दुर्ग / शौर्यपथ /
दुर्ग शहर में नेहरू नगर चौक से पुलगांव चौक तक सड़क समीकरण एवं सौंदर्य करण का कार्य पिछले 4 वर्षों से ज्यादा समय से जोरो पर चल रहा है हालांकि अब यह मार्ग अपनी पूर्णता की ओर है किंतु इसी मार्ग पर साल भर पहले दुर्ग जिला कलेक्टर पुष्पेंद्र मीना जब जिला अस्पताल के सामने अव्यवस्थित स्ट्रीट वेंडरो को जिला अस्पताल परिसर के सामने वस्थित रूप से व्यापार करने हेतु व्यवस्थित दूकान बनाने एवं व्यवस्थापित करने कि बात कही इसके बाद दुर्ग नगर पालिक निगम के द्वारा स्ट्रीट वेंडरो के लिए जिला अस्पताल परिसर की दीवाल से लगकर एक सुव्यवस्थित व्यापार केंद्र बनाया गया जिसमें जिला अस्पताल परिसर के आसपास अवस्थित रूप से दुकान लगाकर सालों से अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं उन्हें दुकान देने की बात कही गई परंतु दुर्ग नगर निगम प्रशासन ने कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा के उन सोचो को भी दरकिनार कर दिया जिसके तहत ऐसे व्यापारी जो सालों से सड़कों पर दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं आज स्थिति यह है कि जिला कलेक्टर परिसर के पास 14 दुकानें बनणी थी किंतु अधिक दुकान बनी और सर्वे के अनुसार जिन लोगों की दुकान सड़कों पर थी उन्हें दुकान ना दी जाकर कुछ ऐसे लोगों को यह दुकान दे दी गई जिनका स्ट्रीट वेंडर के रूप में कहीं भी कोई कार्य नजर नहीं आता वहीं जिला अस्पताल से लगे कुछ दुकानदारों का कहना है कि इनमें से तीन-चार दुकान ने तो ऐसी है जो कभी खुली नहीं है और जब इनके मालिक आते हैं तो हम उन्हें पहचान भी नहीं पाते।
दूसरे रूप में कहा जाए तो दुकानदारों को भी नहीं पता कि नगर निगम प्रशासन ने जिन्हें दुकान दी हैं वह व्यक्ति कौन है जबकि वहां पर ऐसे तीन-चार दुकानदार हैं जिन्हें दुकान नहीं मिली है वहीं विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सर्वे का कार्य और आवंटन का कार्य नगर निगम का एनयुएलएम विभाग के द्वारा किया जाना निर्धारित किया गया था किंतु इस विभाग द्वारा अपने चहेतों को जो की पात्र भी नहीं है उन्हें दुकान दिया गया है वही एक दो दुकानदारों ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि इस बात का जब हम उनके द्वारा विरोध किया गया तो अधिकारियों द्वारा उन्हें डांट कर भगा दिया गया एवं एक दो अनजान व्यक्ति उन्हें इस मामले पर चुप रहने की धमकी भी देकर गए गरीब व्यापारी दुकान न मिलने के गम में आज भी सड़कों पर व्यापार कर रहे हैं आज जहां छोटी-छोटी बातों पर खून खराबा हो जाता है ऐसे में गरीब दुकानदार अपने हक की दुकान को किसी और के सुपुर्द होते देख मन मसोस कर एक बार फिर सड़कों पर व्यापार कर रहे हैं वही दुर्ग नगर निगम के प्रशासनिक मुखिया भी मामले पर मौन साधे हुए है .
क्या निगम आयुक्त चंद्राकर द्वारा साल भर पहले दुर्ग जिला कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा द्वारा व्यवस्थापि तरीके से दुकान आवंटन की बात की गई थी उस मामले पर दुकानों के दस्तावेजों की जांच कर सडको पर दूकान लगाने वालो को उनका हक़ दिलाते है या नहीं यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी वही जिन अपात्र लोगो को दूकान दि गयी है उन पर किस तरह की कार्यवाही करते है यह भी भविष्य में ही ज्ञात होगा .