मेलबॉक्स / शौर्यपथ / से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से देश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अभी हम संक्रमितों के मामले में तीसरे सबसे बड़े देश हैं। बहुत सारे लोगों ने लॉकडाउन का मजाक उड़ाया था, परंतु अनलॉक में मरीजों की बढ़ती संख्या उन्हें माकूल जवाब दे रही है। गनीमत है कि हमारे यहां इस बीमारी के कारण मृत्यु-दर कम है, लेकिन इसका एक प्रभाव यह है कि लोग असावधान हो गए हैं। यह हाल तब है, जब स्वास्थ्य संसाधन के लिहाज से हमारी हालत बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में, यदि सामुदायिक संक्रमण फैलता है, तो बीमारी पर काबू पाना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए एक सच्चे नागरिक का हम फर्ज निभाएं और सुरक्षित रहने का हर तरीका अपनाएं। सजगता ही इसका निदान है।
आनंद पाण्डेय, रोसड़ा
हकीकत समझे नेपाल
आज नेपाल जिस प्रकार चीन के इशारे पर भारत को आंखें दिखाने की हिमाकत कर रहा है, उसे इसका अंदाजा नहीं है कि चीन धीरे-धीरे उस पर कब्जे की कोशिश में है। आजाद भारत में पहली बार ऐसा हुआ है कि बेटी-रोटी के संबंधों के बीच दूसरी ओर से कंटीली तारों से सीमा-रेखा खींचे जाने की बात कही गई और भारत की संप्रभुता को चुनौती देने का प्रयास किया गया। ऐसी स्थिति में भारत को ठोस कदम उठाना ही होगा। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि अपनी विस्तारवादी नीतियों के तहत चीन कई देशों की अर्थव्यवस्था पर कब्जा जमा चुका है। वह रह-रहकर हमें भी आंखें दिखाता है। ऐसे में, नेपाल को यह समझ लेना चाहिए कि चीन के प्रति दोस्ताना रवैया भविष्य में उसे परतंत्र बना सकता है। उसे अपनी संप्रभुता की रक्षा करनी चाहिए, ताकि उसका अस्तित्व स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में बरकरार रहे।
बिन्नी कुमारी, सारण
पीछे लौटा चीन
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले लगभग दो महीनों से जो भारी तनाव बना हुआ था, उसमें अब काफी सुधार आया है और चीन की सेना वापस लौटने लगी है। यह एक सुखद खबर है, क्योंकि युद्ध से किसी भी देश का भला नहीं होता। भारत की जवाबी कार्रवाइयों और आर्थिक चोट के बाद चीन में यह नरमी आई है। दोनों देशों के बीच सामान्य रिश्ता बेहद जरूरी है, क्योंकि दोनों एशिया की सबसे महत्वपूर्ण ताकतें हैं। इनका आपस में टकराना इस पूरे उपमहाद्वीप में शांति के लिहाज से अच्छा नहीं होगा। इससे विश्व राजनीति पर भी असर पडे़गा। सबसे अच्छी बात यह है कि समय रहते बीजिंग को इस बात का एहसास हो गया और वह पीछे लौट गया।
शुभम पांडेय गगन
अयोध्या, फैजाबाद
विवाद बनाम व्यापार
किसी देश की अर्थव्यवस्था पर चोट करने से उसकी अकल ढीली पड़ जाती है। इसका ज्वलंत उदाहरण चीन है। वह भारत से टकराने की नीति से पीछे हट गया है। दरअसल, भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए उसके 59 एप पर पाबंदी लगा दी, साथ ही रेलवे ने चीन की कंपनियों को मिले ठेके रद्द कर दिए। हमारे इस सख्त रुख को देखकर चीन को यह बात समझ में आ गई कि भारत विवाद और व्यापार एक साथ नहीं करेगा। इसके बाद चीन पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पीछे हटने लगा। इससे स्वाभाविक तौर पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बहाल हो सकेगी। इससे नेपाल के तेवर भी नरम पड़ जाएंगे। मानचित्र विवाद को उसने बेवजह ही तान दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के उकसावे में आकर वह ऐसा कर रहा है। चूंकि अब चीन को एहसास हो गया है कि भारत 1962 के दौर से काफी आगे बढ़ चुका है, इसलिए वह शायद ही हमसे टकराना चाहेगा। ऐसा होने पर नेपाल भी ढीला पड़ता जाएगा, क्योंकि उसे चीन का साथ शायद ही मिले।
राकेश चौधरी, दरभंगा, बिहार