दुर्ग । शौर्यपथ । दुर्ग कांग्रेस में इन दिनों चर्चा का विषय है कि क्या दुर्ग शहर में ऐसा कोई भी कांग्रेसी नहीं है जो इतना काबिल हो कि विधायक प्रत्याशी के चुनाव का संचालन की भूमिका बखूबी निभा सके और जो पूरे शहर के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को एकजुट कर सके । इन दिनों इस तरह की चर्चा का महत्वपूर्ण कारण यह है कि पिछले कुछ दिनों से एक बार फिर पिछले दो-तीन चुनाव की तरह रायपुर से वोरा परिवार के करीबी दुर्ग कर दुर्गा कांग्रेसियों की मीटिंग ले रहे हैं और चुनावी रणनीति समझा रहे हैं यह भी सुनने को मिल रहा है कि दुर्ग जिला अध्यक्ष वोरा परिवार के करीबी जो रायपुर से आकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दे रहे हैं उसे पर मौन रहकर उनके लिए फैसलो पर मुहर लगा रहे हैं । महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे रहे हैं स्थिति तो यहां तक आ गई कि जो शख्स दुर्ग कांग्रेस का सदस्य भी नहीं है वह पदाधिकारियों की नियुक्ति एवं चुनावी जिम्मेदारियां दे रहा है जिस पर जिला अध्यक्ष गया पटेल द्वारा मुहर भी लगाया जा रहा है एवम कई पदाधिकारियों को संगठन के पद से मुक्त कर दिया गया है । वहीं कई पदाधिकारी दबी जुबान में कह रहे हैं कि संगठन में अगर बाहरी व्यक्ति की ही चलानी है तो फिर हम पदाधिकारी के राय और सहमति का कोई अस्तित्व ही नहीं रह गया। कई कांग्रेसी कार्यकर्ता और पदाधिकारी इसे अपने आत्म सम्मान के साथ जोड़ रहे हैं और अंदर ही अंदर उनके मन में एक विरोध की भावना भी पनप रही है पूर्व में हुए चुनाव में स्थिति जुदा थी उस समय कांग्रेस के सूत्रधार गांधी परिवार के करीबी के रूप में स्वर्गीय मोतीलाल वोरा पूरे चुनावी प्रक्रिया के समय दुर्ग में रहते थे एवं पुराने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते थे परंतु वर्तमान समय में पुराने कार्यकर्ताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा दुर्ग में कांग्रेस प्रत्याशी के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है । अगर इस विषय में प्रदेश संगठन गंभीरता से संज्ञान ले विचार नहीं किया तो दुर्ग में कांग्रेसी प्रत्याशी को भाजपा के साथ साथ असंतुष्ट कांग्रेसियों से भी मुकाबला करना पड़ेगा । वैसे भी कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद मदन जैन वोरा हटाओ कांग्रेस बचाओ का नारा दे रहे है वही विधायक वोरा के अलावा सभी दावेदार एकजुट है ऐसे में इस बार दुर्ग में चुनावी जंग जोरदार होने की संभावना है ।