लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / एक आम कहावत है कि प्यार के मामले में समझदार लोग भी कभी-कभी मूर्ख बन जाते हैं। यानी प्यार में आप दिमाग से ज्यादा दिल से फैसले लेते हैं लेकिन यह फैसले आपके दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करते हैं। कई लोगों के जीवन में एक ऐसा फेज आता है, जब उन्हें अपने पार्टनर से धोखा मिलता है। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आता कि पार्टनर को दूसरा मौका देना चाहिए या नहीं। मनोचिकित्सकों के अनुसार प्यार को हल्के में न लें क्योंकि यह न सिर्फ इमोशनल हेल्थ बल्कि फिजिकल हेल्थ पर भी असर डालता है। ऐसे में जब आप सेकंड चांस देने के बारे में सोचें, तो खुद से यह भी सवाल करें कि क्या ऐसा करना आपकी इमोशनल और फिजिकल हेल्थ के लिए अच्छा होगा?
खुद से सवाल करें कि क्यों देना चाहिए सेकंड चांस
चाहे गर्लफ्रेंड हो या फिर बॉयफ्रेंड, सेकंड चांस देने की बात आए, तो सबसे पहले खुद से यह सवाल करें कि आप उन्हें यह मौका क्यों देना चाहते हैं। अगर यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि आप उनके बिना अकेलापन महसूस करते हैं या फिर उनके बारे में सोचते ही आप इमोशनल हो जाते हैं, तो शायद आपको खुद को रोकना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि सिर्फ अकेलापन दूर करने के लिए किसी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लेना हमेशा ही बड़ी गलती होती है।
खुद को टाइम दें और दिमाग में थोड़ा सा रीवाइन्ड प्ले करें। उन सभी मुद्दों के बारे में सोचें जिसके कारण ब्रेकअप की नौबत आई। हर पॉइंट को दोनों पक्षों की ओर से कंसीडर करें और यह तय करें कि क्या आपने पहली बार ब्रेकअप कर ओवररिऐक्ट किया या फिर सच में यह आपकी पीसफुल लाइफ के लिए जरूरी हो गया था। इसे लेकर जल्दबाजी न करें और पर्याप्त टाइम लें क्योंकि सेकंड चांस का मीनिंग है आप फिर से दूसरे व्यक्ति को अपनी लाइफ में एंट्री देते हुए अपने इमोशन्स सौंप रहे हैं।