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दुकानों में सूखा, गलियों में बह रही शराब—किसकी जिम्मेदारी?

  • rounak group

 

राजनांदगांव /शौर्यपथ / जिले में शराब व्यवस्था को लेकर हालात चिंताजनक नजर आ रहे हैं। अधिकृत दुकानों में सीमित उपलब्धता के बीच शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से शराब की बिक्री तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। यह स्थिति न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी परेशानी का कारण बन गई है। जानकारी के अनुसार, कई स्थानों पर लोग निर्धारित दुकानों से शराब नहीं मिलने पर अवैध विक्रेताओं का सहारा लेने को मजबूर हैं। यहां उन्हें तय दर से अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है, जिससे जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।

0 कोचियों का नेटवर्क हावी…

शहर के कई इलाकों और आसपास के गांवों में अवैध विक्रेताओं की सक्रियता किसी से छिपी नहीं है। चर्चा है कि इन तक नियमित रूप से सप्लाई पहुंच रही है, जिससे यह संदेह और गहराता है कि कहीं न कहीं सिस्टम की पकड़ कमजोर पड़ रही है। आम लोगों के लिए जहां उपलब्धता संकट बनी हुई है, वहीं अवैध चैनल बिना रोकटोक चल रहे हैं।

0 अतिरिक्त रकम लेकर सप्लाई की चर्चा…

सूत्रों के हवाले से यह कहा जा रहा है कि कथित तौर पर प्रति पेटी 200 से 300 रुपये तक अतिरिक्त लेकर कुछ कोचियों को प्राथमिकता के साथ शराब दी जाती है। इससे आम उपभोक्ता जहां खाली हाथ लौट रहा है, वहीं अवैध विक्रेताओं के पास पर्याप्त स्टॉक बने रहने की बात सामने आ रही है।

0 गठुला भट्टी पर केंद्रित गतिविधियां…

शहर के गठुला क्षेत्र की एक शराब दुकान/भट्टी का नाम विशेष रूप से चर्चा में है, जहां से बड़े पैमाने पर सप्लाई होने की बातें कही जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से शहर के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ आसपास के इलाकों तक शराब पहुंचने की कड़ियां जुड़ी हुई हैं। ऐसे में इस स्थान की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 0

0 चखना सेंटर भी बना रहे मौका…

अब इस पूरे मामले में एक और पहलू सामने आया है। लोगों का कहना है कि लाइसेंसी चखना दुकानों वाले भी इस सूखे का फायदा उठा रहे हैं। आरोप है कि जहां अधिकृत दुकानों पर शराब उपलब्ध नहीं होती, वहीं कुछ चखना सेंटरों में अधिक कीमत लेकर शराब आसानी से मिल जाती है। इससे अवैध बिक्री के नेटवर्क को और मजबूती मिलने की बात कही जा रही है।

0 चौकी के सामने से आवाजाही

बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र के पास ही पुलिस चौकी मौजूद है, इसके बावजूद कथित रूप से शराब का परिवहन निर्बाध जारी रहने की चर्चाएं हैं। इससे निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। हालांकि कुछ मामलों में कार्रवाई होने के बाद भी बड़े स्तर पर संचालित चैन पर अपेक्षित असर नहीं दिख रहा, जिससे कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

कुल मिलाकर, अधिकृत दुकानों में कमी और अवैध चैनलों की सक्रियता ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस पर किस तरह ठोस कार्रवाई करता है।

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Mrinendra choubey

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