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आदर्श देश बनें हम

  • rounak group

मेलबॉक्स / शौर्यपथ / अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी...’ कवि मैथिलीशरण गुप्त की ये पंक्तियां नारी जीवन की दयनीय अवस्था को सटीक बयां करती हैं। हमारे देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। विडंबना है कि यहां देवियों की पूजा की जाती है, पर महिलाओं को आमतौर पर खिलौना समझ लिया जाता है। देश की लचर न्याय-व्यवस्था इसके लिए जिम्मेदार है। महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले भली-भांति जानते हैं कि कानून उन्हें कठोर दंड नहीं दे सकता। फिर, हमारा समाज अब भी इतना पुरुष प्रधान तो है ही कि आजादी के इतने वर्षों के बाद भी महिलाओं को सारे अधिकार देने से बचता है। हालांकि, सरकारें अपनी तरफ से लगातार प्रयास करती रही हैं, लेकिन अब भी संकीर्ण सोच में बदलाव लाने की कई कोशिशें करनी होंगी। यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो इसमें कोई दोराय नहीं कि हम महिलाओं के लिए एक आदर्श देश बना सकते हैं।
राजेंद्र प्रसाद, रांची, झारखंड

स्वतंत्रता दिवस का जश्न
आज देश आजादी का महान पर्व मना रहा है। देश को स्वतंत्र हुए 73 वर्ष हो गए। इन वर्षों में हमने काफी कुछ हासिल किया है। वर्ष 1947 से 2020 तक की यात्रा पर गौर करें, तो यही लगता है कि फर्श से अर्श तक का सफर हमने तय किया है। एक वक्त यहां खाने के भी लाले थे, मगर अब हम इतना अनाज उगा लेते हैं कि जरूरतमंद देशों को भी भेजते हैं। नई-नई तकनीक और प्रौद्योगिकी को भी हमने खूब अपनाया है। कहा तो यह भी जाता है कि भारतीय प्रतिभा के बूते ही अमेरिका का सिलिकॉन वैली आकार ले सका। फिर भी, काफी कुछ किया जाना अभी शेष है। गरीबी उन्मूलन की दिशा में लगातार काम करने के बाद बावजूद हमें अब तक इसमें बहुत सफलता नहीं मिली है। इसी तरह, पठन-पाठन का माहौल भी बेहतर बनाना एक बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी खर्च भी बढ़ाने होंगे। अगर ये सब हम कर सके, तो निश्चय ही आने वाले वर्ष भारत के हैं।
समिधा, महरौली, नई दिल्ली

संकल्प लें आज
स्वतंत्रता दिवस भारतीयों के लिए हर्षोल्लास का दिन है, लेकिन कोरोना-काल ने इस दिन मनने वाले विभिन्न कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया है, जिससे जश्न मानो फीका पड़ गया है। आजादी की सुखद अनुभूति जिस तरह आज से सात दशक पहले लोग किया करते थे, आज भी वैसा ही करते हैं। हालांकि, आजाद होने के बाद लोगों ने सोचा था कि अपना मुल्क होगा, तो बेहतर शासन प्रणाली कायम होगी। मगर दुर्भाग्य से लोकतंत्र की सभी खूबियों को हम अपना नहीं सके हैं। राजनेताओं-नौकरशाहों के गठजोड़ से आम जन कितने संतुष्ट हैं, यह आसानी से समझा जा सकता है। सरकार ने बेशक कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन जब तक भ्रष्टाचार का खात्मा नहीं होगा, तब तक आजादी का वास्तविक एहसास मुश्किल है।
मिथिलेश कुमार, भागलपुर

हर नागरिक प्रहरी
आज क्यों देशभक्ति दो राष्ट्रीय पर्वों में सिमटकर रह गई है? 15 अगस्त और 26 जनवरी के अलावा पूरे साल शायद ही कोई इसकी बात करता है। सवाल यह है कि हम हर समय देशभक्त जैसा आचरण क्यों नहीं करते, ताकि रामराज्य कायम हो? आज आजादी के लिए नहीं, बल्कि देश के भीतर जड़ें जमा रहे आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमें लड़ना है। मुखौटा पहने अपनों से टकराना है। यह लड़ाई पहले से कहीं ज्यादा गंभीर और बड़ी है, क्योंकि इसमें कौन अपना है और कौन पराया, यह समझना मुश्किल है। इसलिए आज हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए कि वह प्रहरी बनकर भ्रष्टाचारियों, अपराधियों और आतंकवादियों से लडे़।
शिवांगी खत्री, माछरा, मेरठ

 

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शौर्यपथ