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May 13, 2026
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भारत

भारत (1033)

   ​गुवाहाटी | असम की राजनीति में एक बार फिर केसरिया परचम लहराया है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन ने 2026 के विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया है। इस शानदार जीत के बाद अब सबकी निगाहें 12 मई 2026 को होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।
​खानापारा मैदान में सजेगा जीत का मंच
​गुवाहाटी का खानापारा वेटरनरी कॉलेज मैदान इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनेगा। 12 मई की सुबह 11:00 बजे हिमंत बिस्व सरमा लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। इस समारोह में जनभागीदारी का आलम यह होगा कि प्रशासन लगभग 1 लाख से अधिक लोगों के जुटने की उम्मीद कर रहा है।
​दिग्गजों का जमावड़ा: पीएम मोदी होंगे मुख्य अतिथि
​समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए शासित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री भी इस शक्ति प्रदर्शन और विजय उत्सव में शामिल होंगे।
​कैसे थमा सस्पेंस?
​मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर 10 मई को विराम लग गया। केंद्रीय पर्यवेक्षकों, जेपी नड्डा और नायब सिंह सैनी की उपस्थिति में हुई विधायक दल की बैठक में हिमंत बिस्व सरमा को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। हालांकि चर्चाओं में रंजीत कुमार दास और अजंता नियोग जैसे नाम भी शामिल थे, लेकिन सरमा के नेतृत्व और उनकी प्रशासनिक पकड़ ने उन्हें आलाकमान की पहली पसंद बनाए रखा।
​चुनाव परिणाम: एनडीए की 'सुनामी'
​असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने विपक्षी खेमे को पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया है:
​भाजपा: 82 सीटें (अकेले दम पर बहुमत का आंकड़ा पार)
​AGP और BPF: 10-10 सीटें
​कुल एनडीए: 102 सीटें
​विपक्ष (कांग्रेस): मात्र 19 सीटों पर सिमटी।
​"यह जीत असम के विकास और जनता के विश्वास की जीत है। 12 मई से शुरू होने वाला यह दूसरा कार्यकाल राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।"

TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने संभाली तमिलनाडु की कमान, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और महिला सुरक्षा दल का ऐलान

चेन्नई /शौर्यपथ (विशेष रिपोर्ट)

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) ने 10 मई 2026 को तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया।

चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राजनीतिक, फिल्म और सामाजिक जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री विजय ने सुबह 10:15 बजे तमिल भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली।

शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री विजय ने जनता से जुड़े कई बड़े फैसलों पर हस्ताक्षर कर यह संकेत दे दिया कि उनकी सरकार “जनहित और तेज निर्णय” की राजनीति पर काम करेगी।

शपथ लेते ही विजय के 3 बड़े फैसले

मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद विजय ने जिन पहली फाइलों पर हस्ताक्षर किए, उनमें आम जनता और युवाओं से जुड़े अहम निर्णय शामिल रहे।

⚡ 1. 200 यूनिट मुफ्त बिजली

तमिलनाडु के घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए राज्य सरकार ने 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा की। इस फैसले को मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

?‍✈️ 2. महिला सुरक्षा दल का गठन

राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विजय सरकार ने Women Safety Squad के गठन को मंजूरी दी। यह विशेष बल महिला सुरक्षा, छेड़छाड़ और अपराध रोकने पर केंद्रित रहेगा।

?? 3. एंटी-ड्रग्स स्क्वॉड का गठन

युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और राज्य में ड्रग नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए Anti-Drugs Squad बनाने का फैसला लिया गया।

9 मंत्रियों ने भी ली शपथ, 29 वर्षीय कीर्तना बनीं सबसे युवा मंत्री

मुख्यमंत्री विजय के साथ TVK के 9 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
इस कैबिनेट की सबसे चर्चित चेहरा रहीं 29 वर्षीय सेल्वी एस. कीर्तना, जो सरकार की सबसे युवा मंत्री और एकमात्र महिला मंत्री बनीं।

राहुल गांधी समेत कई दिग्गज रहे मौजूद

इस ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव के गवाह बनने के लिए कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी विशेष रूप से समारोह में पहुंचे।

इसके अलावा समारोह में:

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर
विजय के माता-पिता एस.ए. चंद्रशेखर और शोबा चंद्रशेखर
अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन
CPI, CPI(M), VCK और IUML के नेता
भी मौजूद रहे।
गठबंधन के सहारे TVK ने पार किया बहुमत का आंकड़ा

2026 विधानसभा चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरते हुए तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर किया। विजय द्वारा एक सीट छोड़ने के बाद पार्टी के पास 107 विधायक रह गए।

13 मई तक विधानसभा में विश्वास मत

राज्यपाल ने नई सरकार को 13 मई 2026 तक विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय सरकार आसानी से बहुमत साबित कर सकती है।

फिल्मी करिश्मे से सत्ता तक: तमिल राजनीति में नया दौर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता, युवा समर्थन और आक्रामक चुनाव अभियान ने तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है।

सिनेमा के “थलापति” अब तमिलनाडु की सत्ता के “तलैवर” बन चुके हैं और जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या विजय अपने चुनावी वादों और जनकल्याणकारी फैसलों को जमीन पर उतार पाएंगे।

15 साल बाद बदली सत्ता की तस्वीर, ममता युग का अंत — 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा भव्य शपथ ग्रहण

कोलकाता/शौर्यपथ।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने 8 मई 2026 को वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है। 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए 294 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जिसके साथ ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस का 15 वर्षों से चला आ रहा शासन समाप्त हो गया।

भाजपा विधायक दल की बैठक कोलकाता में केंद्रीय पर्यवेक्षकों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आयोजित की गई, जहां शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। पार्टी ने इसे “बंगाल में परिवर्तन का निर्णायक जनादेश” बताया है।

ब्रिगेड परेड ग्राउंड बनेगा सत्ता परिवर्तन का साक्षी

शुभेंदु अधिकारी का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार, 9 मई 2026 को सुबह 11 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित होगा। भाजपा इस समारोह को बंगाल की राजनीति के सबसे बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष सहित एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्तर के नेता शामिल होंगे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार फिलहाल राज्य में किसी उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति नहीं की जाएगी और सरकार का नेतृत्व पूरी तरह शुभेंदु अधिकारी के हाथों में रहेगा।

‘जायंट किलर’ बने शुभेंदु अधिकारी

इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश भवानीपुर सीट से आया, जहां शुभेंदु अधिकारी ने निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,105 मतों के अंतर से पराजित किया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पारंपरिक नंदीग्राम सीट भी बरकरार रखी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह जीत केवल चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक मानसिकता का संकेत मानी जा रही है।

ममता के करीबी से भाजपा का चेहरा बनने तक

शुभेंदु अधिकारी कभी तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे और ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते थे। दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने बंगाल में पार्टी के सबसे आक्रामक और जनाधार वाले नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।

2021 से 2026 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उनकी भूमिका लगातार चर्चा में रही। विधानसभा से लेकर सड़क तक तृणमूल सरकार के खिलाफ उनके तेवर भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा का केंद्र बने रहे।

भाजपा के लिए पूर्वी भारत में सबसे बड़ी जीत

भाजपा की यह जीत केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पूर्वी भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है और कोलकाता सहित कई जिलों में विजय जुलूस निकाले जा रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में भाजपा की यह ऐतिहासिक सफलता आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और रणनीति दोनों को प्रभावित कर सकती है।

चेन्नई: तमिलनाडु की सियासत में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है। राज्य में सरकार गठन को लेकर जारी रस्साकशी के बीच डीएमके (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। बहुमत के जादुई आंकड़े को छूने की कोशिशों के बीच स्टालिन ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी, टीवीके (TVK) प्रमुख विजय की संभावित सरकार में अगले छह महीने तक कोई दखल नहीं देगी।

संवैधानिक संकट टालने की कोशिश

स्टालिन ने स्पष्ट किया कि डीएमके राज्य में किसी भी तरह के संवैधानिक संकट या समय से पहले चुनाव के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी केवल स्थिति पर नजर रखेगी और नई सरकार को कामकाज का मौका देगी। राजनीतिक विश्लेषक इसे स्टालिन का एक सोची-समझी रणनीति के तहत चला गया 'मास्टरस्ट्रोक' मान रहे हैं।

कल्याणकारी योजनाओं पर टिकी नजर

पूर्व मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नई सरकार डीएमके शासनकाल की प्रमुख योजनाओं को बंद नहीं करेगी। उन्होंने विशेष रूप से दो योजनाओं का जिक्र किया:

स्कूली बच्चों के लिए मुफ्त नाश्ता योजना

महिलाओं के लिए ₹1000 मासिक सहायता योजना

स्टालिन ने कहा, "हमने 2021 के घोषणापत्र के 90 प्रतिशत वादे पूरे किए हैं। जो अधूरे रहे, वे केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण रुके। जनता के हित की योजनाओं का भविष्य अब नई सरकार के हाथों में है।"

टीवीके के वादों पर उठाए सवाल

जहाँ एक ओर स्टालिन ने नरम रुख दिखाया, वहीं टीवीके के चुनावी वादों पर चुटकी लेने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा कि चुनाव में बड़े-बड़े वादे करना आसान है, लेकिन उन्हें धरातल पर लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी।

सियासी गलियारों में चर्चा:

अब सवाल यह है कि क्या विजय की पार्टी इस 'छह महीने की मोहलत' का फायदा उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर पाएगी? या फिर तमिलनाडु की राजनीति में किसी नए गठबंधन का उदय होगा? फिलहाल, सबकी नजरें राजभवन की गतिविधियों और अगले कुछ घंटों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हैं।

बर्खास्तगी के खिलाफ टीएमसी का बड़ा दांव, अगले कुछ दिनों में सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है सुनवाई

कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अभूतपूर्व संवैधानिक संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने अपनी सरकार की बर्खास्तगी और चुनाव परिणामों को चुनौती देने का फैसला किया है। 7 मई 2026 को राज्यपाल द्वारा मंत्रिमंडल को बर्खास्त किए जाने के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, यह याचिका मई 2026 के दूसरे सप्ताह में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आ सकती है। मामले की गंभीरता और संवैधानिक प्रभाव को देखते हुए टीएमसी की कानूनी टीम “अर्जेंट मेंशनिंग” के जरिए जल्द सुनवाई की मांग करेगी।

ममता और चंद्रिमा खुद लड़ेंगी कानूनी लड़ाई

जानकारी के मुताबिक, Mamata Banerjee और पूर्व मंत्री Chandrima Bhattacharya स्वयं वकील के रूप में इस संवैधानिक लड़ाई में पक्ष रख सकती हैं। पार्टी का दावा है कि राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनादेश को नजरअंदाज किया गया है।

हालांकि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉज लिस्ट में इस मामले की सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए अगले 2-3 कार्य दिवसों के भीतर इस पर सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

पहले भी मिल चुके हैं कानूनी झटके

चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में टीएमसी को हाल ही में अदालत से राहत नहीं मिल सकी थी।

2 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को वैध ठहराते हुए टीएमसी की याचिका खारिज कर दी थी।

वहीं अप्रैल 2026 में चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के तबादलों को लेकर दायर याचिका पर भी अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था।

बीजेपी सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी तेज

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई 2026 को Brigade Parade Ground में प्रस्तावित है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ममता बनर्जी की याचिका का मुख्य उद्देश्य नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाना या चुनाव परिणामों को चुनौती देकर चुनाव निरस्त कराने की मांग करना हो सकता है।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल

राज्य में तेजी से बदलते राजनीतिक हालात के बीच अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिक गई है। यदि अदालत इस मामले में त्वरित सुनवाई स्वीकार करती है, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिन बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

कोलकाता | विशेष संवाददाता पश्चिम बंगाल की राजनीति में 4 मई 2026 की तारीख एक युगांतकारी परिवर्तन की गवाह बनी है। राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न केवल सत्ता का समीकरण बदला है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने अभेद्य दुर्ग को भी ढहा दिया है। भाजपा ने 206 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल कर बंगाल के राजनीतिक मानचित्र पर अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई है।

भवानीपुर में बड़ा उलटफेर: शुभेंदु बने 'जायंट किलर'

इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला परिणाम ममता बनर्जी के अपने गढ़ भवानीपुर से आया, जहाँ भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें पटखनी देकर यह साबित कर दिया कि बंगाल में सत्ता विरोधी लहर (Anti-Inumbency) कितनी गहरी थी। उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल तक भगवा लहर ने टीएमसी के संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

भ्रष्टाचार पर भारी पड़ा परिवर्तन का संकल्प

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिटफंड मामले और भर्ती घोटालों के गंभीर आरोपों ने जनता के भरोसे को हिलाकर रख दिया था। 92.93% के रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने स्पष्ट कर दिया कि बंगाल की जनता नीतिगत स्पष्टता और 'डबल इंजन' सरकार की आकांक्षा रख रही थी। इस जीत का सीधा असर 2029 के लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा, जहाँ पूर्वी भारत अब भाजपा के लिए एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरेगा।

क्या बंगाल को मिलेगी पहली भाजपाई महिला मुख्यमंत्री?

वर्तमान राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा मुख्यमंत्री के नाम को लेकर है। जहाँ शुभेंदु अधिकारी जीत के सबसे बड़े नायक के रूप में उभरे हैं, वहीं दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से एक नई सुगबुगाहट सुनाई दे रही है।

महिला कार्ड से मास्टरस्ट्रोक की तैयारी: > महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन और देश की आधी आबादी को नेतृत्व देने के संकल्प के बीच, भाजपा के पास पश्चिम बंगाल में किसी महिला चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर देश को एक बड़ा संदेश देने का सुनहरा अवसर है। इस दौड़ में अग्निमित्रा पॉल का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जिन्होंने आसनसोल दक्षिण में अपनी पकड़ मजबूत रखी है। यदि भाजपा नेतृत्व किसी महिला पर दांव लगाता है, तो यह 'नारी शक्ति' के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता का सबसे बड़ा वैश्विक विज्ञापन होगा।

9 मई को शपथ ग्रहण, बाज़ार में उत्साह

नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई 2026 को होने की संभावना है। इस ऐतिहासिक जीत की धमक दलाल स्ट्रीट पर भी सुनाई दी, जहाँ कोलकाता आधारित कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल देखा गया। निवेशकों को उम्मीद है कि केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने से बंगाल में औद्योगिक क्रांति का नया अध्याय शुरू होगा।

मुख्य आकर्षण:

प्रचंड बहुमत: भाजपा 206 सीटें, टीएमसी 80 सीटें।

ऐतिहासिक मतदान: बंगाल के इतिहास में पहली बार 92.93% वोटिंग।

चेहरा कौन? शुभेंदु अधिकारी, अग्निमित्रा पॉल और दिलीप घोष रेस में सबसे आगे।

बाज़ार का रुख: नीतिगत स्पष्टता की उम्मीद में शेयर बाज़ार में रिकॉर्ड बढ़त।

कोलकाता/शौर्यपथ।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों और चुनाव बाद उभरे राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम सामने आया है। कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस शिवगणनम ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अपीलीय ट्रिब्यूनल के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में “व्यक्तिगत कारणों” का उल्लेख किया है, लेकिन इस्तीफे के समय और पृष्ठभूमि ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या था SIR ट्रिब्यूनल का उद्देश्य?

SIR यानी Special Intensive Revision प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया गया था। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। जिन लोगों ने इस कार्रवाई को चुनौती दी, उनकी अपील सुनने के लिए एक विशेष अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किया गया था, जिसकी जिम्मेदारी जस्टिस शिवगणनम संभाल रहे थे।

90 लाख नाम हटने का दावा, 27 लाख अपीलें

सूत्रों और चुनावी बहसों में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान 90 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जबकि लगभग 27 लाख लोगों ने इस निर्णय के खिलाफ अपील दाखिल की। विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर बड़ा प्रहार बताते हुए प्रक्रिया की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठाए थे।

“चार साल लग जाएंगे” — काम के बोझ पर जताई थी चिंता

इस्तीफे से पहले जस्टिस शिवगणनम ने कथित रूप से यह चिंता व्यक्त की थी कि जिस गति और तरीके से अपीलों की जांच हो रही है, उस हिसाब से केवल कोलकाता क्षेत्र की अपीलों को निपटाने में ही लगभग चार वर्ष लग सकते हैं। इससे यह संकेत मिला कि ट्रिब्यूनल के सामने मामलों का अत्यधिक बोझ था और पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक तथा कानूनी चुनौती बन चुकी थी।

चुनाव बाद हिंसा के बीच आया इस्तीफा

यह इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद कई जिलों से हिंसा, राजनीतिक झड़पों और तनाव की खबरें आ रही हैं। ऐसे संवेदनशील माहौल में एक वरिष्ठ न्यायिक व्यक्ति का इस्तीफा राजनीतिक और संवैधानिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

विपक्ष ने उठाए नए सवाल

विपक्षी दलों का कहना है कि यह इस्तीफा केवल “व्यक्तिगत कारणों” तक सीमित नहीं माना जा सकता। विपक्ष का आरोप है कि यदि लाखों मतदाताओं की अपीलें लंबित हैं और ट्रिब्यूनल प्रमुख स्वयं प्रक्रिया की गति पर सवाल उठा चुके हैं, तो इससे पूरी SIR प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

कई सामाजिक संगठनों और चुनावी अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी मांग की है कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया और अपील निपटान की संपूर्ण व्यवस्था की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।

लोकतंत्र और मताधिकार पर बहस तेज

विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटना और उसके बाद अपीलों का वर्षों तक लंबित रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। चुनावी पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा को लेकर अब बहस और तेज होने की संभावना है।

फिलहाल जस्टिस टीएस शिवगणनम के इस्तीफे ने बंगाल की चुनावी राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है, जिसके दूरगामी राजनीतिक और संवैधानिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

मुंबई | (शौर्यपथ समाचार)

वृत्तचित्र, एनिमेशन और लघु फिल्म निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच ‘वेव्स डॉक बाज़ार’ का दूसरा संस्करण 16 से 18 जून 2026 तक मुंबई में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन 19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) के साथ एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स में होगा, जहां देश-विदेश के फिल्म निर्माता, वितरक, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ एक साथ जुटेंगे।

वेव्स डॉक बाज़ार को ऑडियो-विज़ुअल उद्योग में उभरती प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मंच फिल्म निर्माताओं को सहयोग, मार्गदर्शन, बाजार तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करेगा।

इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में ‘व्यूइंग रूम’ शामिल है, जहां हाल ही में पूर्ण या पोस्ट-प्रोडक्शन में मौजूद फिल्मों को चुनिंदा खरीदारों, वितरकों और निवेशकों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। यह एक सुरक्षित मंच होगा, जहां फिल्म निर्माताओं को वितरण, सह-निर्माण और वित्तीय सहयोग के अवसर मिलेंगे।

इसके साथ ही ‘वर्क-इन-प्रोग्रेस (डब्ल्यूआईपी) लैब’ भी आयोजित की जाएगी, जिसमें डॉक्यूमेंट्री और एनिमेशन फिल्मों के रफ-कट चरण के प्रोजेक्ट्स को विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिलेगा। अनुभवी फिल्म निर्माता, संपादक और अंतरराष्ट्रीय सलाहकार प्रतिभागियों को अपनी फिल्मों को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देंगे।

पहली बार इस आयोजन में वीआर (वर्चुअल रियलिटी), एआर (ऑगमेंटेड रियलिटी) और एक्सआर (एक्सटेंडेड रियलिटी) आधारित कंटेंट पर केंद्रित एक उभरता बाजार भी प्रस्तुत किया जाएगा, जो इमर्सिव स्टोरीटेलिंग और नई तकनीकों को बढ़ावा देगा।

वेव्स डॉक बाज़ार 2026 के लिए व्यूइंग रूम और डब्ल्यूआईपी लैब में भागीदारी हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक प्रतिभागी 15 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह मंच उन फिल्म निर्माताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो अपने प्रोजेक्ट्स के लिए वितरण, निवेश या अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के अवसर तलाश रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह आयोजन भारतीय और वैश्विक फिल्म उद्योग के बीच सेतु का काम करेगा और रचनात्मकता के साथ-साथ तकनीकी नवाचार को भी नई दिशा देगा।

नई दिल्ली | (शौर्यपथ समाचार)

भारतीय इस्पात क्षेत्र ने अप्रैल 2026 में अपनी मजबूत वृद्धि की गति को बरकरार रखते हुए उत्पादन, खपत और कीमतों के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। घरेलू मांग में मजबूती और अवसंरचना व विनिर्माण क्षेत्रों में लगातार गतिविधियों के चलते उद्योग में स्थिरता और विस्तार का रुझान देखने को मिला।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में कच्चे इस्पात का उत्पादन 14.09 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5.8 प्रतिशत अधिक है। तैयार इस्पात का उत्पादन 13.05 मिलियन टन तक पहुंचा, जबकि इसकी खपत 12.99 मिलियन टन रही, जिसमें 8.1 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि देश में निर्माण और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में जारी तेजी को दर्शाती है।

हालांकि पिग आयरन का उत्पादन 0.69 मिलियन टन रहा, जिसमें सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन समग्र रूप से इस्पात क्षेत्र की स्थिति मजबूत बनी रही।

व्यापार के क्षेत्र में भारत अप्रैल 2026 में मामूली रूप से शुद्ध आयातक बना रहा। इस दौरान आयात 0.68 मिलियन टन और निर्यात 0.47 मिलियन टन रहा। पिछले वर्ष की तुलना में आयात में 30.8 प्रतिशत और निर्यात में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वैश्विक बाजार में भारत की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

क्षमता विस्तार के मोर्चे पर भारत 2030 तक 300 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में यह क्षमता लगभग 220 मिलियन टन प्रति वर्ष है। एसएआईएल, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, जेएसपीएल और एएमएनएस जैसी प्रमुख कंपनियां बड़े निवेश के साथ विस्तार कर रही हैं। टाटा स्टील द्वारा लुधियाना में 3,200 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित 0.75 मिलियन टन क्षमता वाला ग्रीन स्टील संयंत्र इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ग्रीन स्टील पहल के तहत भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। एनआईएसएसटी द्वारा 15 राज्यों के 90 उत्पादकों को ग्रीन स्टील प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश उत्पादों को 5-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है। यह पर्यावरण अनुकूल उत्पादन की दिशा में उद्योग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कीमतों के मोर्चे पर अप्रैल 2026 में सभी प्रमुख इस्पात उत्पादों में सुधार देखने को मिला। टीएमटी और रीबार की कीमतों में 2.6 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई, जबकि एचआर कॉइल और जीपी शीट की कीमतों में क्रमशः 6.3 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

कच्चे माल की कीमतों में मिश्रित रुझान रहा, लेकिन घरेलू लौह अयस्क की कीमतों में 10-11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं अंतरराष्ट्रीय कोकिंग कोयले की कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत पर दबाव बना हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बुनियादी ढांचे में बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के चलते भारतीय इस्पात उद्योग आने वाले समय में भी मजबूत बना रहेगा। हालांकि ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियां इस क्षेत्र के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी रहेंगी।

(स्रोत: अप्रैल 2026 के लिए अनंतिम जेपीसी डेटा)

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