(विशेष लेख )
लेखक : शरद पंसारी
संपादक, शौर्यपथ दैनिक समाचार
"कोई भी राज्य केवल प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध नहीं बनता, बल्कि उन संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग, निवेशकों के विश्वास, सुशासन और दूरदर्शी नीतियों से आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा तय करता है।"
इसी सोच को केंद्र में रखकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने "औद्योगिक विकास नीति 2024-30" के माध्यम से प्रदेश के आर्थिक भविष्य की नई रूपरेखा प्रस्तुत की है। यह केवल एक औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि "अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विजन 2047" की आधारशिला है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक जिले, प्रत्येक विकासखंड और अंतत: प्रत्येक नागरिक तक विकास का लाभ पहुँचाना है।
पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ को प्राय: केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में देखा जाता रहा, लेकिन नई सरकार की सोच इससे कहीं आगे की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज निकालने वाला प्रदेश नहीं रहेगा, बल्कि मूल्य संवर्धन (Value Addition), आधुनिक उद्योग, तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।
यही सोच इस औद्योगिक नीति के प्रत्येक प्रावधान में दिखाई देती है।
विकास का नया मॉडल : केवल उद्योग नहीं, समग्र आर्थिक परिवर्तन
औद्योगिक नीति 2024-30 का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसमें केवल बड़े उद्योगों की स्थापना पर जोर नहीं दिया गया है, बल्कि उन क्षेत्रों की पहचान करने का प्रयास किया गया है जो आज भी औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं।
सरकार की मंशा स्पष्ट है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में स्थानीय संसाधनों के आधार पर उद्योग विकसित हों ताकि क्षेत्रीय असंतुलन समाप्त हो और रोजगार के अवसर लोगों के घर के आसपास ही उपलब्ध हों।
यह सोच केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे पलायन कम होगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
प्राकृतिक संपदा से आर्थिक शक्ति तक का सफर
छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहाँ प्रकृति ने भरपूर संपदा प्रदान की है।
लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र, विशाल खनिज भंडार, कृषि उत्पादन, लघु वनोपज, औषधीय पौधे, जल संसाधन और भौगोलिक दृष्टि से देश के मध्य में स्थित होना—ये सभी ऐसी विशेषताएँ हैं जिन्हें यदि योजनाबद्ध तरीके से उपयोग में लाया जाए तो प्रदेश राष्ट्रीय औद्योगिक मानचित्र पर अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है।
मुख्यमंत्री साय की सरकार ने इसी सोच के अनुरूप नीति तैयार की है कि केवल खनिजों का दोहन न हो बल्कि उनका स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण (Processing) किया जाए, जिससे रोजगार भी यहीं उत्पन्न हो और उद्योगों का लाभ भी प्रदेश को मिले।
कोर सेक्टर से लेकर हाई-टेक उद्योगों तक व्यापक दृष्टिकोण
नई औद्योगिक नीति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता है।
सरकार ने केवल पारंपरिक उद्योगों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा है बल्कि—
फार्मास्यूटिकल उद्योग
टेक्सटाइल
सूचना प्रौद्योगिकी
इंजीनियरिंग
रक्षा उत्पादन
खाद्य प्रसंस्करण
कृषि आधारित उद्योग
वनोपज आधारित उद्योग
लॉजिस्टिक्स
सेवा क्षेत्र
जैसे अनेक क्षेत्रों को समान प्राथमिकता प्रदान की है।
यह दर्शाता है कि सरकार आने वाले वर्षों की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप औद्योगिक ढाँचा तैयार करना चाहती है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार : नीति का सबसे मानवीय पक्ष
नई औद्योगिक नीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देना है।
सरकार ने निवेश प्रोत्साहन को स्थानीय रोजगार से जोड़ते हुए यह संदेश दिया है कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ प्रदेश के युवाओं तक पहुँचना चाहिए।
यदि उद्योग आएँ लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार न मिले तो विकास अधूरा माना जाएगा।
साय सरकार की यह सोच इस नीति को केवल उद्योग केंद्रित नहीं बल्कि जन-केंद्रित औद्योगिक नीति बनाती है।
ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस : निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की ऐतिहासिक पहल
आज निवेशक केवल कर छूट या भूमि उपलब्धता नहीं देखते।
वे यह भी देखते हैं कि—
अनुमति कितनी जल्दी मिलेगी।
सरकारी प्रक्रियाएँ कितनी सरल हैं।
पारदर्शिता कितनी है।
समयबद्ध निर्णय होते हैं या नहीं।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने Ease of Doing Business (EoDB) को नई ऊँचाई देने का प्रयास किया है।
विभिन्न विभागों की अनुमतियों, सहमतियों, पंजीकरण और स्वीकृतियों को ऑनलाइन, समयबद्ध और सरल बनाना निवेशकों के लिए अत्यंत सकारात्मक संदेश है।
यह केवल प्रशासनिक सुधार नहीं बल्कि निवेशकों के प्रति सरकार का विश्वास प्रस्ताव है।
विश्वास की नई पूंजी
निवेश केवल पूंजी से नहीं आता।
निवेश का सबसे बड़ा आधार होता है—विश्वास।
जब सरकार स्पष्ट नीति, पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध निर्णय और उद्योग-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती है तब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास स्वत: बढ़ता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार की यह नीति उसी विश्वास को मजबूत करने का प्रयास करती दिखाई देती है।
आगे की दिशा
यह औद्योगिक नीति केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करने का दस्तावेज नहीं है।
यह वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना का प्रारंभिक रोडमैप है।
यदि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ केवल खनिज उत्पादक राज्य नहीं बल्कि औद्योगिक उत्पादन, रोजगार, निवेश, निर्यात और आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया केंद्र बन सकता है।
(क्रमश:...)
अगले भाग में पढि़ए—
"औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में निवेशकों को मिलने वाले प्रोत्साहन, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स, रक्षा उत्पादन, उद्योग विस्तार (Diversification), स्टार्टअप, जिला-विशेष औद्योगिक संभावनाएँ और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर इनके दूरगामी प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण।"
— शरद पंसारी
संपादक, शौर्यपथ दैनिक समाचार