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संसद का शीत सत्र खत्म, वेंकैया बोले - "क्षमता से कम काम किया गया, आत्मावलोकन की ज़रूरत"

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राजनीति/शौर्यपथ/ 

 हंगामे और गतिरोध के चलते आज संसद शुरू होते ही दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. राज्यसभा के सभापति वैेंकेया नायडु ने सदन न चल पाने को लेकर नाराजगी जताई.

संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दो दिन बचे थे लेकिन हंगामे और गतिरोध के चलते आज संसद शुरू होते ही दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. राज्यसभा के सभापति वैेंकेया नायडु ने सदन न चल पाने को लेकर नाराजगी जताई और सांसदों से कहा कि 'सदन अपनी क्षमता के मुकाबले बहुत कम चली. मैं आप सबसे आग्रह करता हूं कि आप आत्मावलोक करें कि इस सदन में काम कितना बेहतर हो सकता था. मेरा इसपर बहुत आलोचनात्मक नजरिया है.'

उधर, तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन कल निलंबित कर दिए गए थे, जिसके बाद आज वो संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के पास 12 निलंबित सांसदों के धरने में शामिल हुए. डेरेक पर सदन की रूल बुक फाड़ने का आरोप लगा है. हालांकि, उन्होंने इससे इनकार किया है.

बता दें कि सरकार ने कल लोकसभा में स्मृति ईरानी ने लड़कियों की शादी की उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 करने का प्रस्ताव पेश किया था. वहीं, निर्वाचन विधि संशोधन विधेयक को सोमवार को लोकसभा की मंजूरी मिल गई थी, जिसके बाद विपक्ष के विरोध के बीच इसे कल राज्यसभा में पेश किया गया था. शीकालीन सत्र के आखिरी सप्ताह में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसदीय दल की बैठक भी हुई थी.


निलंबित सांसदों ने गांधी प्रतिमा के सामने संविधान की प्रस्तवना पढ़ा और न्याय की मांग की. डोला सेन, नासिर हुसैन, अखिलेश प्रसाद सिंह, राज मणि पटेल, रूपेन बोरा, फूलो देवी नेताम और प्रियंका चतुर्वेदी
को शीतकालीन सत्र के शुरुआती दिनों में ही सदन से निलंबित कर दिया गया था.

आज उन्होंने कहा कि 'सरकार अहंकारी हो चुकी है. इस सरकार में किसी को न्याय नही मिल रहा है. ये सच की लड़ाई हम जीते हैं. हम लोकतंत्र के लिये लड़ते रहेंगे. विपक्ष की एकता और मजबूत हुई है. हम माफी नही मांगे. मजबूर करने की कोशिश जरूर हुई लेकिन मजबूत हुए. सरकार किसानों के हत्यारे को बचा रही है.'

 

 

 

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