कवर्धा / शौर्यपथ / कवर्धा में मात्र मोहम्मद अकबर ही टारगेट में है।इसीलिए हाईप्रोफाइल साजिस रची जा रही है, कवर्धा में जो कुछ भी हो रहा है सब राजनीति षड्यन्त्र का एक हिस्सा है।
गोरेलाल चंद्रवंशी मिडिया प्रभारी ने कहा कि बीजेपी के पास कोई मुद्दा नहीं इसलिए धर्म की राजनीति कर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने कोशिश की जा रही है। मोहम्मद अकबर बहुत पुराने नेता हैं उन्होंने कभी ऐसा कोई विवादित बयान, विवादित कार्य किया ही नहीं है जिससे किसी धर्म विशेष को आपत्ति हो। जरा समझने की कोशिश करिये, दो धर्म के गर्म खून वाले युवाओं में वाद विवाद होता है दोनो पक्षों के झंडे गिराए जाते हैं। इन झंडे गिराए जाने वाले हरकत में किसी भी धर्म विशेष व्यक्ति शामिल नहीं थे शामिल थे तो बस नासमझ युवा। इसमे मोहम्मद अकबर का दोष कैसे हुआ ,दोषी हैं तो सिर्फ वो युवा जो उन झगड़ों में शामिल थे। झगड़ों का असल फायदा बीजेपी ने पूरी तरह से उठाया। झगड़े के तुरंत बाद बीजेपी पूरी तरह एक्टिव हो गई। हर रोज एक नया कार्यक्रम। अगर प्रशासन मूक दर्शक बनी रहती तो भाजपा पूरे शहर व इलाकों में दंगा कर सकती थी जैसा कि अपने छोटे से दंगों में बाहर से युवाओं को बुलाकर शहर में खड़ी गाड़ियों को तोडफ़ोड़ किया गया, मुस्लिम घरों में तोड़ फोड़ कर घरों में घुसने की कोशिश की गई, इनका बस चलता तो पूरे शहर में आग लगा सकते थे। इन सब देखते हुए पुलिस प्रशासन ने लाठी चार्ज किया था ।
वही झंडा रोहन के दिन श्री कन्हैयालाल अग्रवाल के द्वारा अखबारों में अपने धर्म गुरुओं के आगमन पर उनके अभिनन्दन स्वरूप विज्ञापन छपवा गया जो किसी को नीचा दिखाने नही अपितु धर्म नगरी में पहुंचे सम्मानियो के सम्मान के उद्देश्य से देना कोई अपराध व अधर्म नही है । भाजपा वालो के पास मोहम्मद अकबर की छवि बिगाड़ने के लिए धर्म की आड़ लेना मजबूरी हो चुकी है इसके अलावा भाजपाइयों के पास और कोई रास्ता बचा ही नही है। याद दिला दें कि मोहम्मद अकबर साठ हजार वोटों से जीत दर्ज की थी और उसके बाद जो क्षेत्र में राजनीति व धर्म से ऊपर उठकर जो सेवा व विकास उनके द्वारा लगातार किया जा रहा उनके विशाल व्यक्तित्व व सरलता-सहजता ,सरलता के सामने भाजपाइयों के सारे हथकंडे बौने साबित होते जा रहे रहे परिणामस्वरूप उनके व्यक्तित्व को बदनाम करने के साथ-साथ भाजपाइयों को 60 हजार वोटों की हार का गड्ढा
पाटना उनके लिए असम्भव लगने लगा इसलिए मजबूरी वश भाजपाई षड्यन्त्र का सहारा ले धर्म की आड़ में गंदी राजनीति कर रही जिन्हें 2023 के चुनाव में धर्म नगरी व शांतिप्रिय कवर्धा के सम्मानीय नागरिक सबक जरूर सिखायेंगे ।