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विवादों में फेसबुक

  • rounak group

सम्पादकीय / शौर्यपथ / सोशल मीडिया के जिस मंच को दुनिया भर में अभिव्यक्ति की आजादी का सबसे बड़ा अलंबरदार माना जाता रहा है, उस ‘फेसबुक’ पर इन दिनों जैसी तोहमतें लग रही हैं, वे यकीनन स्वतंत्र अभिव्यक्ति के पैरोकारों को निराश करने वाली हैं। लेकिन उतनी ही चिंताजनक बात यह भी है कि इस कंपनी की एक वरिष्ठ अधिकारी को धमकाने की कोशिश की गई है। फेसबुक की क्षेत्रीय पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास ने दिल्ली पुलिस में इस बाबत शिकायत दर्ज कराई है। विडंबना देखिए, जिस नफरती प्रवृत्ति के खिलाफ कथित नरमी बरतने के आरोपों पर फेसबुक को सफाई देनी पड़ रही है, उसकी अधिकारी अब दूसरी तरफ के असहिष्णु लोगों के निशाने पर हैं। दरअसल, पिछले दिनों एक बड़े अमेरिकी अखबार ने खबर छापी थी कि फेसबुक कंपनी भारत में पक्षपाती भूमिका अपना रही है और सत्ताधारी नेताओं की घोर सांप्रदायिक टिप्पणियों को भी प्रतिबंधित नहीं कर रही। जाहिर है, विपक्ष को एक मौका हाथ लग गया है और वह इसे यूं ही नहीं छोड़ना चाहता।
‘हेट स्पीच’ और नुकसानदेह सामग्रियों के खिलाफ फेसबुक में बाकायदा एक बड़ा विभाग है और उसका काम ही है ऐसी सामग्रियों की निगरानी करना और उन्हें प्रकाशित-प्रसारित होने से रोकना, जो न सिर्फ नस्लीय घृणा, सांप्रदायिक विद्वेष को बढ़ावा देने वाली हों, बल्कि जो मानव स्वास्थ्य को किसी भी रूप में नुकसान पहुंचाने वाली हों। मौजूदा कोरोना काल में हमने देखा और महसूस भी किया कि इसके इलाज के तरह-तरह के टोटकों और फर्जी तजवीजों के खिलाफ फेसबुक ने तत्परता से कदम उठाया। इसमें कोई दोराय नहीं कि यह बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि दुनिया भर में हर सेकंड छह नए यूजर इस माध्यम से जुड़ रहे हैं और रोजाना लाखों तस्वीरें व टिप्पणियां इस पर पोस्ट की जा रही हैं। ऐसे में, इस माध्यम की बुनियादी खूबी की रक्षा करते हुए इसके दुरुपयोग को रोकना एक बहुत बड़ी चुनौती है। कंपनी ने प्रकारांतर से स्वीकार भी किया है कि उसे अभी इस दिशा में काम करने की जरूरत है।
लेकिन फेसबुक एक कारोबारी कंपनी है और व्यावसायिक हित-अहित से संचालित उसकी नीतियां तभी तक मान्य हैं, जब तक उसकी पहुंच वाले देशों के आंतरिक मामलों में वे कोई बाधा नहीं खड़ी करतीं। भारत में जो ताजा विवाद खड़ा हुआ है, वह राजनीतिक पक्षधरता से जुड़ा है, इसीलिए इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि, फेसबुक ने अपनी सफाई पेश की है कि उसकी नीतियां तटस्थता पर आधारित हैं और वे किसी देश की किसी पार्टी से प्रभावित नहीं हैं। लेकिन दुर्योग से कई अन्य देशों में ऐसे ही आरोप उस पर पहले भी लग चुके हैं। तुर्की में तो इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए सांसद बाकायदा एक कानूनी मसौदा तैयार कर रहे हैं। हमारे यहां फेसबुक यूजर्स की संख्या 34 करोड़ से भी अधिक है। इतने बड़े बाजार को कंपनी नजरअंदाज नहीं कर सकती, क्योंकि किसी भी कंपनी की तरक्की में साख का बड़ा योगदान होता है। बहरहाल, हमें यह तो देखना ही पडे़गा कि कोर्ई भी बाहरी तत्व हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को किसी रूप में प्रभावित न करने पाए। अपनी सुरक्षा के मद्देनजर हमने चीन के दर्जनों एप को अभी हाल में ही प्रतिबंधित किया है, तो फेसबुक और ट्विटर जैसे जन-प्रभावशाली माध्यमों पर भी हमें हर पल नजर रखनी होगी।

 

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शौर्यपथ