मेलबॉक्स /शौर्यपथ / आत्मनिर्भर भारत की सफलता का ब्रह्मास्त्र है, वेस्ट मैटेरियल यानी अनुपयोगी सामान का पुनर्चक्रण। हमें समझना होगा कि कोई भी सामान अनुपयोगी नहीं होता, बस उसके रिसाइकिल करने की देर होती है। आज पुनर्चक्रण का यह काम मेट्रो या बड़े शहरों तक सीमित है, वह भी शत-प्रतिशत नहीं। यह जान लेना चाहिए कि चीन का माल इसलिए सस्ता होता है, क्योंकि वह पुनर्चक्रण में विश्वास करता है। यदि हमारे यहां भी ऐसी कोई व्यवस्था लागू हो जाए, तो उत्पादों की कीमतें काफी कम हो जाएंगी। इससे हम चीन की वस्तुओं को दाम के आधार पर टक्कर दे सकेंगे। सामूहिकता से भरे इन प्रयासों से नए रोजगार का भी सृजन होगा और पर्यावरण को साफ-सुथरा बनाए रखने में भी हम कामयाब हो सकेंगे। इसलिए विकासवाद के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के होने वाले बेतरतीब दोहन को सीमित करके हमें पुनर्चक्रण की तरफ बढ़ना चाहिए।
विकास पंडित, बड़वानी, मध्य प्रदेश
एकजुटता जरूरी
आज हमारा देश एक साथ कई मोर्चों पर उलझा हुआ है। कोविड-19, भुखमरी, आर्थिक विकास, पलायन के साथ-साथ अब चीन व नेपाल के साथ हमारा सीमा-विवाद भी गहरा गया है। देशप्रेमी अपनी लालसा को शांत करके हर परिस्थिति में सरकार और देश के साथ खडे़ हैं, पर विघ्न संतोषी सरकार और देश के आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। वे देश में धार्मिक अफवाह भी फैला रहे हैं। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों पर देश को टुकड़ों में बांटा जा रहा है। इसके जवाब में आम जनता में एकजुटता जरूरी है। लगता है, अंग्रेजों का गुलाम रहकर और अपनी संतानों को खोकर भी कुछ लोग आज तक यह नहीं समझ पाए हैं कि आपस में दुश्मनी रखना मजहब भी नहीं सिखाता है। हमें इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए।
ममता रानी, काशीपुर
उल्टा पड़ता दांव
चीन का कमोबेश अपने सभी पड़ोसी देशों से सीमा-विवाद है। सिर्फ जमीनी सीमा ही नहीं, वह दक्षिण चीन सागर में भी अपना दावा जताता रहा है। हालांकि, वहां अमेरिका के प्रत्यक्ष विरोध के कारण उसकी दाल नहीं गल रही है। चीन अब तक इसलिए बढ़ता रहा है, क्योंकि वह अपनी ताकत का प्रदर्शन करके सामने वाले देश को झुका देता है। यही हथकंडा उसने भारत के खिलाफ भी अपनाने की गुस्ताखी की है। पहले जरूर उसने हमारे कुछ क्षेत्रों को हथिया लिया है, लेकिन इस बार सरकार ने साफ कर दिया है कि उसकी एक भी मनमानी भारतीय सीमा के अंदर नहीं चलेगी। चीन की विस्तारवादी नीति पहली बार उस पर ही भारी पड़ती नजर आ रही है। गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों को निशाना बनाना उसे कितना भारी पड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हमारे सैनिकों से ज्यादा उसके सैनिकों की जान गई है। यह साफ बताता है कि भारत से उलझना अब चीन के लिए हर मोर्चे पर भारी पड़ने वाला है।
धीरज पाठक, शास्त्री नगर, चैनपुर
पुराने बनाम नए नोट
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वर्तमान में जारी किए जा रहे छोटे साइज के नए नोटों के कागज पुराने और अपेक्षाकृत निम्न गुणवत्ता के प्रतीत होते हैं। इस कारण जहां पुराने नोटों का जीवन लंबा महसूस हो रहा है, वहीं नए नोट जल्दी खराब हो रहे हैं। ऐसे में, केंद्र सरकार से अनुरोध है कि वह आरबीआई को इस बात के लिए निर्देशित करे कि उच्च गुणवत्ता के कागजों का ही नए नोटों में इस्तेमाल हो। इसके साथ ही प्लास्टिक कोटेड नोट भी जारी किए जाएं, ताकि पड़ोसी देशों से नकली नोटों की आने वाली खेप रोकी जा सके। इससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों से भी बचा जा सकेगा।
प्रमोद अग्रवाल गोल्डी, हल्द्वानी,