विशेष लेख /शौर्यपथ/
मनुष्य के तन-मन-धन सबको संवारने में पक्षी परिवार का अतिमहत्वपूर्ण योगदान होता है।जन्मजात विविध क़िस्म के पक्षी मानव मित्र होते हैं।फलों,फसलों में लगे कीड़ों मकोड़ों को खाकर वे न केवल फलों और फसलों की रक्षा करते हैं,अपितु फूलों के परागकण को एक फूल से दूसरे फूल में पहुंचाने का भी कार्य पक्षियों द्वारा किया जाता है।इसी प्रक्रिया से पेड़ पौधों में फल और बीज का निर्माण होता है।बहुपयोगी वनों का विस्तार होता है।
पक्षियों से बढ़ती दूरियों के कारण इंसान की जिंदगी नीरस होती जा रही है।साथ ही कोयल,कौआ,गौरैया फाक्ता,बुलबुल,कबूतर जैसे पक्षियों से बढ़ती दूरी मानव समुदाय के लिए अनेक अर्थों में हानिकारक सिद्ध हो रही है।
सहजता-निर्भयता से गौरैया घर बना लेती थी।उसके भीतर पलते पखेरुओं की चीं चीं से कमरा भर उठता था।अब तो ऐसी मनमोहक स्थिति लगभग खत्म हो चली है।अगर भूले से किसी घर के भीतर गौरैया घोसला बनाने लगे तो लोग उसे पहले ही भगा देते हैं।घर में कचरा फैला रही है ,खराब कर रही है कहते हुये गौरैया को पनाह देने में लोग हिचकते हैं।कई ऐसी घटनायें भी देखने को मिली है,जब घर के अंदर घूमते हुये पॅखे से टकरा कर गौरैया की जान चली गई।