नवागढ / शौर्यपथ / हनुमान त्रिवेणी कथाहनुमंत जीवन पर आधारित हनुमान त्रिवेणी कथा के अंतिम दिन पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में हनुमान चालीसा को उतारना चाहिए। चालीसा में जय जय जय हनुमान गोसाई, कृपा करो गुरुदेव की नाई चौपाई को उन्होंने सबसे शक्तिशाली चौपाई बताया.
पंडित जी ने कहा कि हनुमान नाम नहीं विशेषण है. हनुमान जी का असली नाम बजरंगी है .बजरंगी का अर्थ उन्होंने लोहे के शरीर वाला बताया. जो अपने मान का हनन कर दें, वह हनुमान हैं . हनुमान भक्तों को कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए.
हनुमान चालीसा के प्रारंभ में तुलसीदास जी ने दोहा " श्री गुरु चरण सरोज रज..." से किया है,अर्थात श्री गुरु के चरणों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ रखने की बात उन्होने कही है. हनुमान चालीसा के पहले चौपाई में आए शब्द " कपीस " का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा, कपीस का अर्थ होता है " राजा " .वानरों के राजा तो सुग्रीव हैं, पर तुलसीदास जी ने हनुमान जी को कपीस शब्द से इसलिए संबोधित किया है, क्योंकि हनुमान जी सभी के दिलों में राज करते है. पंडित जी ने कहा कि हनुमान जी सदा सुसज्जित रहते हैं ,भक्तों को भी चाहिए कि वह अगर मंदिर जाए, तो साफ वस्त्रों से सुसज्जित होकर ही जाएं. उन्होंने कहा कि हनुमान जी केवल एक ही बात से घबराते हैं और वह अपनी प्रशंसा.
हैसियत से बढकर बच्चों को पढाए
आज के समय को ध्यान में रखकर पंडित जी ने एक महत्वपूर्ण बात कही. उन्होंने कहा की हैसियत से बढ़कर कुछ भी नहीं करना चाहिए, पर जहां पर बच्चों को पढ़ाने की बात आए, तो बच्चों को हैसियत से बढ़कर पढ़ाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा, कि पढ़ाने के साथ ही बच्चों को संस्कार भी दें, क्योंकि संस्कार विद्यालय से नहीं माता-पिता से ही मिल सकता है.