निमधा को नर्सिंग कॉलेज, मिनी स्टेडियम और मंगल भवन की सौगात, महिलाओं को दिया ‘करोड़पति दीदी’ बनने का मंत्र
मरवाही/रायपुर / शौर्यपथ / सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मरवाही विकासखंड के ग्राम निमधा में एक अलग ही जनसंपर्क और जनसंवाद का दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री गांव के बीच आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर ग्रामीणों से सीधे रूबरू हुए। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत जानी और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन को जनता के द्वार तक पहुंचाना है। इसी कड़ी में प्रदेशभर के गांवों में जाकर लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन समस्याओं का तत्काल समाधान संभव है, उनका मौके पर ही निराकरण किया जा रहा है, जबकि अन्य मामलों के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों और मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची ने जिले में नर्सिंग कॉलेज, ग्राम निमधा में मिनी स्टेडियम तथा सर्वसमाज के लिए विशाल मंगल भवन निर्माण की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए तीनों मांगों को तत्काल स्वीकृति प्रदान कर बड़ी सौगात दी।
ग्रामीणों ने बिजली आपूर्ति में आने वाली समस्याओं से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इस पर उन्होंने अधिकारियों से मौके पर जानकारी लेते हुए व्यवस्था में सुधार और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों और राजस्व निरीक्षकों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जनता की समस्याओं के निराकरण में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और लखपति दीदियों से विशेष संवाद किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक सशक्तता ही ग्रामीण विकास की सबसे बड़ी ताकत है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अब केवल लखपति दीदी बनने तक सीमित न रहें, बल्कि करोड़पति दीदी बनने का लक्ष्य तय करें। महिलाओं ने बताया कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि परिवार की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्चों में महत्वपूर्ण सहयोग कर रही है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त के तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवास सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए प्रदेश में जल्द ही सीएम हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। इसके माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे तथा उनकी निगरानी और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था भी की जाएगी।
जनचौपाल के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। महिलाओं ने उन्हें विष्णु भोग चावल, ब्लैक राइस, शहद, पापड़ और लड्डू जैसे स्थानीय उत्पाद भेंट किए। मुख्यमंत्री ने समूहों की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
ग्रामीण संस्कृति से जुड़े इस आत्मीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सरई के दोना-पत्तल में परोसे गए स्थानीय व्यंजनों—जामुन, कोईलार भाजी, बेल का शरबत, आम की चटनी और आमपना का स्वाद भी लिया। इस दौरान उन्होंने जिले की महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता की कहानियों पर आधारित ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष, आत्मविश्वास और सफलता की प्रेरक गाथा है, जो हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका यह दौरा केवल योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के बीच बैठकर उनकी वास्तविक जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार का संकल्प समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है तथा इसी सोच के साथ सुशासन को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।
यह जनचौपाल मुख्यमंत्री की सहजता, संवेदनशीलता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सामने आई, जहां निर्णय भी हुए, समाधान भी मिला और विकास की नई घोषणाओं ने ग्रामीणों में उत्साह का संचार किया।
क्या आप भविष्य में ऐसी सरकारी खबरों के लिए इसी तरह का विस्तृत लेकिन अखबार-शैली का प्रारूप पसंद करेंगे, या थोड़ा अधिक विश्लेषणात्मक समाचार स्वरूप उपयोगी रहेगा?