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आचरण पर ‘जीरो टॉलरेंस’: वरिष्ठ IPS रतन लाल डांगी निलंबित, साय सरकार ने सख्त कार्रवाई से दिया स्पष्ट संदेश

  • devendra yadav birth day

यौन उत्पीड़न, पद के दुरुपयोग और सेवा नियम उल्लंघन के आरोपों पर कार्रवाई — विभागीय आदेश जारी, हाई-लेवल जांच तेज

रायपुर । शौर्यपथ । 

छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग ने एक महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लेते हुए 2003 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जारी विभागीय आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि डांगी द्वारा पद की गरिमा के विपरीत आचरण, नैतिकता का उल्लंघन और पद के प्रभाव का दुरुपयोग किया गया, जिससे न केवल सेवा नियमों का हनन हुआ बल्कि पुलिस विभाग की छवि भी प्रभावित हुई।

? विभागीय आदेश में क्या कहा गया?

नवा रायपुर स्थित मंत्रालय, महानदी भवन से जारी आदेश (दिनांक 26/03/2026) के अनुसार—

डांगी पर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के तहत गंभीर उल्लंघन prima facie पाए गए हैं

विशेष रूप से नियम 3(1)(a), 3(1)(i), 7(2)(vii) और नियम 17 के उल्लंघन का उल्लेख

उनके कृत्य इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया में प्रसारित होने से पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई

उन्हें व्यक्तिगत रूप से इन कृत्यों के लिए जिम्मेदार मानते हुए विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित

⚖️ निलंबन की शर्तें

सरकार ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत कार्रवाई करते हुए:

डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस मुख्यालय (PHQ), नवा रायपुर निर्धारित

बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर प्रतिबंध

केवल निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) देय

? आरोपों का पूरा परिप्रेक्ष्य

मामले में एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की पत्नी ने आरोप लगाया है कि:

वर्ष 2017 में कोरबा में पहचान के बाद

पिछले 7 वर्षों से शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया

हालांकि, रतन लाल डांगी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का शिकार बताया है।

? हाई-लेवल जांच: हर एंगल पर नजर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों—

डॉ. आनंद छाबड़ा

मिलना कुर्रे

की एक विशेष जांच समिति गठित की गई है, जो निम्न बिंदुओं की जांच कर रही है:

क्या डांगी ने अपने प्रभाव से SI को बार-बार थाना प्रभारी (TI) पद दिलवाया?

वायरल फोटो और चैट की फॉरेंसिक जांच

डांगी के ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप के दावों की सत्यता

सेवा आचरण नियमों का वास्तविक उल्लंघन

? आगे की कार्रवाई क्या होगी?

जांच समिति को जल्द प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके आधार पर संभावित कदम:

आपराधिक मामला (FIR) दर्ज होना

या सख्त विभागीय दंडात्मक कार्रवाई

?️ सुशासन का सख्त संकेत

इस कार्रवाई को प्रशासनिक हलकों में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह स्पष्ट करता है कि:

कानून और नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे

उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा

महिला सुरक्षा और संस्थागत गरिमा से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं

✍️ निष्कर्ष

रतन लाल डांगी का निलंबन केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि शासन की उस नीति का प्रतिबिंब है जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता सर्वोपरि हैं।

अब पूरे प्रदेश की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा—विभागीय अनुशासन या आपराधिक न्याय।

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