदी’ बनाकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा 2,231 महिलाओं को शटरिंग सामग्री किराये पर उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे निर्माण कार्यों में तेजी आई और महिलाओं के लिए आय के नए अवसर विकसित हुए।

प्रदेश में दूसरा स्थान, मजबूत योजना का परिणाम

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक बिलासपुर जिले ने 1 लाख 3 हजार 873 आवास पूर्ण कर छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि जिले की मजबूत कार्ययोजना, सतत मॉनिटरिंग और जनसहभागिता का परिणाम है।

योजना का मानवीय पक्ष भी उतना ही प्रेरणादायक है। ग्राम डारसागर की झांगली बैगा और ग्राम नेवसा की कैलाशा बाई जैसी हितग्राही, जो वर्षों तक कच्चे मकानों में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही थीं, आज पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं। उनके लिए यह घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि सुरक्षा, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य का प्रतीक है।

सम्मान और सुरक्षा की नई नींव

कलेक्टर बिलासपुर ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि ये 50 हजार से अधिक घर केवल ईंट और सीमेंट की संरचनाएं नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान और सुरक्षा की मजबूत नींव हैं। वहीं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि भविष्य में भी पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

जनसंपर्क अधिकारियों को जिम्मेदारी से कार्य करने के निर्देश, परिणाम आधारित मूल्यांकन की चेतावनी

रायपुर ।
जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल ने कहा है कि वर्तमान डिजिटल युग में जनसंपर्क अधिकारियों के लिए न्यू एज मीडिया की सभी विधाओं में दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते समय के साथ नई तकनीकों और संचार माध्यमों को अपनाना ही प्रभावी जनसंपर्क की कुंजी है।

आयुक्त श्री बंसल आज नवा रायपुर स्थित संवाद कार्यालय में जनसंपर्क संचालनालय एवं जिला जनसंपर्क अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क का कार्य अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण है और इसे पूरी गंभीरता के साथ निभाना चाहिए। शासन और जनता के बीच जनसंपर्क अधिकारी एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अधिकारी के कार्यों का मूल्यांकन उनके परिणामों के आधार पर किया जाएगा।

बैठक में उन्होंने मंत्रिगणों, विभागीय सचिवों, विभागाध्यक्षों तथा जिला कलेक्टरों के साथ नियमित संपर्क और समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे सूचनाओं का समयबद्ध और प्रभावी आदान-प्रदान संभव होगा, जो शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रचार-प्रसार के लिए अत्यंत आवश्यक है।

आयुक्त श्री बंसल ने आगामी एक मई से प्रारंभ होने वाले प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के प्रचार-प्रसार की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार सुनिश्चित करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माध्यम का प्रभावी उपयोग करते हुए योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है।

उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि राज्य में संचालित विकास कार्यों और योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के वास्तविक अनुभवों को वीडियो पोस्ट और समाचारों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए, ताकि अन्य नागरिक भी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित हो सकें। साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ सतत संपर्क एवं समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक के दौरान जनसंपर्क आयुक्त ने प्रचार-प्रसार कार्य में लापरवाही बरतने पर तीन जिला जनसंपर्क अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को सक्रिय और जिम्मेदार तरीके से कार्य करते हुए शासन की योजनाओं को आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने का आह्वान किया।

बैठक में अपर संचालक सर्वश्री उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव तथा श्रीमती हर्षा पौराणिक सहित संचालनालय और जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी उपस्थित रहे।

सूचना प्रौद्योगिकी पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न, अधिकारियों को नई तकनीकों से अपडेट रहने के निर्देश

रायपुर ।
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा है कि शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ आम जनता तक शीघ्र और प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से नई और उभरती तकनीकों को अपनाते हुए नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और सुलभ बनाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव आज मंत्रालय महानदी भवन में उभरती नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सूचना एवं संचार से जुड़े संस्थानों को अपने मोबाइल ऐप, वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिक केन्द्रित और उपयोग में आसान बनाने चाहिए, ताकि आम लोगों को योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) के अधिकारियों को नई आईटी तकनीकों से हमेशा अपडेट रहना चाहिए, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक तेजी से पहुंचाया जा सके।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद ने राज्य स्तरीय सूचना केन्द्र और जिला सूचना विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों से उनके संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों और आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र, नई दिल्ली के उप महानिदेशक श्री दयानंद साहा ने कहा कि विभिन्न नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सरकारी योजनाओं के जरिए नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं।

कार्यशाला में ट्रिपल आईटी के संचालक एवं कुलपति प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग और उसके संभावित लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। इसके अलावा एनआईसी छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक श्रीकांत पाण्डे ने साइबर सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए। संयुक्त संचालक श्री अभिजीत कौशिक, श्री उपेन्द्र सिंह सहित अन्य आईटी विशेषज्ञों ने भी प्रतिभागियों को विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जिलों से आए जिला सूचना विज्ञान अधिकारियों तथा राज्य स्तरीय अधिकारियों के बीच नागरिक सेवाओं में सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग और शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक शीघ्र पहुंचाने के विषय में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

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