नई दिल्ली:
इतिहास की घड़ी में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं, जो सिर्फ दिन बदलने के लिए नहीं, बल्कि नए युग की शुरुआत के लिए जानी जाती हैं। 2 जून भी भारतीय इतिहास का एक ऐसा ही ऐतिहासिक पड़ाव है। आज ही के दिन देश के नक्शे में दो बड़े बदलावों की नींव रखी गई थी—एक जिसने देश को विभाजन का दर्द दिया, और दूसरा जिसने एक नए राज्य के उदय की खुशी दी।
आइए नज़र डालते हैं 2 जून की उन दो सबसे प्रमुख राजनीतिक घटनाओं पर, जिन्होंने भारत के मानचित्र और राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया:
1. माउंटबेटन योजना (1947): जब तय हुआ अखंड भारत के विभाजन का खाका
"2 जून 1947 को ब्रिटिश हुकूमत ने भारत के विभाजन की उस ऐतिहासिक योजना को सामने रखा, जिसने देश की तकदीर और भूगोल दोनों को बांट दिया।"
साल 1947 में आज ही के दिन भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने देश के विभाजन की आधिकारिक योजना प्रस्तुत की थी, जिसे इतिहास में 'माउंटबेटन योजना' (या 3 जून प्लान की पूर्व संध्या) के नाम से जाना जाता है। इस घोषणा ने यह साफ कर दिया था कि सदियों पुराना अखंड भारत अब दो स्वायत्त देशों—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित होने जा रहा है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने न केवल सत्ता के हस्तांतरण का रास्ता साफ किया, बल्कि आधुनिक भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक विस्थापन की कहानी भी लिखी।
2. तेलंगाना का उदय (2014): भारत के मानचित्र पर चमका 29वां राज्य
"लंबे संघर्ष और आंदोलन के बाद, 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश का पुनर्गठन हुआ और तेलंगाना आधिकारिक तौर पर भारत का नया राज्य बना।"
ठीक 12 साल पहले, 2 जून 2014 को भारतीय लोकतंत्र ने एक नया इतिहास रचा। संसद द्वारा 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक' पारित होने के बाद, इस दिन तेलंगाना विधिवत रूप से भारत के 29वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
एक नए युग की शुरुआत: राज्य के गठन के साथ ही, आंदोलन के मुख्य सूत्रधार के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने नए राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और हैदराबाद को अगले 10 वर्षों के लिए दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी घोषित किया गया।
सांस्कृतिक अस्मिता की जीत: तेलंगाना का गठन केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं था, बल्कि यह दशकों पुराने जन-आंदोलन और क्षेत्रीय अस्मिता की एक बड़ी जीत थी।
निष्कर्ष: बदलाव का साक्षी है यह दिन
2 जून की तारीख भारतीय इतिहास में दो विपरीत छोरों को जोड़ती है। जहाँ 1947 का 2 जून विभाजन की त्रासदी का संकेत था, वहीं 2014 का 2 जून लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने और नए राज्य के निर्माण का उत्सव था। भारत की राजनीतिक यात्रा को समझने के लिए यह दिन हमेशा बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।