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बच्चे को दो घंटे से ज्यादा न करने दें स्क्रीन का इस्तेमाल, आंखों पर ही नहीं दिमाग पर भी पड़ता है बुरा असर

  • rounak group

 शौर्यपथ / क्या आपका लाडला दिनभर टीवी या मोबाइल की स्क्रीन से चिपका रहता है? अगर हां तो संभल जाइए। एक अमेरिकी अध्ययन में स्क्रीन के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को न सिर्फ बच्चों की आंखों और मानसिक स्वास्थ्य, बल्कि सीखने-समझने, चीजें याद रखने व रिश्ते निभाने की क्षमता के लिहाज से भी घातक करार दिया गया है। अभिभावकों से कहा गया है कि वे बच्चों को दिनभर में दो घंटे से ज्यादा स्क्रीन के प्रयोग की छूट न दें।
कैलिफोर्निया स्थित मेमोरियल केयर ऑरेंज कोस्ट मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं की मानें तो दिनभर में तीन घंटे से अधिक समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने वाले बच्चे देरी से बोलना सीखते हैं। उन्हें पढ़ने-लिखने और भाषा समझने में भी दिक्कत पेश आती है। वहीं, जो किशोर रोज पांच से सात घंटे स्क्रीन के सामने डटे रहते हैं, उनमें उदासी, बेचैनी, जीवन से नाउम्मीदी और आक्रामकता की शिकायत पनपने का खतरा दोगुना होता है।
मोटापे का खतरा
मुख्य शोधकर्ता डॉ. जीना पोजनर ने स्क्रीन की लत को बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने मेयो क्लीनिक के उस अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें स्क्रीन का इस्तेमाल हर दो घंटे बढ़ने पर मोटापे की आशंका में 23 फीसदी इजाफा होने की बात सामने आई थी। यह भी पाया गया था कि स्क्रीन के इस्तेमाल में 50 फीसदी कटौती करने वाले बच्चे 25 प्रतिशत कम कैलोरी खाते हैं।
अनिद्रा की शिकायत
पोजनर ने बताया कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन बाधित करती है। इससे बच्चों को नींद के आगोश में समाने में तो दिक्कत पेश आती ही है, साथ ही सुबह उठने पर वे तरोताजा भी महसूस नहीं करते। अधूरी नींद का उनकी याददाश्त और तार्किक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। पोजनर ने सोने से दो घंटे पहले ही बच्चों के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल प्रतिबंधित करने की सलाह दी।
सिर से लेकर कमर तक में दर्द
2018 में प्रकाशित एक ब्रिटिश अध्ययन का जिक्र करते हुए पोजनर ने कहा कि घंटों स्क्रीन के सामने डटे रहने वाले बच्चों में सिर, पीठ, कमर और कंधे में दर्द की समस्या भी ज्यादा सामने आती है। इसकी वजह सिर झुकाने से उसका भार बढ़ना और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ना है।
चिंताजनक
-आठ से 12 साल तक के बच्चे रोजाना 04 से छह घंटे औसतन स्क्रीन से चिपके रहते हैं
-09 घंटे औसतन किशोर उम्र के लोग मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर की स्क्रीन पर गुजारते हैं
किसके लिए कितना इस्तेमाल सही
डेढ़ साल तक के बच्चे
-परिजनों से दो से पांच मिनट की वीडियो कॉल तक ही सीमित होना चाहिए स्क्रीन का इस्तेमाल। मां-बाप को खेलने-कूदने और पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
18 से 24 महीने
-माता-पिता की देखरेख में दिनभर में एक से डेढ़ घंटे ही स्क्रीन के प्रयोग की इजाजत होनी चाहिए। बच्चों को सिर्फ शिक्षण सामग्री तक पहुंच सुनिश्चित करना अनिवार्य।
दो से पांच साल
-नाच-गाने से जुड़े वीडियो और गेम खेलने की अनुमति दी जा सकती है। पर हफ्ते के शुरुआती पांच दिन अधिकतम एक घंटे और सप्ताहांत तीन घंटे से ज्यादा स्क्रीन न थमाएं।
पांच साल से ऊपर
-बड़े बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम निर्धारित करना मुश्किल। पर टीवी-मोबाइल-कंप्यूटर के इस्तेमाल से शारीरिक सक्रियता और सीखने-समझने, रिश्ते निभाने की कला प्रभावित होने लगे तो यह घातक है।

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