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कमरछठ और हलषष्ठी के लिए बाजारों में उमड़ी भीड़

  • rounak group

दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्यौहार कमरछठ अथवा हलषष्ठी कल रविवार को मनाया जायेगा। इसके खरीददारी के लिए आज बाजारों मे ंभारी भीड़ उमड़ पड़ी क्योंकि एक तो कल ही कमरछठ है और रविवार को पूर्व लॉकडाउन के कारण कल बाजारे नही खुलेगी। अपने संतानों की लंबी उम्र के लिए माताएं निर्जला व्रत रख शिव पार्वती की पूजा करेंगी। इस पारम्परिक पर्व के एक दिन पहले आज भिलाई-दुर्ग के बाजारों में पूजन सामग्री खरीदने भीड़ उमड़ पड़ी। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस अवसर पर सगरी बनाकर सामूहिक पूजा-अर्चना किए जाने को लेकर महिलाओं में संशय की स्थिति बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ के पारम्परिक त्योहारों में से एक कमरछठ कल रविवार को मनाया जाएगा। संतान की लंबी उम्र के लिए मनाये जाने वले इस पर्व में बिना हल चली चीजों का उपयोग किया जाता है। इसमें पसहर चांवल सहित छह किस्म की भाजियों का उपयोग प्रमुख है। जिसमें चरोटा भाजी, कुम्हड़ा भाजी, चेंच भाजी, मुनगा भाजी, लाल भाजी, चौलाई भाजी शामिल है। इसके अलावा काशी के फूल, महुुआ के फूल व पत्ते, धान की लाई सहित भैंस के दूध और दही आदि भी कमरछठ के पूजन में इस्तेमाल की जाती है। आज भिलाई-दुर्ग सहित भिलाई-3, चरोदा, कुम्हारी जामुल आदि के बाजारों में पूजन सामग्री के अनेक अस्थायी पसरे लगे हुए थे। जहां लोगों ने खरीददारी की। कमरछठ में सार्वजनिक रुप से सगरी (छोटा सा तालाब) बनाकर महिलाएं सामूहिक रूप से शिव पार्वती की पूजा करती है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते हालात बिल्कुल विपरीत है। इस स्थिति में सगरी बनाकर सामूहिक पूजन होने पर फिलहाल संदेह बना हुआ है।

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शौर्यपथ