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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में NEET और छात्र आंदोलनों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध बुधवार को उस समय और तीखा हो गया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को 24 घंटे की खुली चर्चा की पेशकश कर दी। शाह ने कहा कि यदि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष को लिखित में चर्चा के लिए देता है, तो वह बुधवार दोपहर 3 बजे से गुरुवार दोपहर 3 बजे तक सदन में मौजूद रहकर हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
“संसद में लगातार आ रहा हूं, चैंबर में बैठता हूं”
अमित शाह ने विपक्ष की उन टिप्पणियों पर भी पलटवार किया, जिनमें उनके संसद में मौजूद नहीं रहने को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। गृह मंत्री के मुताबिक, मानसून सत्र शुरू होने के बाद से वह नियमित रूप से संसद आ रहे हैं और अपने चैंबर में बैठ रहे हैं। उनका तर्क था कि विपक्ष के लगातार हंगामे और सदन की कार्यवाही बाधित होने के कारण सदन के भीतर जाकर चर्चा का अवसर नहीं मिल रहा था।
शाह ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह चर्चा के लिए तैयार है तो सरकार भी पीछे नहीं हटेगी और वह स्वयं लंबे समय तक सदन में रहकर सवालों का जवाब देंगे।
NEET और छात्र आंदोलन पर 24 घंटे की बहस का प्रस्ताव
गृह मंत्री की पेशकश का केंद्र NEET से जुड़े विवाद और छात्र आंदोलनों पर हुई पुलिस कार्रवाई है। शाह ने कहा कि विपक्ष लिखित रूप से चर्चा की मांग करे तो वह 24 घंटे तक सदन में मौजूद रहकर मुद्दे पर जवाब देने को तैयार हैं।
इस प्रस्ताव को सरकार की ओर से संसद में जारी गतिरोध समाप्त करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं विपक्ष की मांग है कि छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई और कथित बल प्रयोग पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब दिया जाए।
राहुल गांधी का पलटवार—“हमें लेक्चर नहीं, जवाब चाहिए”
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमित शाह की पेशकश को स्वीकार नहीं किया। राहुल गांधी का कहना है कि विपक्ष गृह मंत्री का उपदेश सुनने के लिए चर्चा नहीं चाहता, बल्कि वह यह जानना चाहता है कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी।
छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग का मुद्दा राहुल गांधी पहले भी संसद के बाहर और सार्वजनिक बयानों में उठा चुके हैं तथा उन्होंने अमित शाह की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।
केरल का नाम ‘केरलम’ करने वाला विधेयक भी चर्चा में
इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह द्वारा Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 और National Co-operative Development Corporation (Amendment) Bill, 2026 को आगे बढ़ाए जाने का कार्यक्रम भी संसद की कार्यवाही में रहा। केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाले विधेयक को लोकसभा ने पारित कर दिया है।
संसद में टकराव बरकरार
एक ओर सरकार चर्चा के लिए तैयार होने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री से जवाबदेही की मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में अमित शाह की 24 घंटे की चर्चा की पेशकश और राहुल गांधी का उसे ठुकराना संसद के मानसून सत्र में सरकार-विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव को और स्पष्ट करता है।
अब निगाह इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष इस प्रस्ताव के जरिए संसद की कार्यवाही को आगे बढ़ाने पर सहमत होते हैं या NEET और छात्र आंदोलन का मुद्दा आगे भी सदन में गतिरोध का कारण बना रहता है।
*केन्द्रीय मंत्री ने डीपीआर तैयार करने अधिकारियों को दिए निर्देश*
*बायपास बनने से यातायात सुगम होने के साथ दुर्घटनाओं पर लगेगा अंकुश*
*अंतर्राज्यीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा*
रायपुर / छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास मंत्री एवं रामानुजगंज विधायक श्री रामविचार नेताम ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी से सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मंत्री श्री गडकरी से इस दौरान बलरामपुर एवं रामानुजगंज शहरों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-343 पर बायपास मार्गों की स्वीकृति का आग्रह किया। श्री नेताम ने दोनों शहरों में बढ़ते यातायात दबाव, दुर्घटनाओं की आशंका तथा अंतर्राज्यीय वाणिज्यिक गतिविधियों को देखते हुए 4-लेन बायपास निर्माण को अत्यंत आवश्यक बताया। केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने दोनों मांगों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त करते हुए शीघ्र स्वीकृति की दिशा में कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने मंत्री श्री नेताम की मांग पर शीघ्र डीपीआर तैयार करने अधिकारियों को निर्देशित किया।
*छत्तीसगढ़ को झारखंड से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय मार्ग*
मंत्री श्री नेताम ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि अम्बिकापुर-रामानुजगंज-गढ़वा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-343 छत्तीसगढ़ को झारखंड से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय मार्ग है। इस मार्ग से यात्री बसों, छोटे-बड़े व्यावसायिक वाहनों, भारी मालवाहकों तथा आम नागरिकों का बड़ी संख्या में आवागमन होता है। प्रशासनिक एवं विशिष्टजनों का आवागमन भी इसी मार्ग से होता है। मंत्री श्री नेताम ने बताया कि बलरामपुर जिला मुख्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग-343 के शहरी हिस्से में स्थित है। शहर के दोनों ओर घनी व्यावसायिक एवं आवासीय बसाहट होने के कारण छोटे वाहनों से लेकर भारी मालवाहकों तक का आवागमन शहर के भीतर से होता है। इससे आए दिन यातायात जाम की स्थिति निर्मित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
*नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की मिलेगी सुविधा*
केंद्रीय मंत्री से बलरामपुर शहरी क्षेत्र के लिए लगभग ’’10 किलोमीटर लंबाई के 4-लेन बायपास’’ को स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। प्रस्तावित बायपास बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा, यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसी प्रकार रामानुजगंज शहर के लिए लगभग ’’8 किलोमीटर लंबाई के 4-लेन बायपास’’ की मांग भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी। मंत्री श्री नेताम ने बताया कि रामानुजगंज अंतर्राज्यीय आवागमन का महत्वपूर्ण केंद्र है। शहर के भीतर ही स्कूली बच्चों, स्थानीय नागरिकों, शासकीय एवं निजी वाहनों के साथ-साथ भारी व्यावसायिक एवं मालवाहक वाहनों का आवागमन होने से यातायात दबाव लगातार बढ़ रहा है।
*छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच अंतर्राज्यीय व्यापार एवं परिवहन को मिलेगी गति*
मंत्री श्री नेताम ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण एवं यातायात में संभावित वृद्धि के साथ आने वाले समय में शहरी क्षेत्र में यातायात संबंधी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। ऐसे में समय रहते बायपास का निर्माण शहर की यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और नगरीय विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि बलरामपुर और रामानुजगंज में बायपास मार्गों का निर्माण केवल यातायात सुगमता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच अंतर्राज्यीय व्यापार एवं परिवहन को गति मिलेगी। भारी वाहनों को शहरों के बाहर से सुगम मार्ग उपलब्ध होने से परिवहन समय और यातायात दबाव में कमी आएगी। इसके साथ ही दोनों शहरों में व्यवस्थित नगरीय विकास, व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार और राजस्व वृद्धि की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
मंत्री श्री नेताम ने केंद्रीय मंत्री को यह भी अवगत कराया कि एनएच-343 के कॉरिडोर योजना के अंतर्गत निर्माण कार्य के लिए क्रमशः 397.44 करोड़ रुपये और 199.05 करोड़ रुपये की स्वीकृति पूर्व में प्रदान की जा चुकी है तथा संबंधित निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने इसी क्रम में बलरामपुर एवं रामानुजगंज के शहरी हिस्सों में बायपास निर्माण को भी प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
*बायपास निर्माण से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सड़क कनेक्टिविटी होगी मजबूत*
केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने दोनों बायपास प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख व्यक्त करते हुए शीघ्र स्वीकृति की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। मंत्री श्री नेताम ने केंद्रीय मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बायपास निर्माण से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ क्षेत्र के आर्थिक एवं नगरीय विकास को नई गति मिलेगी।
श्रीनगर/रायपुर । जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम (किलम) गांव में 31 जुलाई की देर शाम हुए कायराना आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की लक्षित हत्या कर दी गई। मृतकों की पहचान 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय भूपेंद्र कुमार के रूप में हुई है। दोनों ईंट-भट्ठे पर काम करते थे और बेहतर रोज़गार की तलाश में जम्मू-कश्मीर गए थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आतंकवादी देर शाम ईंट-भट्ठे पर पहुंचे और वहां मौजूद मजदूरों से उनकी पहचान, नाम तथा अन्य व्यक्तिगत जानकारी पूछी। इसके बाद उन्होंने दोनों मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल दीपक रात्रे ने शुक्रवार रात अस्पताल में दम तोड़ दिया, जबकि भूपेंद्र कुमार को पहले अनंतनाग और फिर श्रीनगर रेफर किया गया, जहां शनिवार सुबह उपचार के दौरान उनकी भी मृत्यु हो गई।
शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुलगाम में ही दोनों मजदूरों का अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर आतंकियों की तलाश में व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
प्रारंभिक जांच में सुरक्षा एजेंसियों को इस हमले के पीछे सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क की भूमिका होने का संदेह है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध आतंकियों की भूमिका की जांच कर रही हैं। हालांकि, जांच पूरी होने तक किसी भी संगठन या व्यक्ति की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जबकि क्राइम ब्रांच, फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) और सेना की टीमें साक्ष्य जुटाने में लगी हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष से दोनों मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त कुलगाम जिला प्रशासन की ओर से 6-6 लाख रुपये की तत्काल राहत भी प्रदान की जा रही है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुरक्षा एजेंसियों को दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील इलाकों और ईंट-भट्ठों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों से सतर्क रहने तथा अंधेरा होने के बाद सुरक्षित स्थानों पर ही रहने की अपील की है।
भोगपुरम/नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम में 'अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे' का लोकार्पण किया। लगभग ₹4,727 करोड़ की लागत से विकसित यह आंध्र प्रदेश का पहला ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इस अत्याधुनिक हवाई अड्डे का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू के सम्मान में रखा गया है।
करीब 2,700 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित इस एयरपोर्ट की शुरुआती वार्षिक यात्री क्षमता 60 लाख (6 मिलियन) यात्रियों की है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 4 करोड़ यात्रियों तक किया जा सकेगा। एयरपोर्ट में 3,800 मीटर लंबा कोड-4E रनवे बनाया गया है, जो बोइंग-777, एयरबस ए330 और अन्य बड़े वाइड-बॉडी विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है। यहां से नियमित व्यावसायिक उड़ानों का संचालन 17 अगस्त 2026 से शुरू होगा।
यह नया एयरपोर्ट विशाखापट्टनम के मौजूदा नेवल एयरबेस आधारित हवाई अड्डे पर निर्भरता कम करेगा और उत्तर आंध्र क्षेत्र को आधुनिक हवाई संपर्क उपलब्ध कराएगा। इससे विशाखापट्टनम, विजयनगरम और श्रीकाकुलम जिलों के लोगों को बेहतर हवाई सुविधाएं मिलेंगी, वहीं देश और विदेश के प्रमुख शहरों से सीधी कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना से उत्तर आंध्र में पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स, समुद्री खाद्य निर्यात, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक निवेश को नई गति मिलेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। राज्य सरकार का मानना है कि यह एयरपोर्ट क्षेत्रीय आर्थिक विकास और वैश्विक निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नारायणपुर के मांझी-चालकी और 'बस्तर पंडुम' विजेताओं ने राष्ट्रपति से की सौजन्य भेंट
रायपुर / बस्तर के घने जंगलों, अनूठी सामाजिक व्यवस्था और समृद्ध जनजातीय विरासत की गूंज अब देश के सर्वोच्च मंच राष्ट्रपति भवन तक जा पहुंची है। नारायणपुर जिले के पारंपरिक मांझी-चालकी और 'बस्तर पंडुम' प्रतियोगिता के विजेताओं का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल हाल ही में नई दिल्ली पहुंचा, जहां उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति से सौजन्य मुलाकात की। इस आत्मीय भेंट के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को बस्तर की जीवंत परंपराओं, लोक कलाओं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराया।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने 30 जुलाई 2026 में राष्ट्रपति भवन का दौरा किया, जिसमें बस्तर पंडुम के विजेता, मांझी-चालकी और पद्मश्री सम्मानित कलाकार शामिल थे।
इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 27 जुलाई को नारायणपुर से हुई थी, जब नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल ने हरी झंडी दिखाकर इस दल को दिल्ली के लिए रवाना किया था। पूरे जिले के लिए यह एक अत्यंत गर्व का क्षण था। इसके बाद 30 जुलाई को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में बस्तर की जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करने का यह सुनहरा अवसर आया।
मुलाकात के दौरान बस्तर की कला और परंपरा के प्रमुख ध्वजवाहकों ने अपनी माटी का प्रतिनिधित्व किया। इनमें 'बस्तर पंडुम' के जनजातीय आभूषण विधा की विजेता मुंगड़ी कोर्राम और सुदनी दुग्गा शामिल थीं, जिन्होंने पारंपरिक आभूषणों के सौंदर्य और उनके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी साझा की। वहीं, बस्तर की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था का नेतृत्व करते हुए एड़का परगना के मांझी राजाराम, करंगाल परगना के मांझी सुधवाराम करंगा, गोटाली परगना के मांझी मंगतू राम ध्रुव, नूरदेश परगना के मांझी गुड्डू पोटाई तथा करंगाल परगना के चालकी सोमारू राम ने बस्तर की पारंपरिक सामाजिक संरचना और रीति-रिवाजों का परिचय दिया।
प्रतिनिधिमंडल की इस मुलाकात से न केवल नारायणपुर और समूचा बस्तर संभाग गौरवान्वित महसूस कर रहा है, बल्कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को एक नई पहचान मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मंचों से जनजातीय कला, परंपराओं और लोक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिलेगा।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की पहल पर छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच अहम बैठक, साझा जल प्रबंधन और दीर्घकालिक समझौते पर जोर
रायपुर । वर्षों से लंबित महानदी जल बंटवारे के मुद्दे को सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा देने के उद्देश्य से गुरुवार को नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा कि महानदी किसी विवाद का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की साझा समृद्धि का आधार है। उन्होंने कहा कि महानदी का जल दोनों राज्यों के किसानों, पेयजल व्यवस्था, उद्योगों, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। इसलिए इस विषय का समाधान टकराव नहीं, बल्कि सहयोग और आपसी विश्वास के आधार पर होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस बैठक को विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच बने संवाद और सहयोग के सकारात्मक माहौल से स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सिंचाई, पेयजल और हीराकुंड परियोजना की आवश्यकताओं का पूरा सम्मान करता है। उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी क्षेत्रों, सूखा प्रभावित इलाकों और भविष्य की विकास जरूरतों को भी समान संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के हित एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं।
मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञों द्वारा किए गए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर भविष्य उन्मुख जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाए। विशेष रूप से कम वर्षा वाले वर्षों के लिए साझा जल प्रबंधन प्रणाली तैयार करने और जल उपलब्धता, उपयोग तथा भविष्य की आवश्यकताओं की नियमित समीक्षा के लिए स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित करने पर उन्होंने जोर दिया।
उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर अधिकांश विषयों का समाधान आपसी समन्वय से किया जाए तथा केवल नीतिगत मामलों को ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर लाया जाए। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय जल आयोग से अनुरोध किया कि वे निष्पक्ष तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक सहमति आधारित समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद की भावना ने वर्षों पुराने जटिल मुद्दों के समाधान के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दोनों राज्य मिलकर ऐसा समाधान विकसित करेंगे, जिससे किसानों, नागरिकों, उद्योगों, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित एवं समृद्ध हो सके।
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं और 209 सदस्यीय जनजातीय प्रतिनिधिमंडल का ऐतिहासिक अभिनंदन, राष्ट्रपति ने जताई बस्तर दशहरा में शामिल होने की इच्छा
नई दिल्ली / रायपुर । भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च संवैधानिक परिसर राष्ट्रपति भवन में गुरुवार को ऐसा ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जिसने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व व्यवस्था को राष्ट्रीय गौरव के शिखर पर स्थापित कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकारों, पारंपरिक मांझी-चालकी नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में विशेष सम्मान किया गया।इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। समारोह का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका स्वागत किया। उनकी इस आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावुक कर दिया और यह दृश्य राष्ट्रपति भवन के इतिहास में एक यादगार अध्याय बन गया।
राष्ट्रपति बोलीं— बस्तर अब शांति, विकास और समृद्धि की नई पहचान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, मांझी-चालकी व्यवस्था और बस्तर पंडुम के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है तथा यहां शिक्षा, सड़क, बिजली और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि मांझी-चालकी व्यवस्था सामाजिक समरसता, सामुदायिक नेतृत्व और सांस्कृतिक संरक्षण की मजबूत आधारशिला है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि "मांझी मेरे परिवार का हिस्सा हैं, मेरे पिता भी मांझी थे," जिससे उनका जनजातीय समाज से आत्मीय जुड़ाव झलकता है।
बस्तर दशहरा में आने की जताई इच्छा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराएं और भगवान जगन्नाथ से जुड़ी इसकी सांस्कृतिक विरासत उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करती है।
अमित शाह बोले— पहली बार राष्ट्रपति भवन में देखा बस्तर का ऐसा सांस्कृतिक वैभव
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक बार राष्ट्रपति भवन आए हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने यहां बस्तर की पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री: यह पूरे छत्तीसगढ़ के सम्मान का क्षण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल का सम्मान पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है और स्थानीय कलाकारों व लोक परंपराओं को नया मंच प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की कलाकृति की भेंट
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। यह कलाकृति प्रेम, त्याग, समर्पण और जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। बस्तर की लोकमान्यता के अनुसार झिटकू और मिटकी ने अकाल के समय अपने त्याग और प्रेम से अमिट मिसाल कायम की थी और आज भी उन्हें श्रद्धापूर्वक 'खोड़िया राजा' और 'गप्पा देई' के रूप में पूजा जाता है।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी प्राप्त की। यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता, जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था और लोककला को राष्ट्रीय मंच पर मिली अभूतपूर्व प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया।
नई दिल्ली /
लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार को काफी हंगामेदार रही। देशभर में छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध से शुरू हुआ सदन का माहौल बाद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर केंद्रित हो गया। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बावजूद अंतत: विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए सहमति बनी और सरकार ने चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे करने का ऐलान किया।
शुरुआत में विपक्ष का हंगामा, दोपहर तक स्थगित रही कार्यवाही
संसद के मानसून सत्र में मंगलवार सुबह जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से जवाब मांगा और छात्रों के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की।
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के विरोध और लगातार व्यवधान को देखते हुए कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया।
गतिरोध खत्म होने के बाद शुरू हुई एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा
दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनी और महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा प्रारंभ हुई।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अनुचित साधनों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई के लिए कानून को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
विपक्ष ने पीएम और गृहमंत्री की अनुपस्थिति का उठाया मुद्दा
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए।
विपक्ष ने छात्र आंदोलनों, परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की। प्रियंका गांधी ने चर्चा के दौरान सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और छात्रों के साथ न्याय की मांग की।
विधेयक पर चर्चा के लिए बढ़ाया गया समय
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में घोषणा की कि विपक्ष की मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे किया जाएगा, ताकि सभी दलों के सांसद अपने विचार रख सकें। इस विधेयक पर सदन में कुल 91 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, जिन पर चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।
प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर सत्ता पक्ष का विरोध
कार्यवाही के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर की गई टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बाद में संबंधित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।
पेपर लीक पर सख्त कानून बनाने की दिशा में बड़ा कदम
लोकसभा में पेश यह संशोधन विधेयक प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बडिय़ों, पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का दावा है कि इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और लाखों अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा होगी।
वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कदम उठाना भी जरूरी है। लोकसभा में मंगलवार की कार्यवाही ने साफ कर दिया कि परीक्षा सुधार और पेपर लीक का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।
राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से मंजूर किया इस्तीफा, छात्रों के नाम संदेश में बोले धर्मेंद्र प्रधान—'युवाओं की आकांक्षाओं का हमेशा रहेगा सम्मान'
नई दिल्ली। केंद्र सरकार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके वर्तमान मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दे दी गई है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी संभालेंगे। हाल के दिनों में शिक्षा मंत्रालय NEET-UG परीक्षा, पेपर लीक के आरोपों और देशभर में छात्रों के आंदोलन को लेकर लगातार चर्चा में रहा है। ऐसे समय में सरकार ने मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी को सौंपते हुए नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है।
इस्तीफे के बाद क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान
अपने इस्तीफे के साथ जारी संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG के परिणाम संतोषजनक रहे और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसके बावजूद कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया।
प्रधान ने कहा कि उन्हें भारतीय लोकतंत्र की शक्ति पर पूरा विश्वास है और देश के युवाओं के सपनों, आकांक्षाओं और उम्मीदों का उन्होंने हमेशा सम्मान किया है। उनके अनुसार, युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भागीदार हैं।
NEET विवाद से शुरू हुआ देशव्यापी आंदोलन
देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हालिया आंदोलन की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद हुई। परीक्षा समाप्त होते ही पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद हजारों छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए। देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के छात्र आंदोलन में बदल गया।
इसी बीच 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी भी विवाद का विषय बन गई। उन्होंने कुछ लोगों के संदर्भ में 'कॉकरोच' शब्द का प्रयोग किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी छात्रों या युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री के आधार पर पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में थी।
अब सबकी नजर शिक्षा मंत्रालय की नई दिशा पर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब शिक्षा मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास बहाल करना, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और NEET विवाद से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान निकालना होगी। केंद्र सरकार के इस निर्णय को शिक्षा क्षेत्र में नई प्रशासनिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
