रायपुर / शौर्यपथ। बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक सफलता दर्ज की गई है। सुकमा जिले में ₹64 लाख के इनामी 26 हार्डकोर माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में लौटकर आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 7 महिलाएं भी शामिल हैं, जो इस बदलाव को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को केवल सुरक्षा बलों की सफलता नहीं, बल्कि मानवीय विश्वास, संवाद और संवेदनशील शासन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि “बस्तर अब बदल रहा है। यहां अब डर नहीं, बल्कि भरोसे की आवाज़ गूंज रही है। यह नया बस्तर शांति, विश्वास और विकास की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।”
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के स्पष्ट संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में अपनाई गई संतुलित सुरक्षा रणनीति और संवेदनशील पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर दिखाई दे रहे हैं। “पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान ने उन युवाओं के जीवन में नई उम्मीद जगाई है, जो कभी नक्सलवाद के भ्रमजाल में फंस गए थे।
उन्होंने कहा कि बस्तर में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविर, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तथा सुदूर अंचलों तक शासन की सीधी पहुँच ने क्षेत्र की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। आज बस्तर में भय का स्थान विश्वास ने ले लिया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंसा का मार्ग त्यागने वालों के लिए सरकार के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। उन्हें सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के सभी अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने दोहराया कि नक्सल समस्या का स्थायी समाधान सुरक्षा, विकास और विश्वास की त्रयी में ही निहित है। उन्होंने शेष माओवादी साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि वे शांति, परिवार और प्रगति का मार्ग चुनें। राज्य सरकार उनके पुनर्वास और पुनर्स्थापन में हर संभव सहयोग करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है और हर आत्मसमर्पण के साथ नक्सल-मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प और अधिक सशक्त होता जा रहा है।