मनपसंद समितियों को प्राथमिकता देने और कथित लेन-देन के आरोपों पर स्वाभिमान मंच ने संभाग आयुक्त से की शिकायत
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक योजना का लाभ निष्पक्षता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किसी प्रकार का भेदभाव या मनमानी न हो। इसके बावजूद कुछ विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली शासन की इस सकारात्मक छवि को धूमिल करने का प्रयास करती दिखाई दे रही है।
इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरन लाल साहू ने दुर्ग संभाग के आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत सौंपते हुए जिला विपणन कार्यालय (DMO), दुर्ग में धान उठाव एवं डिलीवरी ऑर्डर (DO) जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पक्षपातपूर्ण रवैये तथा संदिग्ध कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार जिले की सेवा सहकारी समितियों द्वारा किसानों से धान का उपार्जन कर शासन को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और किसानों को उनके धान का भुगतान भी प्राप्त हो चुका है। वर्तमान विवाद किसानों के भुगतान से नहीं, बल्कि समितियों से धान उठाव एवं मिलरों को DO जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
स्वाभिमान मंच का आरोप है कि DMO कार्यालय में DO जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं दिखाई दे रही है। शिकायत में कहा गया है कि कई समितियां नियमों के अनुरूप अपने क्रम की प्रतीक्षा कर रही हैं, लेकिन उन्हें समय पर DO नहीं मिल पा रहा है। वहीं कुछ चुनिंदा समितियों एवं मिलरों को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे विभागीय निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है तथा समितियों के बीच असंतोष का वातावरण निर्मित हो रहा है।
शिकायत में विशेष रूप से DMO कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर कमल चंद्राकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि DO वितरण की प्रक्रिया में मनमानी एवं पक्षपातपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका व्यक्त की है कि कुछ समितियों और मिलरों को प्राथमिकता देने के पीछे कथित आर्थिक लेन-देन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी, लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।
स्वाभिमान मंच का कहना है कि यदि DO वितरण और धान उठाव की प्रक्रिया में इसी प्रकार का भेदभाव जारी रहा तो इसका सीधा प्रभाव सहकारी समितियों की वित्तीय एवं संचालन क्षमता पर पड़ सकता है। कई समितियां निर्धारित समय पर धान उठाव नहीं होने के कारण अतिरिक्त प्रबंधन संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। ऐसी स्थिति में शासन की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने वाली समितियों का मनोबल भी प्रभावित होने की आशंका है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी कुछ समितियों के बीच DO वितरण को लेकर असंतोष की स्थिति बनी थी। ऐसे में आवश्यक है कि पूरे मामले की विभागीय स्तर पर गहन जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि DO जारी करने की प्राथमिकता किन मानकों के आधार पर तय की जा रही है और कहीं किसी स्तर पर पक्षपात या अनियमितता तो नहीं हो रही।
पूरन लाल साहू ने संभाग आयुक्त से मांग की है कि जिले की सभी धान उठाव प्रभावित समितियों से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए, DO वितरण की प्रक्रिया का ऑडिट कराया जाए तथा शिकायत में नामित कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए DO प्रणाली को पूर्णतः ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, जिससे किसी भी व्यक्ति विशेष की मनमर्जी या हस्तक्षेप की गुंजाइश समाप्त हो सके।
प्रदेश में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को देखते हुए अब सभी की निगाहें संभागीय प्रशासन पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों में सत्यता पाई जाती है तो यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं होगा, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का विषय बन जाएगा। वहीं यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होती है तो इससे शासन की पारदर्शिता के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा समितियों के हितों की भी रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।