रायपुर: सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि आम जनता के लिए वह हथियार है जो प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। इसका एक जीवंत उदाहरण हाल ही में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेशों में देखने को मिला है, जहाँ जनसेवक विकास तिवारी की अपीलों पर सुनवाई करते हुए आयोग ने कड़ी कार्रवाई की है।
लापरवाही पर भारी दंड: 5 में से 4 मामलों में जुर्माना
जनसेवक विकास तिवारी द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय (रायपुर) के विरुद्ध प्रस्तुत की गई पाँच द्वितीय अपीलों में से चार में आयोग ने कड़ा फैसला सुनाया है। सूचना देने में कोताही बरतने और नियमों की अनदेखी करने पर तत्कालीन जन सूचना अधिकारी (PIO) पर कुल 1 लाख 17 हजार 500 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।
तीन मामलों में अधिकतम जुर्माना: आयोग ने तीन अलग-अलग प्रकरणों (A/3579/2024, A/3577/2024, A/3575/2024, और A/3570/2024) में पीआईओ पर 25,000 - 25,000 रुपये का अधिकतम जुर्माना लगाया है।
चौथे मामले में आंशिक दंड: एक अन्य प्रकरण (A/3574/2024) में 17,250 रुपये की शास्ति (Penalty) अधिरोपित की गई है।
ऐतिहासिक आदेश: अधिकारी की जेब से वसूलने होंगे 2.56 लाख रुपये
जुर्माने के अलावा, एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में आयोग ने सूचना के अधिकार के दुरुपयोग को रोकने और आवेदक को न्याय दिलाने के लिए बड़ा आदेश दिया है। इस मामले में कुल 1,26,000 पृष्ठों की विशाल जानकारी प्रदान करने के लिए लगने वाले 2,56,000 रुपये के शुल्क को जन सूचना अधिकारी से ही वसूलने के आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो जानकारी देने में जानबूझकर देरी करते हैं या प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं।
"शोषितों और वंचितों का हथियार है RTI" - विकास तिवारी
इस सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए जनसेवक विकास तिवारी ने कहा, "सूचना का अधिकार अधिनियम वंचितों, शोषितों और गरीबों को उनका हक दिलवाने के लिए एक अत्यंत मजबूत हथियार है। शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए हमारा यह संघर्ष जारी रहेगा। यह जीत आम जनता की जीत है जो व्यवस्था से जवाब मांगना चाहती है।"
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की उम्मीद
विकास तिवारी द्वारा उठाए गए इस कदम की आम जनता और शिक्षाविदों द्वारा सराहना की जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर हुई इस बड़ी कार्रवाई से अन्य विभागों के लापरवाह अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े फैसलों से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता को सूचना पाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
RTI कार्यकर्ता और जनसेवक विकास तिवारी के इस निरंतर प्रयास ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो कानून की मदद से किसी भी व्यवस्था को सुधारा जा सकता है।