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आखिर क्यों भगवान गणेश को कहते हैं एकदंत? इस वजह से पड़ा ये नाम

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   आस्था /शौर्यपथ /गणेश भगवान हिंदू धर्म में प्रथम पूज्यनीय देव हैं। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा शुरू करने से पहले इनकी पूजा करने का विधान है। बुधवार का दिन यानी आज का दिन भगवान गणेश की पूजा करने के लिए शास्त्रों में सबसे उत्तम बताया गया है। भगवान गणेश के वैसे तो कई सारे नाम हैं, लेकिन उनमें से एक नाम उनका एकदंत भी है।भगवान गणेश का एक दांत टूट जाने के कारण उन्हें इस नाम से संबोधित किया जाने लगा। आखिर उनका नाम एकदंत कैसे पड़ा इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। लेकिन उनमे से एक सबसे लोकप्रिय पौराणिक कथा आज हम आपको बता रहे हैं।
परशुराम जी और भगवान गणेश के बीच हुआ युद्ध
     भगवान गणेश का एक दांत टूटा हुआ है, इसलिए उन्हें एकदंत कहा जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार इसके पीछे परशुराम जी और भगवान गणेश का युद्ध है। एक समय की बात है जब भगवान शिव से मिलने के लिए परशुराम जी पहुंचे। तब उन्होनें भगवान गणेश को द्वार पर बाहर खड़ा देख कहा कि, मुझे भगवान शिव से मिलना है मुझे अंदर जाने दें। गणेश जी ने परशुराम को अंदर नहीं जाने दिया। इस पर परशुराम जी को क्रोध आ गया और उन्होनें गणेश जी से कहा की अगर मुझे अंदर नहीं जानें दिया तो मुझसे आपको युद्ध करना पड़ेगा। यदि में जीता तो आपको मुझे भगवान शिव से मिलने के लिए अंदर जाने देना होगा। भगवान गणेश ने युद्ध की चुनौती स्वीकार की। दोनों के बीच बड़ा भीषण युद्ध चला। युद्ध के दौरान परशुरान जी ने अपने फरसे से भगवान गणेश पर वार किया और परशुराम जी के फरसे से उनका एक दांत टूट कर वहीं गिर गया। एक टांट टूट कर गिर जाने के कारण भगवान गणेश एकदंत कहलाय।
गणेश जी को प्रसन्न करने का उपाय
शास्त्रों के अनुसार बुधवार के दिन यानी आज भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में चल रही सभी परेशानियां मिट जाती हैं। आज के दिन भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने से उनकी कृपा मिलती है। भगवान गणेश को आज के दिन मोदक भी चढ़ाया जाता है। विघ्नहर्ता भगवान गणेश के आशीर्वाद से जीवन में अपार सफलता मिलती है। इसलिए आज के दिन उनकी पूजा करने के बाद आरती जरूर करें। आज के दिन आप चाहें तो उनके मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। मंत्र इस प्रकार से - वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

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शौर्यपथ