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ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का, गन्ना फसल लेने किसानों को करें प्रोत्साहित - कलेक्टर

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बालोद /शौर्यपथ/

कलेक्टर  जनमेजय महोबे ने कहा कि किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का एवं गन्ना फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करें।  महोबे कल तहसील मुख्यालय गुण्डरदेही में कृषि विभाग द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, मक्का एवं गन्ना फसलों का क्षेत्र विस्तार हेतु आयोजित कार्यशाला सह प्रशिक्षण में निर्देशित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर में कमी एवं ग्रीष्मकालीन धान में जल की अधिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए दलहन, तिलहन, मक्का एवं गन्ना की खेती करने हेतु किसानों को स्थायी एवं टिकाउ खेती करने प्रेरित किया जाए। क्षेत्र में भूमि के प्रकार के अनुसार खरीफ एवं रबी मौसम में धान के फसल के स्थान पर अन्य वैकल्पिक लाभदायक फसलों की कार्ययोजना तैयार करेें। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन धान की तुलना में गन्ना का फसल अधिक लाभकारी है। कलेक्टर ने उपस्थित किसानों, कृषि प्रसारकर्ताओं एवं कृषक मित्रों से भी चर्चा की।  

कार्यशाला सह प्रशिक्षण में जिला पंचायत अध्यक्ष  सोनादेवी देशलहरा ने कहा कि ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का, दलहन, तिलहन फसल में भी गोधन न्याय योजना के अंतर्गत उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने एवं जैविक खेती हेतु किसानों को जागरूक किया जाए। कृषि विभाग के उप संचालक  एन.एल.पाण्डे ने बताया कि विकासखण्ड गुण्डरदेही में ग्रीष्मकालीन धान का रकबा 5139 हेक्टेयर है, जिसके बदले गेंहू 450 हेक्टेयर, मक्का 400 हेक्टेयर, चना 1400 हेक्टेयर, मटर 250 हेक्टेयर, मसूर 299 हेक्टेयर, मूंग 250 हेक्टेयर, उड़द 300 हेक्टेयर, तिवड़ा 680 हेक्टेयर, अलसी 170 हेक्टेयर, सरसों 200 हेक्टेयर, गन्ना 500 हेक्टेयर एवं साग सब्जी 250 हेक्टेयर में क्षेत्र विस्तार करने का कार्ययोजना बनाई गई है। कार्यशाला में उपस्थित कृषकों को ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर अन्य फसलों के उत्पादन एवं होने वाले आर्थिक लाभ के संबंध में तुलनात्मक जानकारी दी गई। कार्यशाल सह प्रशिक्षण में कृषि विभाग के सहायक संचालक  सुर्यनारायण ताम्रकार सहित अन्य विभागीय अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित थे।

 

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