रायपुर। शौर्यपथ । छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर में हाल ही में नक्सल हिंसा की वारदात तेज होने पर राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उईके भी चिंतित हैं। राजभवन के सूत्रों के अनुसार उन्होंने प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को पत्र लिखकर अपनी चिंता से अवगत कराया है, इसके साथ ही उन्होंने राज्य में नक्सली घटनाएं बढ़ने के मामले को लेकर एक समीक्षा बैठक भी बुलाई है। इस बैठक में गृह विभाग के उच्चाधिकारी भी शामिल होंगे। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह सहित कुछ अन्य लोगों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर बढ़ती नक्सल घटनाओं पर चिंता व्यक्त की थी। 138 लोगों की गई हैं जान राज्य में कांग्रेस सरकार के शासन काल में वर्ष 2019 से लेकर 2020 में अब तक नक्सलियों के हाथों 53 सुरक्षा कर्मियों की जानें गई हैं। इसी तरह नक्सलियों ने इसी अवधि में अब तक 85 ग्रामीणों की हत्याएं की हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार ज्यादातर घटनाएं अलग-अलग हुई हैं। लेकिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों की नक्सल हत्याओं से पूरे बस्तर में दहशत का वातावरण बनता जा रहा है। समीक्षा बैठक जल्द राजभवन से पिछले दिनों गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू को पत्र जारी किया है। इस पत्र में कहा गया है कि नक्सल घटनाओं को लेकर इसी माह समीक्षा बैठक आयोजित की जानी है। इस बैठक के लिए अभी तारीख तय नहीं है। माना जा रहा है कि गृहमंत्री द्वारा पत्र के जवाब के साथ बैठक की तारीख सामने आएगी। कई बिंदुओं पर होगी समीक्षा बताया गया है कि गृहमंत्री को लिखे पत्र में राज्यपाल ने राज्य में हो रही नक्सल घटनाओं के संबंध में कुछ बिंदुओं के आधार पर चर्चा व समीक्षा की बात कही है। इसमें यह बात शामिल है कि प्रदेश में नक्सली घटनाएं क्यों बढ़ रही है, इन घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या किया जा सकता है, बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए है, इन घटनाओं को रोकने के लिए कौने से कदम उठाए जा सकते हैं? रमन ने भी लिखा था राज्यपाल को पत्र पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने प्रदेश में नक्सल घटनाओं में बढ़ोत्तरी को लेकर तीन दिन पहले ही राज्यपाल को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने कहा था कि प्रदेश में बीते कुछ महीनों में नक्सलवादी बस्तर संभाग में दहशत और आतंक का माहौल बनाने में सफल हुए हैं। पिछले कुछ महीनों में ही बस्तर संभाग में ही नक्सलियों ने 76 लोगों की हत्याएं की हैं इनमें ग्रामीण तथा पुलिस कर्मी शामिल हैं। उन्होंने ये भी लिखा था कि पूर्व में भाजपा सरकार ने नक्सलियों की कमर तोड़ना का प्रयास कर बस्तर को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विकास किया था,वह अब रुक गया है। बताया गया है कि डॉ.रमन के अलावा कई अन्य लोगों ने भी पत्र लिखकर नक्सल घटनाओं पर चिंता जताते हुए राज्यपाल से कार्रवाई का आग्रह किया था।