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संकट चतुर्थी के दिन बनाएं सप्तधान का लड्डू, आज तिल दान के मिलेंगे शुभ फल

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धर्म संसार /शौर्यपथ / 31 जनवरी और 1 फरवरी को संकट चौथ का शुभ व्रत है। इस दिन विशेष रूप से 7 धान को तिल के साथ मिलाकर सवा किलो का लड्डू बनाया जाता है और उसे बलि की तरह काटा जाता है...कुछ जगहों पर थाली में तिल और गुड का कोई पशु बनाकर काटा जाता है...
इसके पीछे मान्यता है कि संकट चतुर्थी की कथा में जिस प्रकार ब्राहमणी का बालक बलि देने के बाद भी श्री गणेश जीकी अनुकम्पा से सुरक्षित बचा रहा वैसे ही हमारी संतान भी हर तरह के संकट से बची रहे...और उस कथा की स्मृति में बलि की परम्परा भी बनी रहे...
इसदिन तिल के दान से 7 शुभ फल मिलते हैं...
मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
धन का आगमन होता है।
विकट समस्याओं का समाधान प्राप्त होता है।
सुख शांति का वातावरण होता है।
यश एवं बल की शक्ति प्राप्त होती है।
संकट में रक्षा होती है।
प्रगति के अवसर मिलते हैं।
संकष्टी चतुर्थी के दिन कैसे करें पूजन, पढ़ें आसान विधि एवं मुहूर्त
संकष्टी चतुर्थी, सकट चौथ, संकट चौथ, वक्रतुंडी चतुर्थी, माही और तिलकुटा चौथ के नाम से जाने जाने वाली इस चतुर्थी पर श्री गणेश का पूजन किया जाता है। आइए पढ़ें पूजन विधि-
गणेश चतुर्थी की पूजन विधि :-
* श्री चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर प्रतिदिन के कर्मों से निवृ होकर स्नान करें।
* फिर एक पटिए पर लाल कपड़ा बिछाकर गणपति की स्‍थापना के बाद इस तरह पूजन करें-
* सबसे पहले घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा का संकल्‍प लें।

* फिर गणेश जी का ध्‍यान करने के बाद उनका आह्वान करें।

* इसके बाद गणेश को स्‍नान कराएं। सबसे पहले जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) और पुन: शुद्ध जल से स्‍नान कराएं।
* गणेश के मंत्र व चालीसा और स्तोत्र आदि का वाचन करें।
* अब गणेश जी को वस्‍त्र चढ़ाएं। अगर वस्‍त्र नहीं हैं तो आप उन्‍हें एक नाड़ा भी अर्पित कर सकते हैं।
* इसके बाद गणपति की प्रतिमा पर सिंदूर, चंदन, फूल और फूलों की माला अर्पित करें।
* अब बप्‍पा को मनमोहक सुगंध वाली धूप दिखाएं।
* अब एक दूसरा दीपक जलाकर गणपति की प्रतिमा को दिखाकर हाथ धो लें।
* हाथ पोंछने के लिए नए कपड़े का इस्‍तेमाल करें।
* अब नैवेद्य चढ़ाएं। नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़ और फल शामिल करें।
* इसके बाद गणपति को नारियल और दक्षिण प्रदान करें।
* सकंष्टी/ सकट चतुर्थी की कथा श्रवण करें अथवा पढ़ें।
* अब अपने परिवार के साथ गणपति की आरती करें। गणेश जी की आरती कपूर के साथ घी में डूबी हुई एक या तीन या इससे अधिक बत्तियां बनाकर की जाती है।
* इसके बाद हाथों में फूल लेकर गणपति के चरणों में पुष्‍पांजलि अर्पित करें।
* अब गणपति की परिक्रमा करें। ध्‍यान रहे कि गणपति की परिक्रमा एक बार ही की जाती है।
* इसके बाद गणपति से किसी भी तरह की भूल-चूक के लिए माफी मांगें।
* पूजा के अंत में साष्टांग प्रणाम करें।
* रात को चंद्रमा की पूजा और दर्शन करने के बाद व्रत खोलना चाहिए। {इस चतुर्थी पर चंद्रोदय रात्रि 08 बजकर 27 मिनट पर होगा।}
भविष्य पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी की पूजा और व्रत करने से हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। गणेश पुराण के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से सौभाग्य, समृद्धि और संतान सुख मिलता है। शाम को चंद्रमा निकलने से पहले गणपति जी की एक बार और पूजा करें और संकष्टी व्रत कथा का फिर से पाठ करें। अब व्रत का पारण करें।
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय और पूजन का मुहूर्त :-
चतुर्थी तिथि 31 जनवरी 2021 को रात्रि 08.24 मिनट से आरंभ होगी और इस तिथि का समापन 1 फरवरी 2021 को शाम 06.24 मिनट पर होगा।
इस दिन चंद्रोदय का समय रात्रि 08.27 मिनट है।
आज इस मंत्र के जाप से प्रसन्न होंगे श्री गणेश, चढ़ाएं यह प्रसाद
प्रतिमाह कृष्ण पक्ष में श्री गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश को अपनी राशिनुसार प्रसाद चढ़ाने से समस्त कष्ट दूर होकर जीवन अपार खुशियों से भर जाता है। आइए जानें संकष्‍टी चतुर्थी के दिन कौन-सा मंत्र जपें और क्या चढ़ाएं प्रसाद...
मेष : ॐ वक्रतुण्डाय हुं।
प्रसाद : छुआरा और गु़ड़ के लड्डू।
वृष- ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं।
प्रसाद : मिश्री, शक्कर, नारियल से बने लड्डू।
मिथुन-ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतेय वर वरद् सर्वजनं मे वशमानाय स्वाहा।
प्रसाद : मूंग के लड्डू, हरे फल।
कर्क- ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥
प्रसाद : मोदक के लड्डू, मक्खन, खीर।
सिंह-ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतेय वरवरदं सर्वजनं में वशमानयं स्वाहा।
प्रसाद : गुड़ से बने मोदक के लड्डू व लाल फल।
कन्या- ॐ गं गणपतयै नमः या ॐ श्रीं श्रियैः नमः॥
प्रसाद : हरे फल, मूंग की दाल के लड्डू व किशमिश।
तुला- ॐ ह्रीं, ग्रीं, ह्रीं गजाननाय नम:।
प्रसाद : मिश्री, लड्डू और केला।
वृश्चिक- ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥
प्रसाद : छुआरा और गु़ड़ के लड्डू।
धनु- हुं गं ग्लौं हरिद्रागणपतयै वरवरद दुष्ट जनहृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा॥
प्रसाद : मोदक व केला।
मकर- ॐ लंबोदराय नमः
प्रसाद : मोदक के लड्डू, किशमिश, लड्डू।
कुंभ- ॐ सर्वेश्वराय नमः
प्रसाद : गुड़ लड्डू व मौसमी फल।
मीन- ॐ सिद्धि विनायकाय नमः
प्रसाद : बेसन के लड्डू, केला, बादाम।
उपरोक्त मंत्र जाप के द्वारा और श्री गणेश को अपनी राशिनुसार भोग लगाने से आप जीवन में संपन्नता पा सकते हैं।

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