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March 28, 2026
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भारत

भारत (985)

दक्षिण गोवा | विशेष रिपोर्ट

गोवा के दक्षिण जिले के कुर्चोरेम से सामने आया एक सनसनीखेज मामला अब पूरे प्रदेश में आक्रोश और सियासी हलचल का कारण बन गया है। भाजपा पार्षद सुशांत नाइक के 20 वर्षीय बेटे सोहम नाइक पर 25 से 30 नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण, अश्लील वीडियो बनाने और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

तीन साल तक चलता रहा ‘साइलेंट क्राइम’

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी पिछले तीन वर्षों से नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर उनका शोषण करता रहा। आरोप है कि वह उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था, जिससे पीड़िताएं लंबे समय तक डर के साए में चुप रहीं।

पार्टी में खुला ‘काला राज’

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी ने कथित तौर पर एक सामाजिक समारोह/पार्टी में अपने दोस्तों के बीच इन अश्लील वीडियो को दिखाया और अपनी हरकतों का बखान किया।

यहीं से मामला बाहर निकला और देखते ही देखते स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।

जनता के दबाव में पुलिस हरकत में

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस स्टेशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने 23 मार्च 2026 को सोहम नाइक को हिरासत में लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

कानूनी शिकंजा: POCSO से IT एक्ट तक

आरोपी के खिलाफ दर्ज की गई FIR में शामिल हैं:

POCSO एक्ट (नाबालिगों के यौन अपराध)

गोवा चिल्ड्रन्स एक्ट

आईटी एक्ट (डिजिटल अपराध और वीडियो रिकॉर्डिंग)

अब तक कम से कम तीन FIR दर्ज की जा चुकी हैं।

कोर्ट ने बढ़ाई हिरासत

27 मार्च 2026 को पणजी चिल्ड्रन्स कोर्ट ने आरोपी की पुलिस रिमांड 4 दिन और बढ़ा दी, ताकि पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सके।

सियासी संग्राम तेज

इस घटना के सामने आते ही विपक्ष—खासतौर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी—ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

विपक्ष का आरोप है कि ऐसे मामलों में प्रभावशाली परिवारों के कारण अक्सर कार्रवाई में देरी होती है, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

नासिक/मुंबई | विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया स्वयंभू ज्योतिषी अशोक कुमार खरात उर्फ “कैप्टन खरात” का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता, अंधविश्वास और संगठित शोषण के खतरनाक गठजोड़ की तस्वीर पेश कर रहा है। तंत्र-मंत्र और वशीकरण के नाम पर महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाला यह कथित बाबा अब गंभीर आरोपों और राजनीतिक विवादों के केंद्र में है।

58 वीडियो और ‘आस्था’ के नाम पर शोषण का जाल

पुलिस जांच में बरामद एक पेन ड्राइव ने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया है। इसमें कथित तौर पर करीब 58 महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो पाए गए हैं। आरोप है कि खरात महिलाओं को तंत्र-मंत्र, वशीकरण और ‘अभिमंत्रित वस्तुओं’ का लालच देकर न सिर्फ आर्थिक रूप से ठगता था, बल्कि उनका यौन शोषण कर उन्हें ब्लैकमेल भी करता था।

साधारण पृष्ठभूमि से ‘करोड़ों के बाबा’ तक

जांच में सामने आया है कि खरात का असली नाम लक्ष्मण एकनाथ खरात है, जो नासिक के सिन्नर का निवासी है। बताया जाता है कि वह पढ़ाई में असफल रहा, लेकिन बाद में नाम बदलकर ‘अशोक कुमार’ रखा और खुद को न्यूमरोलॉजिस्ट और तांत्रिक बताकर एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर लिया।

आज उसकी संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, और वह 150 से अधिक विदेश यात्राएं कर चुका है—जो उसके ‘आध्यात्मिक कारोबार’ की असलियत पर सवाल खड़े करती हैं।

कानूनी शिकंजा: 8 FIR, गंभीर धाराएं

अब तक खरात के खिलाफ 8 अलग-अलग FIR दर्ज हो चुकी हैं। इन मामलों में शामिल हैं:

बलात्कार और यौन शोषण

ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी

नशीला पदार्थ देकर अपराध

जबरन गर्भपात

अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत अपराध

फिलहाल वह पुलिस रिमांड में है और उससे लगातार पूछताछ जारी है।

SIT जांच और ‘नरबलि’ एंगल

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने IPS अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में SIT का गठन किया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच एजेंसियां अब नरबलि और अघोरी प्रथाओं के एंगल की भी जांच कर रही हैं, क्योंकि छापेमारी के दौरान हथियार और संदिग्ध सामग्री मिली है।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

पुलिस की कार्रवाई में खरात के विभिन्न ठिकानों से बरामद हुआ:

58 आपत्तिजनक वीडियो

पिस्तौल और कारतूस

₹6.5 लाख नकद

करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज

राजनीतिक कनेक्शन: तस्वीरें और आरोपों की राजनीति

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। कई नेताओं के साथ खरात की तस्वीरें और कथित संबंध सामने आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

रूपाली चाकणकर (NCP): उनकी संस्था से जुड़ाव के आरोपों के बाद उन्होंने महिला आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

एकनाथ शिंदे: उनके साथ मंदिर दौरे की तस्वीरें वायरल।

दीपक केसरकर और सुनील तटकरे: संपर्क में होने के आरोप।

अमित शाह: विपक्ष ने पुरानी तस्वीरों का दावा किया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष का हमला: “सत्ता की छत्रछाया में अपराध?”

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि खरात ने अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक अपने अपराधों को छिपाए रखा। वहीं, सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रहा है।

पुलिस की अपील: सामने आएं पीड़ित

पुलिस प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि यदि कोई अन्य महिला भी इस नेटवर्क का शिकार हुई है, तो वह आगे आए और शिकायत दर्ज कराए।

निष्कर्ष: अंधविश्वास, सत्ता और शोषण का त्रिकोण

अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का आईना है जहां अंधविश्वास के सहारे अपराध फलते-फूलते हैं—और जब उसमें सत्ता की परछाईं जुड़ जाए, तो सच सामने आने में वर्षों लग जाते हैं।

अब सवाल यही है—

क्या यह सिर्फ एक ‘बाबा’ का पतन है, या पूरे सिस्टम की पोल खुलने की शुरुआत?

नासिक/मुंबई | विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया स्वयंभू ज्योतिषी अशोक कुमार खरात उर्फ “कैप्टन खरात” का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता, अंधविश्वास और संगठित शोषण के खतरनाक गठजोड़ की तस्वीर पेश कर रहा है। तंत्र-मंत्र और वशीकरण के नाम पर महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाला यह कथित बाबा अब गंभीर आरोपों और राजनीतिक विवादों के केंद्र में है।

58 वीडियो और ‘आस्था’ के नाम पर शोषण का जाल

पुलिस जांच में बरामद एक पेन ड्राइव ने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया है। इसमें कथित तौर पर करीब 58 महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो पाए गए हैं। आरोप है कि खरात महिलाओं को तंत्र-मंत्र, वशीकरण और ‘अभिमंत्रित वस्तुओं’ का लालच देकर न सिर्फ आर्थिक रूप से ठगता था, बल्कि उनका यौन शोषण कर उन्हें ब्लैकमेल भी करता था।

साधारण पृष्ठभूमि से ‘करोड़ों के बाबा’ तक

जांच में सामने आया है कि खरात का असली नाम लक्ष्मण एकनाथ खरात है, जो नासिक के सिन्नर का निवासी है। बताया जाता है कि वह पढ़ाई में असफल रहा, लेकिन बाद में नाम बदलकर ‘अशोक कुमार’ रखा और खुद को न्यूमरोलॉजिस्ट और तांत्रिक बताकर एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर लिया।

आज उसकी संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, और वह 150 से अधिक विदेश यात्राएं कर चुका है—जो उसके ‘आध्यात्मिक कारोबार’ की असलियत पर सवाल खड़े करती हैं।

कानूनी शिकंजा: 8 FIR, गंभीर धाराएं

अब तक खरात के खिलाफ 8 अलग-अलग FIR दर्ज हो चुकी हैं। इन मामलों में शामिल हैं:

बलात्कार और यौन शोषण

ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी

नशीला पदार्थ देकर अपराध

जबरन गर्भपात

अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत अपराध

फिलहाल वह पुलिस रिमांड में है और उससे लगातार पूछताछ जारी है।

SIT जांच और ‘नरबलि’ एंगल

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने IPS अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में SIT का गठन किया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच एजेंसियां अब नरबलि और अघोरी प्रथाओं के एंगल की भी जांच कर रही हैं, क्योंकि छापेमारी के दौरान हथियार और संदिग्ध सामग्री मिली है।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

पुलिस की कार्रवाई में खरात के विभिन्न ठिकानों से बरामद हुआ:

58 आपत्तिजनक वीडियो

पिस्तौल और कारतूस

₹6.5 लाख नकद

करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज

राजनीतिक कनेक्शन: तस्वीरें और आरोपों की राजनीति

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। कई नेताओं के साथ खरात की तस्वीरें और कथित संबंध सामने आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

रूपाली चाकणकर (NCP): उनकी संस्था से जुड़ाव के आरोपों के बाद उन्होंने महिला आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

एकनाथ शिंदे: उनके साथ मंदिर दौरे की तस्वीरें वायरल।

दीपक केसरकर और सुनील तटकरे: संपर्क में होने के आरोप।

अमित शाह: विपक्ष ने पुरानी तस्वीरों का दावा किया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष का हमला: “सत्ता की छत्रछाया में अपराध?”

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि खरात ने अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक अपने अपराधों को छिपाए रखा। वहीं, सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रहा है।

पुलिस की अपील: सामने आएं पीड़ित

पुलिस प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि यदि कोई अन्य महिला भी इस नेटवर्क का शिकार हुई है, तो वह आगे आए और शिकायत दर्ज कराए।

निष्कर्ष: अंधविश्वास, सत्ता और शोषण का त्रिकोण

अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का आईना है जहां अंधविश्वास के सहारे अपराध फलते-फूलते हैं—और जब उसमें सत्ता की परछाईं जुड़ जाए, तो सच सामने आने में वर्षों लग जाते हैं।

अब सवाल यही है—

क्या यह सिर्फ एक ‘बाबा’ का पतन है, या पूरे सिस्टम की पोल खुलने की शुरुआत?

महेश्वर/खरगोन (मध्यप्रदेश)।

नर्मदा नदी के पावन तट पर बसा ऐतिहासिक नगर महेश्वर आज न केवल अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए महेश्वरी साड़ियों और पारंपरिक हथकरघा उद्योग के लिए भी जाना जाता है। 18वीं सदी में देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा संरक्षित और प्रोत्साहित यह कला आज भी उसी गौरव के साथ जीवित है और हजारों परिवारों की आजीविका का आधार बनी हुई है।

हाल ही में छत्तीसगढ़ के मीडिया दल के सदस्यों ने महेश्वर स्थित हथकरघा संस्थानों का भ्रमण किया, जहां उन्होंने न केवल बुनाई की बारीक तकनीकों को करीब से देखा, बल्कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को मिल रहे लाभों की भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

हर घर में करघा, हर हाथ में हुनर

करीब 14-15 हजार की आबादी वाले महेश्वर में हथकरघा उद्योग जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हर दूसरे घर में करघा संचालित होता है, जिससे यह शहर पूरी तरह “हैंडलूम हब” के रूप में विकसित हो चुका है। विशेष बात यह है कि यहां लगभग 4000 बाहरी कारीगर, विशेषकर लखनऊ क्षेत्र से आए बुनकर, इस उद्योग से जुड़े हुए हैं।

अहिल्याबाई की विरासत, आज की पहचान

इतिहासकार बताते हैं कि अहिल्याबाई होल्कर ने न केवल मंदिरों और घाटों का निर्माण कराया, बल्कि बुनकरों को बसाकर इस कला को संरक्षित किया। उनके प्रयासों से महेश्वर बुनाई का प्रमुख केंद्र बना, जिसकी पहचान आज भी बरकरार है।

महेश्वरी साड़ियों की खासियत

महेश्वर में बनने वाली साड़ियां अपनी विशिष्टता के कारण देश-विदेश में अत्यधिक लोकप्रिय हैं—

पिटलूम तकनीक: पारंपरिक जमीन में गड़े करघों पर महीन बुनाई

डिजाइन: ज्यामितीय पैटर्न, धारियां और चेक्स, जिनमें ज़री का आकर्षक उपयोग

धागा: कॉटन और सिल्क का मिश्रण, साथ में सोने-चांदी की ज़री

हल्कापन और शालीनता: ये साड़ियां पहनने में हल्की और बेहद आकर्षक होती हैं

महिलाओं के सशक्तिकरण का केंद्र

महेश्वर का हथकरघा उद्योग महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का भी प्रमुख माध्यम बन चुका है। बड़ी संख्या में महिलाएं घर बैठे इस कार्य से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिससे परिवार की आय में वृद्धि हो रही है और सामाजिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।

केंद्र सरकार की योजनाओं से मिला संबल

मीडिया दल को जानकारी दी गई कि केंद्र सरकार द्वारा हैंडलूम क्लस्टर डेवलपमेंट, कौशल प्रशिक्षण, मार्केटिंग सपोर्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं के चलते उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, बाजार तक पहुंच और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पर्यटन और संस्कृति का संगम

हथकरघा उद्योग के साथ-साथ महेश्वर अपने अहिल्या किला, नर्मदा घाट और प्राचीन मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां आने वाले पर्यटक न केवल ऐतिहासिक स्थलों का आनंद लेते हैं, बल्कि हथकरघा उद्योग को करीब से देखने का भी अवसर प्राप्त करते हैं।

वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर

आज महेश्वर की साड़ियां देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं। पारंपरिक कला और आधुनिक विपणन के मेल ने इस उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

निष्कर्षतः, महेश्वर का हथकरघा उद्योग केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और आत्मनिर्भरता का जीवंत उदाहरण है—जहां अहिल्याबाई की विरासत आज भी हर करघे की आवाज में गूंजती है।

  नई दिल्ली / एजेंसी / केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को व्यावसायिक एलपीजी (LPG) की उपलब्धता बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, 23 मार्च 2026 से अगली सूचना तक अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी आवंटित किया जाएगा, जिससे कुल आवंटन पूर्व-संकट स्तर के 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
इससे पूर्व, राज्यों को 20 प्रतिशत एलपीजी आवंटन के साथ-साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ सुधारों के आधार पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन प्रदान किया गया था। इस प्रकार अब कुल 50 प्रतिशत तक व्यावसायिक एलपीजी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर निम्न क्षेत्रों में किया जाएगा—
रेस्टोरेंट, ढाबे एवं होटल
औद्योगिक कैंटीन
खाद्य प्रसंस्करण एवं डेयरी इकाइयाँ
राज्य सरकारों/स्थानीय निकायों द्वारा संचालित सब्सिडी युक्त कैंटीन एवं सामुदायिक रसोई
प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलोग्राम एफटीएल सिलेंडर
इसके साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु सभी व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के साथ पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। संबंधित उपभोक्ताओं को अपने कार्यक्षेत्र, एलपीजी उपयोग और वार्षिक आवश्यकता का विवरण भी दर्ज कराना होगा।
मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि एलपीजी प्राप्त करने के लिए सभी व्यावसायिक/औद्योगिक उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) इकाई के साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के लिए आवेदन करना और आवश्यक तैयारियाँ पूरी करना अनिवार्य होगा।
इस निर्णय से खाद्य सेवा, उद्योग एवं सार्वजनिक वितरण से जुड़े क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही दीर्घकालिक रूप से पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा देने में भी सहायता मिलेगी।

नई दिल्ली ।
देश में सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सड़क सुरक्षा सम्मेलन 2026 का आयोजन दिल्ली के विवेकानंद स्कूल आनंद विहार में सफलतापूर्वक किया गया। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, शिक्षकों, छात्रों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता को व्यवहारिक कार्रवाई में बदलने का संकल्प लिया।

4,000 छात्र और 500 शिक्षक बने सड़क सुरक्षा के संदेशवाहक

सम्मेलन में कक्षा 3 से 12 तक के लगभग 4,000 छात्रों और करीब 100 स्कूलों के 500 से अधिक शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में पोस्टर निर्माण, नुक्कड़ नाटक, भूमिका-निर्वाह, पैनल चर्चा, वृत्तचित्र निर्माण और नवाचार प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को सड़क सुरक्षा राजदूत बनने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विधायक ओम प्रकाश शर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही।

राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में तेजी, सुरक्षा पर विशेष जोर

अपने संबोधन में मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में देश में राजमार्ग विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि भारत में आज लगभग 1.46 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित हो चुका है, जो विश्व के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क में से एक है।

उन्होंने यह भी कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिकता का प्रतीक है। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और मोबाइल फोन से ध्यान भटकाने से बचना जैसी आदतें हजारों जीवन बचा सकती हैं।

‘4E रणनीति’ से सड़क दुर्घटनाओं में कमी का लक्ष्य

सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा के लिए अपनाई गई 4E रणनीति

  • Engineering (इंजीनियरिंग)
  • Enforcement (प्रवर्तन)
  • Education (शिक्षा)
  • Emergency Care (आपातकालीन देखभाल)

—को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 के माध्यम से कड़े दंड प्रावधान लागू कर प्रवर्तन को मजबूत किया गया है।

दुर्घटना पीड़ितों के लिए राहत और आधुनिक सुविधाएं

मंत्री ने बताया कि दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए 1.5 लाख रुपये तक की नकद सहायता उपलब्ध कराने वाली योजनाएं लागू की गई हैं। इसके साथ ही—

  • आधुनिक एम्बुलेंस नेटवर्क
  • ट्रॉमा केयर सेंटर
  • ब्लैक स्पॉट सुधार कार्यक्रम
  • एआई-आधारित निगरानी और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम
  • फास्टैग आधारित टोलिंग

जैसी तकनीकों से सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।

स्कूल स्तर पर सुरक्षा संस्कृति विकसित करने पर जोर

सम्मेलन में स्कूल स्तर पर सड़क सुरक्षा क्लब स्थापित करने, गेट सुरक्षा गश्ती प्रणाली लागू करने और डेटा-आधारित निर्णयों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। छात्रों ने कार्यक्रम के अंत में यातायात नियमों का पालन करने और दूसरों को भी जागरूक करने का सामूहिक संकल्प लिया।

निष्कर्ष:
सड़क सुरक्षा सम्मेलन-2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सुरक्षित सड़कें केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य हैं। छात्रों और शिक्षकों की बड़ी भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि जागरूकता और जिम्मेदारी के माध्यम से ही “सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित भारत” का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

नई दिल्ली ।
पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रमों और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईंधन आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता पर्याप्त है तथा नागरिकों को घबराकर खरीदारी न करने की सलाह दी गई है।

ईंधन आपूर्ति सामान्य, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चालू

सरकार के अनुसार सभी तेल शोधन कारखाने पूरी क्षमता से कार्य कर रहे हैं और कच्चे तेल के पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है तथा एलपीजी का उत्पादन भी बढ़ाया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी की सूचना नहीं दी है।

पीएनजी को बढ़ावा, एलपीजी पर दबाव कम करने की तैयारी

सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे होटल, रेस्तरां और कैंटीन जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को पीएनजी कनेक्शन प्राथमिकता से दें। प्रमुख शहरों में वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं को एलपीजी के स्थान पर पीएनजी अपनाने का परामर्श दिया गया है।

राज्यों और मंत्रालयों को सीजीडी नेटवर्क के विस्तार और अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों और कैंटीनों को भी जहां संभव हो पीएनजी का उपयोग शुरू करने की सलाह दी गई है।

वाणिज्यिक एलपीजी का अतिरिक्त आवंटन

सरकार ने राज्यों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त वाणिज्यिक एलपीजी स्वीकृत की है, जिससे कुल आवंटन अब 50 प्रतिशत हो गया है। यह अतिरिक्त गैस मुख्य रूप से—

  • रेस्तरां, होटल और ढाबों
  • औद्योगिक एवं सामुदायिक कैंटीन
  • डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों
  • प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलो एफटीएल सिलेंडर
  • रियायती कैंटीन और सामुदायिक रसोई

जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती

सरकार ने एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कई राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू की है। अब तक 3,500 से अधिक छापे मारे जा चुके हैं और लगभग 1,400 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

इसके अलावा देशभर में 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियंत्रण कक्ष और जिला स्तरीय निगरानी समितियां स्थापित की गई हैं।

समुद्री संचालन सामान्य, बंदरगाहों पर कोई भीड़ नहीं

सरकार ने बताया कि भारत का समुद्री क्षेत्र सामान्य रूप से कार्य कर रहा है और किसी भी बंदरगाह पर भीड़भाड़ की सूचना नहीं है। पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज और 611 भारतीय नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है।

अब तक 534 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

विदेश मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। क्षेत्र में भारतीय दूतावास 24×7 हेल्पलाइन और सहायता सेवाएं संचालित कर रहे हैं।

इस बीच, नरेन्द्र मोदी ने मसूद पेज़ेशकियान तथा हामद बिन ईसा अल खलीफा से बातचीत कर क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया।

एक सकारात्मक घटनाक्रम में एमटी सेफसी विष्णु जहाज के 15 भारतीय चालक दल सदस्य इराक से सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं।

नागरिकों के लिए सलाह

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि—

  • घबराकर एलपीजी या ईंधन की बुकिंग न करें
  • केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें
  • वैकल्पिक ईंधन जैसे पीएनजी या इंडक्शन कुकटॉप अपनाएं
  • ऊर्जा संरक्षण के उपायों को अपनाएं

निष्कर्ष:
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के बावजूद भारत सरकार ने ईंधन आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और बहु-स्तरीय व्यवस्था की है। सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। ⚡?

नई दिल्ली ।
भारत सरकार के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन प्रकृति 2026 का शुभारंभ नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया। इस अवसर पर भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल का भी शुभारंभ किया गया, जो देश में कार्बन बाजार के संचालन और प्रशासन के लिए केंद्रीय डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगा।

यह सम्मेलन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा विद्युत मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के अंतर्गत हो रहा है, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

भारतीय कार्बन बाजार को मिला डिजिटल मंच

कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया गया भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल देश के कार्बन क्रेडिट तंत्र को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि जलवायु उत्तरदायित्व और आर्थिक विकास साथ-साथ चल सकते हैं

उन्होंने बताया कि भारत में कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के तहत अब तक 9 अधिसूचित पद्धतियां तैयार की जा चुकी हैं और बायोगैस, हाइड्रोजन तथा वानिकी क्षेत्रों में 40 से अधिक संस्थाएं पंजीकृत हैं। साथ ही 7 ऊर्जा-गहन क्षेत्रों की लगभग 490 संस्थाओं के लिए उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

‘तीन C’ से मजबूत होंगे कार्बन बाजार

कार्यक्रम में केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने कार्बन बाजारों को मजबूत बनाने के लिए तीन प्रमुख स्तंभ—विश्वसनीयता, पूंजी और सहयोग—पर जोर दिया।

  • विश्वसनीयता: डिजिटल एमआरवी (Monitoring, Reporting, Verification) के माध्यम से उत्सर्जन की सटीक निगरानी
  • पूंजी: नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन में बड़े निवेश
  • सहयोग: पेरिस समझौता के अनुच्छेद-6 के तहत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी

उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

किसानों और उद्योगों को मिलेगा लाभ

दो दिवसीय इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें—

  • डिजिटल एमआरवी प्रौद्योगिकियां
  • कार्बन सीमा नीतियां
  • भवन एवं शीतलन प्रणालियों का कार्बन बाजार में एकीकरण
  • किसानों और एमएसएमई को कार्बन वित्त से जोड़ना
  • स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के लिए वित्तपोषण

विशेषज्ञों का मानना है कि कार्बन बाजार न केवल उत्सर्जन कम करने में मदद करेंगे, बल्कि नवाचार, निवेश और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा करेंगे।

जलवायु नेतृत्व की ओर बढ़ता भारत

प्रकृति-2026 सम्मेलन भारत के हरित विकास और जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पारदर्शी और विश्वसनीय कार्बन बाजार ढांचा तैयार कर भारत न केवल अपने घरेलू हरित परिवर्तन को गति दे रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सतत विकास की दिशा में भी अग्रणी भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है। ??

निष्कर्ष:
‘प्रकृति-2026’ और भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल का शुभारंभ भारत के जलवायु लक्ष्यों को गति देने, उद्योगों को हरित दिशा में प्रेरित करने तथा किसानों और उद्यमियों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित करने की दिशा में एक निर्णायक पहल साबित हो रही है।

मुंबई ।
भारत के उभरते तकनीकी नवाचारों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट का उद्घाटन मुंबई स्थित आईआईटी बॉम्बे परिसर के एस्पायर–आईआईटी बॉम्बे रिसर्च पार्क फाउंडेशन में किया गया। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन देश के सर्वश्रेष्ठ डीप-टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की तैयारी का अहम चरण माना जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन तथा आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

3,000 आवेदनों में से 137 स्टार्टअप्स का चयन

देशभर से प्राप्त 3,000 से अधिक स्टार्टअप आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद 13 प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में 137 उत्कृष्ट डीप-टेक स्टार्टअप्स का चयन किया गया है। इनमें एडवांस्ड कंप्यूटिंग, हेल्थकेयर एवं मेडटेक, स्पेस एवं डिफेंस, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, स्मार्ट सिटीज, एग्री-फूड टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और इंडस्ट्री 4.0 जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

उद्घाटन के बाद 70 से अधिक स्टार्टअप्स ने पिच सत्रों में अपने नवाचार प्रस्तुत किए, वहीं निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने रिवर्स पिच के माध्यम से तकनीकी आवश्यकताओं और निवेश प्राथमिकताओं पर चर्चा की।

भारत का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम

अपने संबोधन में प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां लगभग 2 लाख स्टार्टअप और करीब 125 यूनिकॉर्न कंपनियां सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि डीप-टेक क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष को मंजूरी दी है, जिससे निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को दीर्घकालिक वित्तीय सहयोग मिलेगा।

वैश्विक मंच पर भारत की तैयारी

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में तकनीकी नेतृत्व स्थापित करने के लिए डीप-टेक नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, शोध संगठनों और स्टार्टअप्स की भूमिका को देश के भविष्य के लिए निर्णायक बताया।

उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि भारत इनोवेट्स 2026 एक “पूरे सरकार का प्रयास” है, जो शिक्षा, विज्ञान, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों को एक साझा मंच पर लाता है। उन्होंने निवेशकों से महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों के स्टार्टअप्स को भी पहचानने का आह्वान किया।

फ्रांस में होगा वैश्विक समापन

यह प्री-समिट भारत इनोवेट्स 2026 अभियान का प्रारंभिक चरण है, जिसका भव्य समापन जून 2026 में फ्रांस के नीस शहर में आयोजित वैश्विक नवाचार प्रस्तुतीकरण के साथ होगा। यह आयोजन भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का हिस्सा है।

22 मार्च को ग्रैंड फिनाले

कार्यक्रम का दूसरा दिन 22 मार्च 2026 को आयोजित होगा, जिसमें अतिरिक्त स्टार्टअप पिच सत्र, नीति चर्चा, निवेशक सहभागिता तथा ग्रैंड फिनाले और पुरस्कार समारोह आयोजित किए जाएंगे। इसमें सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप प्रस्तुतियों को सम्मानित किया जाएगा।

निष्कर्ष:
‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ भारत के नवाचार इकोसिस्टम को नई गति देने के साथ देश के स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। यह आयोजन भारत को तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

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