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नरक चतुर्दशी पर आस्था का महाकुंभ: हनुमान जन्मोत्सव पर गूंजेगा जय श्रीराम, निशिता काल की महापूजा से संकटमोचन की आराधना का विशेष संयोग

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मंदिरों में उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब, सिंदूर-चमेली के तेल से होगा बजरंगबली का अभिषेक; मासिक शिवरात्रि और नरक चतुर्दशी के संयोग में विशेष पूजा-अर्चना का महत्व**

अयोध्या/नई दिल्ली।** सनातन धर्म में कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस बार 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी के पावन अवसर पर हनुमान जन्मोत्सव भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या सहित देशभर के हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां की गई हैं। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने और जय श्रीराम तथा जय बजरंगबली के जयघोष से वातावरण भक्तिमय होने की उम्मीद है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जन्मोत्सव मुख्य रूप से चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है, जबकि कुछ परंपराओं में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी हनुमान जी के प्राकट्य दिवस के रूप में विशेष महत्व दिया गया है। यही वजह है कि इस दिन बजरंगबली की आराधना, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और विशेष मंत्रों के जाप को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस बार नरक चतुर्दशी, मासिक शिवरात्रि और हनुमान उपासना का विशेष धार्मिक संयोग होने से श्रद्धालुओं में उत्साह है।

 सुबह 10:47 बजे से चतुर्दशी तिथि, आधी रात में विशेष पूजा का मुहूर्त

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से प्रारंभ होकर 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। दिनभर हनुमान जी की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे। वहीं, विशेष साधना और निशिता काल में पूजा के लिए रात 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक का समय महत्वपूर्ण बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में श्रद्धापूर्वक आराधना करने से साधकों को विशेष आध्यात्मिक फल की प्राप्ति होती है।

 सिंदूर का चोला, चमेली का तेल और लड्डुओं का भोग

हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली के मंदिरों में विशेष सजावट, पूजा और अभिषेक की परंपरा निभाई जाती है। भक्त अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए सिंदूर और चमेली के तेल से चोला चढ़ाते हैं। बूंदी, बेसन के लड्डू और अन्य प्रिय प्रसाद का भोग लगाया जाता है। मंदिरों में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड के सामूहिक पाठ के साथ भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं। मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना से भय, संकट और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है तथा भक्तों को साहस, शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।

संकटों से मुक्ति के लिए इन मंत्रों का जाप 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष अवसर पर हनुमान जी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करना कल्याणकारी माना जाता है। इनमें प्रमुख मंत्र हैं—

सर्वकष्ट निवारण मंत्र:** 'ॐ हं हनुमते नमः।'

संकट और भय से मुक्ति का मंत्र:** 'ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।'

मान्यता है कि इन मंत्रों के जाप से मन में सकारात्मकता, साहस और आत्मबल का संचार होता है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी विशेष फलदायी माना गया है।

यमदीपदान और हनुमान आराधना का विशेष महत्व

नरक चतुर्दशी पर यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दीपदान करने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं, संकटमोचन हनुमान की पूजा को जीवन की बाधाओं, भय और विपत्तियों से रक्षा का माध्यम माना गया है।

कुल मिलाकर, कार्तिक चतुर्दशी का यह अवसर धार्मिक आस्था, दीपदान और बजरंगबली की भक्ति का विशेष पर्व बन रहा है। श्रद्धालु जहां नरक चतुर्दशी पर दीपदान कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे, वहीं हनुमान जी की आराधना कर परिवार की खुशहाली, आरोग्यता और जीवन में शक्ति एवं साहस का आशीर्वाद मांगेंगे।

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