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नई दिल्ली।
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार, 2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा उस समय तीखे राजनीतिक टकराव में बदल गई, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चीन और 2017 के डोकलाम विवाद को लेकर गंभीर दावे कर दिए। राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण (ठ्ठश्चह्वड्ढद्यद्बह्यद्धद्गस्र रूद्गद्वशद्बह्म्) का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम गतिरोध के दौरान चीनी टैंक भारतीय सीमा के बेहद करीब आ गए थे। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही भारी हंगामे में तब्दील हो गई।
राहुल गांधी ने अपने तर्क के समर्थन में पत्रिका 'द कारवांÓ (ञ्जद्धद्ग ष्टड्डह्म्ड्ड1ड्डठ्ठ) में प्रकाशित एक लेख का उल्लेख किया, जिसमें जनरल नरवणे की प्रस्तावित पुस्तक के अंश होने का दावा किया गया था। हालांकि सरकार ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि किसी अप्रकाशित और अप्रमाणित दस्तावेज का हवाला संसद के नियमों के खिलाफ है।
सरकार का कड़ा विरोध, स्पीकर का हस्तक्षेप
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के बयान पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। सरकार का कहना था कि बिना आधिकारिक प्रकाशन और प्रमाणिकता के किसी पुस्तक या उसके कथित अंशों को सदन में उद्धृत नहीं किया जा सकता। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा के नियम 352 का हवाला देते हुए कहा कि सदन में असत्यापित या आपत्तिजनक दस्तावेज पेश करना नियमों का उल्लंघन है और इस पर कार्रवाई का प्रावधान है।
इस पूरे विवाद के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सरकार के पक्ष को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि बिना प्रमाणिकता वाली सामग्री को सदन के रिकॉर्ड में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी को कथित संस्मरण के अंश पढऩे की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
सदन के बाहर भी जारी रही जंग
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार सच्चाई से डर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण निर्णय लेने के बजाय जिम्मेदारी दूसरों पर डालते हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पूर्व थल सेना प्रमुख की बात सामने आ रही है, तो सरकार उससे घबराकर उसे दबाने की कोशिश क्यों कर रही है।
इसके जवाब में भाजपा ने राहुल गांधी पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और सेना को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से जनरल नरवणे का एक पुराना वीडियो भी सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि "भारत ने अपनी एक इंच जमीन भी नहीं खोई है।"
अप्रकाशित पुस्तक और रक्षा मंत्रालय की आपत्ति
जिस पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनीÓ (स्नशह्वह्म् स्ह्लड्डह्म्ह्य शद्घ ष्ठद्गह्यह्लद्बठ्ठ4) का उल्लेख राहुल गांधी ने किया, उसके प्रकाशन पर रक्षा मंत्रालय पहले ही कुछ आपत्तिजनक अंशों को लेकर आपत्ति जता चुका है। मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की सामग्री राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों को प्रभावित कर सकती है। राहुल गांधी का दावा है कि पुस्तक में डोकलाम और लद्दाख गतिरोध के दौरान सरकार की कथित अनिर्णय की स्थिति का उल्लेख है, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्टों में उजागर किया गया है।
विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल
राहुल गांधी ने बहस को केवल सैन्य स्तर तक सीमित न रखते हुए भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण चीन और पाकिस्तान एक-दूसरे के करीब आ गए हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए "सबसे बड़ा खतरा" है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में दोहराया कि भारत की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और रक्षा मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार किसी भी क्षेत्र में संप्रभुता से समझौता नहीं किया गया है।
हंगामे में बाधित हुई कार्यवाही
दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप के चलते लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। अंतत: भारी हंगामे के बीच अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
यह विवाद एक बार फिर यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना और विदेश नीति जैसे मुद्दे संसद में सबसे संवेदनशील और टकरावपूर्ण बहसों का केंद्र बने हुए हैं, जहां नियम, राजनीति और राष्ट्रहित आमने-सामने आ खड़े होते हैं।
नई दिल्ली / एजेंसी / कांग्रेस पार्टी ने केंद्रीय बजट 2026-27 की कड़ी आलोचना की है और इसे "फीका", "निराशाजनक" और "दृष्टिकोणहीन" बताया है। कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की मुख्य प्रतिक्रियाएं नीचे दी गई हैं:
मल्लिकार्जुन खडग़े: कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार के पास नए विचारों की कमी हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में बेरोजगारी, महंगाई, और विनिर्माण क्षेत्र की सुस्ती का कोई समाधान नहीं दिया गया है। खडग़े ने यह भी सवाल उठाया कि किसानों के लिए कोई आय सुरक्षा योजना क्यों नहीं है और स्ष्ट, स्ञ्ज, ह्रक्चष्ट समुदायों के लिए विशेष प्रावधानों की कमी है।
राहुल गांधी: लोकसभा में विपक्ष के नेता ने बजट को भारत के "असली संकट के प्रति अंधा" बताया। उन्होंने ट्वीट किया कि बजट ने युवाओं के रोजगार, गिरती घरेलू बचत और किसानों की परेशानी जैसे 6 प्रमुख मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया है। उन्होंने सरकार पर "कोर्स करेक्शन" (सुधार) से इनकार करने का आरोप लगाया।
पी. चिदंबरम: पूर्व वित्त मंत्री ने बजट को आर्थिक रणनीति के परीक्षण में विफल करार दिया और कहा कि वित्त मंत्री का भाषण देश के आर्थिक सर्वेक्षण में बताई गई चुनौतियों का जवाब देने में असमर्थ रहा।
जयराम रमेश: उन्होंने बजट को "पूरी तरह से फीका" बताया और आरोप लगाया कि यह पारदर्शी नहीं है क्योंकि इसमें प्रमुख योजनाओं के आवंटन का स्पष्ट विवरण नहीं है।
इसके अलावा, कांग्रेस के अन्य नेताओं जैसे के.सी. वेणुगोपाल ने इसे "संवेदनहीन" बजट कहा, जो आम जनता के बजाय बड़े कॉरपोरेट्स के पक्ष में है। ञ्जद्धद्ग ॥द्बठ्ठस्रह्व और हृष्ठञ्जङ्क पर विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखी जा सकती हैं।
जयपुर।
राजस्थान की सबसे चर्चित भर्तियों में शामिल सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती–2021 एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की तत्कालीन सदस्य और प्रख्यात कवि कुमार विश्वास की पत्नी डॉ. मंजू शर्मा का नाम न्यायिक जांच के दायरे में आया, हालांकि उनके विरुद्ध अब तक किसी प्रकार का सीधा कानूनी आरोप या एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
अगस्त 2024 में राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने SI भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे “Systematic Corruption” से प्रभावित बताया। अदालत ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए यह संकेत दिया कि लिखित परीक्षा और साक्षात्कार स्तर पर प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता हुआ है।
इन्हीं टिप्पणियों के बाद आयोग के तत्कालीन सदस्यों की भूमिका न्यायिक जांच के दायरे में आई, जिनमें डॉ. मंजू शर्मा भी शामिल रहीं।
अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद डॉ. मंजू शर्मा ने
? 1 सितंबर 2025 को RPSC सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया,
जिसे राजस्थान के राज्यपाल ने
? 15 सितंबर 2025 को स्वीकार कर लिया।
अपने इस्तीफे में उन्होंने स्पष्ट किया कि—
उनके खिलाफ किसी भी एजेंसी में कोई आपराधिक जांच लंबित नहीं है
उन्हें किसी भी मामले में अभियुक्त नहीं बनाया गया है
उन्होंने आयोग की गरिमा और अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए पद छोड़ा
डॉ. मंजू शर्मा ने हाईकोर्ट की एकल पीठ की टिप्पणियों को “अपमानजनक” बताते हुए उन्हें हटाने की मांग के साथ विशेष अपील (Special Appeal) दायर की है।
उनका तर्क है कि—
“बिना पक्षकार बनाए और बिना सुनवाई का अवसर दिए इस प्रकार की टिप्पणियां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।”
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या SI भर्ती 2021 पूरी तरह रद्द होगी?
क्या न्यायिक जांच किसी औपचारिक आपराधिक जांच में बदलेगी?
या फिर हाईकोर्ट की अपील में कोई नया मोड़ आएगा?
फिलहाल, मामला न्यायालय के विचाराधीन है, और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
✍️ नोट: यह समाचार न्यायालयी रिकॉर्ड, सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार केवल न्यायालय को है।
प्रयागराज।
महाराष्ट्र में हुए दर्दनाक विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री समेत पाँच लोगों के असामयिक निधन की अत्यंत दुखद घटना ने पूरे देश को शोकाकुल कर दिया है। इस राष्ट्रीय त्रासदी के बाद ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक भावनात्मक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कहा है कि वे अब विशेष परिस्थिति में ही प्रयागराज छोड़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर वे अब कोई और चर्चा नहीं करना चाहते।
मंगलवार की रात प्रशासन की ओर से ब्रह्मचारी के माध्यम से तथा शंकराचार्य के मुख्य कार्याधिकारी चंद्रप्रकाश उपाध्याय द्वारा एक पत्र एवं प्रस्ताव भेजा गया। इसमें पूर्ण सम्मान के साथ पालकी द्वारा संगम ले जाकर अधिकारियों की उपस्थिति में स्नान कराने का आमंत्रण दिया गया था। माना जा रहा है कि उमा भारती के बयान के पश्चात सरकार और प्रशासन दोनों ने पहल करते हुए यह आमंत्रण भेजा।
हालाँकि, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गहरे शोक और संवेदना के भाव में संगम स्नान से विरत रहने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा—
“संगम की लहरों में स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संस्कृति और आत्मिक चेतना का मार्ग है।
लेकिन आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही इस पावन स्थल से विदा ले रहे हैं।
जब हृदय में क्षोभ और पीड़ा हो, तब जल की शीतलता भी मन को शांति नहीं दे सकती।”
उन्होंने आगे कहा कि न्याय की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती—
“आज हम यहाँ से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कई प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं।
ये प्रश्न न केवल प्रयागराज की हवा में रहेंगे, बल्कि पूरे विश्व के वायुमंडल में विद्यमान रहेंगे और अपने उत्तर की प्रतीक्षा करेंगे।”
शंकराचार्य का यह निर्णय केवल एक व्यक्तिगत आस्था का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शोक के प्रति संवेदनशीलता, नैतिक चेतना और आत्मिक उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जा रहा है। उनके शब्दों और मौन में वह पीड़ा झलकती है, जो आज पूरे देश के हृदय में समाई हुई है।
नई दिल्ली /गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी में शामिल कलाकारों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का गौरव प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति से स्नेहपूर्ण मुलाकात के दौरान कलाकार भावविभोर और अभिभूत नजर आए।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ की झांकी की प्रशंसा करते हुए कहा कि झांकी के माध्यम से देश की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ है। उन्होंने कलाकारों के समर्पण, मेहनत और जीवंत प्रस्तुति की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया भी कहा।
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से आए जनजातीय कलाकारों ने गणतंत्र दिवस परेड के दौरान छत्तीसगढ़ की झांकी के साथ पारंपरिक मंदार नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी थी, जिसने कर्तव्य पथ पर मौजूद दर्शकों के साथ-साथ देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।
कलाकारों ने राष्ट्रपति से मुलाकात को अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं को और अधिक निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने की नई प्रेरणा देगा।
राष्ट्रपति से मुलाकात करने वालों में टीम लीडर तेज बहादुर भुवाल के नेतृत्व में नारायणपुर जिले के ग्राम नयनार से आए 13 सदस्यीय दल में जेनू राम सलाम, लच्छू राम, जैतू राम सलाम, राजीम सलाम, दिनेश करंगा, जयनाथ सलाम, मानसिंग करंगा, चन्द्रशेखर पोटाई, धनश्याम सलाम, जगनाथ सलाम, सुरेश सलाम तथा घोड़लापारा, ग्राम नयनार निवासी दिलीप गोटा शामिल रहे।
उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की इस पारंपरिक कला टोली ने अपनी लोक-संस्कृति और नृत्य शैली से राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की भव्य झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
नई दिल्ली /77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती नजर आई।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रियों और विशिष्ट अतिथियों ने झांकी को उत्सुकता के साथ देखा और तालियां बजाकर सराहना की। दर्शक दीर्घा में मौजूद लाखों लोगों ने भी तालियों की गड़गड़ाहट के साथ छत्तीसगढ़ की झांकी का स्वागत किया। झांकी के समक्ष छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की झलक दिखाई गई, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।
झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया। धुर्वा समाज के इस महान योद्धा ने अन्यायपूर्ण अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित किया। विद्रोह के प्रतीक के रूप में आम की टहनियां और सूखी मिर्च को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। विद्रोह की तीव्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे।
झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया। उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई।
पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती रही और गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया।
नई दिल्ली / भाजपा मुख्यालय में आज एक ऐतिहासिक समारोह हुआ, जहां 45 वर्षीय नितिन नबीन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का जिम्मा संभाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, "नितिन नबीन मेरे बॉस हैं। संगठन के मामलों में वे मेरा ष्टक्र (चरित्र रिपोर्ट) लिखेंगे और मैं उनके मार्गदर्शन में कार्य करूंगा।" यह बयान भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र और युवा नेतृत्व को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया।
समारोह में पीएम मोदी ने नितिन नबीन को "मिलेनियल" नेता करार दिया, जो आधुनिक तकनीक और बदलती अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं। नबीन भाजपा के 12वें और अब तक के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका निर्विरोध चयन हुआ, जिसमें उनके पक्ष में 37 नामांकन सेट दाखिल किए गए। यह चयन पार्टी की एकजुटता को दर्शाता है।
पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें
हृष्ठ्र में तालमेल : नबीन की जिम्मेदारी केवल भाजपा तक सीमित नहीं, बल्कि हृष्ठ्र सहयोगियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
विकसित भारत का संकल्प : अगले 25 वर्षों को निर्णायक बताते हुए पीएम ने विश्वास जताया कि नबीन के नेतृत्व में पार्टी 'विकसित भारतÓ लक्ष्य हासिल करेगी।
परिवारवाद पर प्रहार : राजनीति में परिवारवाद को अभिशाप बताते हुए मोदी ने कहा, "मैं 1 लाख ऐसे युवाओं को लाना चाहता हूं, जिनके परिवार का कोई राजनीतिक इतिहास न हो।"
नितिन नबीन का राजनीतिक सफर
बिहार से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले पहले नेता नितिन नबीन पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार (2006, 2010, 2015, 2020, 2025) विधायक चुने गए हैं। संगठन में उनका लंबा अनुभव रहा- वे छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी, भारतीय जनता युवा मोर्चा (क्चछ्वङ्घरू) के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार सरकार में पथ निर्माण व नगर विकास मंत्री रह चुके हैं। जेपी नड्डा की जगह लेते हुए वे पार्टी को नई ऊर्जा प्रदान करने को तैयार हैं।
कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री जैसे योगी आदित्यनाथ, भूपेंद्र पटेल और हिमंत बिस्वा सरमा उपस्थित रहे। भाजपा सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति 2029 लोकसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है, जिसमें युवा-केंद्रित रणनीति पर जोर दिया जाएगा।
इस समाचार को और आकर्षक बनाने के लिए क्या कोई विशेष कोण या अतिरिक्त विवरण जोडऩा चाहेंगे, जैसे बिहार-छत्तीसगढ़ फोकस या तुलनात्मक विश्लेषण?
नई दिल्ली /
भारतीय जनता पार्टी को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार इकाई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन को निर्विरोध रूप से बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। वह कल, 20 जनवरी को सुबह 11:30 बजे पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से पदभार संभालेंगे।
इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित पार्टी के शीर्ष नेता उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन का चयन पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान हुआ, जो बीजेपी की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रतीक है।
निर्विरोध चुनाव की पूरी प्रक्रिया
पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने प्रेस बयान जारी कर पूरी प्रक्रिया का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि चुनाव तब शुरू हुआ जब 36 प्रदेश इकाइयों में से 30 प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका था, जो संविधान की 50त्न अनिवार्य शर्त से कहीं अधिक था।
- 16 जनवरी 2026:चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और मतदाता सूची प्रकाशन।
- 19 जनवरी 2026 (आज):दोपहर 2 से 4 बजे के बीच नामांकन प्रक्रिया।
- नामांकन विवरण:नितिन नबीन के समर्थन में 37 नामांकन सेट दाखिल, सभी जांच में वैध पाए गए।
डॉ. लक्ष्मण ने कहा, "यह निर्विरोध चुनाव पार्टी की एकजुटता और मजबूत नेतृत्व की पुष्टि करता है।"
नितिन नबीन का राजनीतिक सफर
नितिन नबीन (जन्म: 1985, बिहार) बीजेपी के उभरते युवा चेहरों में शुमार हैं। वे बिहार प्रदेश अध्यक्ष (2023-2025) रह चुके हैं और पार्टी की युवा मोर्चा से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। नबीन को संगठन विस्तार और ग्रामीण स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में बिहार में बीजेपी ने 2025 विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका चयन पार्टी को युवा और क्षेत्रीय नेतृत्व प्रदान करेगा, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के रूप में चुने गए हैं, जिन्होंने अपना इस्तीफ ा दिसंबर 2025 में सौंपा था। यह बदलाव बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो पूर्वोत्तर और हिंदी पट्टी में मजबूती पर केंद्रित है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
