Print this page

हम सबों ने दीपावली मना ली अब दीपावली की कीमत भी जानें ...

  • doing of business

धर्म संसार / शौर्यपथ / भाई मनी सिंह ... गुरु गोविंद सिंह के बाल-सखा और श्री दरबार साहिब जी के ग्रंथी थे
उन्होंने शहर के प्रमुख सिक्खों से सलाह लेकर श्रीदरबार साहिब का प्रबंध काफी सुधारा था
यह उस समय की बात है जब श्री अमृतसर साहिब में दीपावली का मेला मुगल सरकार ने काफी सालों से बंद करवा रखा था
भाई साहिब ने सूबा लाहौर से दीपावली मेला लगाने की इजाजत मांगी, सूबेदार ने आज्ञा इस शर्त पर दी गई कि मेले के बाद भाई मनी सिंह पांच हजार स्वर्णमुद्राएँ सरकार को देंगे
यह रकम काफी अधिक थी पर भाई मनी सिंह को विश्वास था कि वह श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में आने से जुटा ली जाएगी
मेला दस दिन लगना था, इसके लिए भाई साहिब जी ने खालसा को संदेश भेजे, पर मुगलों ने कुछ और ही सोच रखा था
जकारिया खान के नेतृत्व में बहुत भारी फौज भेज दी गई
मुगल सैनिक श्रद्धालुओं का कत्ले आम करने के लिए हरमंदिर साहेब के आस-पास छुपे हुए थे
भाई मनी सिंह जी को भी इस योजना का पता लग गया, उन्होंने संदेश भेजे की श्रद्धालु यहां न एकत्र हो और न आएं, तब तक वहाँ पर एकत्र हो चुके श्रद्धालुओं को भी किसी तरह बाहर निकाल कर रवाना कर दिया गया
दीपावली के बाद जब मुगलों ने पैसे मांगे तो भाई मनी सिंह ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि खालसा आपकी चालों में नहीं आएगा, एक तरफ आपके फौजी दस्ते श्रद्धालुओं पर घात लगाकर खत्म करने के लिए तैयारी करें और दूसरी तरफ हम आपको पैसे दें
यह सम्भव नहीं है
भाई मनी सिंह को गिरफ्तार कर दरबार ले जाया गया
मौलवियों से भाई मनी सिंह की सजा तय करने को कहा गया, उन्होंने इस्लाम के हिसाब से काफिर मनी सिंह की बोटी बोटी काटना उचित बताया
वहां उनसे कहा गया कि मुसलमान हो जाओ, नहीं तो आपको बंद-बंद (हड्डी के प्रत्येक जोड़ से) काट दिया जाएगा,
मगर भाई साहिब ने मुसलमान बनने से साफ इंकार कर दिया
जल्लाद ने भाई साहिब से पूछा आँखों पर पट्टी बांधना चाहते हो ?
भाई मनी सिंह ने कहा, इसकी आवश्यकता नहीं है तुम अपना काम करो
भाई मनी सिंह का पोर पोर उंगलियों से शुरू कर काटा गया फिर उनके बच्चों का भी कत्ल कर लाहौर की बादशाही मस्जिद के आगे टाँग दिया गया ...
भाई मनी सिंह के कहे अंतिम शब्द थे "यह यज्ञ व्यर्थ नहीं जाएगा, इस मुग़ल सेनाध्यक्ष के बाद हो सकता है और क्रूर सेनाध्यक्ष आए लेकिन इस धरती पर निस्संदेह ऐसी सुबह होगी जब हम अपने त्यौहार बिना डर के पूरे गौरव से मनाएँगे ”
आज हम दीपावली मनाते है तो एक बार उन शहीदों को भी नमन करें जिन्होंने दीपावली की कीमत अपनी और परिवार की बलि देकर चुकाई है

Rate this item
(0 votes)
शौर्यपथ