स्वच्छ अस्पताल के दावों की खुली पोल, नगरी सिविल अस्पताल में गंदगी और लापरवाही का बोलबाला
गुटखे से सने शौचालय, गंदे पेयजल केंद्र और खुले बिजली बोर्ड... क्या ऐसे मिलेगा बेहतर इलाज?
शौर्यपथ विशेष
धमतरी -जिले के वनांचल क्षेत्र का सबसे प्रमुख शासकीय स्वास्थ्य केंद्र नगरी सिविल अस्पताल इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्थाओं के कारण गंभीर सवालों के घेरे में है। यह अस्पताल सिहावा, नगरी सहित दर्जनों दूरस्थ आदिवासी गांवों के हजारों लोगों के लिए उपचार का एकमात्र बड़ा केंद्र है। प्रतिदिन सैकड़ों मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल की बदहाल स्वच्छता और लापरवाही मरीजों को स्वस्थ करने के बजाय संक्रमण और दुर्घटना के खतरे के बीच रहने को मजबूर कर रही है।
अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही स्वच्छता व्यवस्था की हकीकत सामने आ जाती है। मरीजों और उनके परिजनों के उपयोग के लिए बनाए गए शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि वहां जाना भी मुश्किल हो गया है। टॉयलेट सीट और मूत्रालय गुटखे की पीक से पूरी तरह सने हुए हैं। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होने से दुर्गंध फैली रहती है। वहीं खिड़कियों पर गुटखे के दाग और जली हुई सिगरेट के टुकड़े पड़े हुए दिखाई देते हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में तंबाकू और धूम्रपान के ऐसे निशान यह सवाल खड़े करते हैं कि आखिर अस्पताल परिसर में निगरानी की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है।
मरीजों के लिए लगाए गए शुद्ध पेयजल वाटर फ्रिज की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। जिस स्थान से मरीजों को स्वच्छ पानी मिलना चाहिए, वहां गंदगी का आलम है। अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए बर्तन धोने के उद्देश्य से लगाया गया अलग नल लंबे समय से बंद पड़ा है। मजबूरी में लोग पीने के पानी वाले स्थान पर ही टिफिन और बर्तन धो रहे हैं तथा वहीं जूठा भोजन भी फेंक रहे हैं। इससे न केवल पेयजल स्थल की स्वच्छता प्रभावित हो रही है बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। सवाल यह है कि जब अस्पताल में ही स्वच्छता के मूलभूत मानकों का पालन नहीं होगा तो मरीज आखिर स्वस्थ कैसे होंगे?
अस्पताल की एक और गंभीर लापरवाही कुपोषण आहार कक्ष में देखने को मिली। यहां छोटे बच्चों के उपचार और पोषण की व्यवस्था की जाती है, लेकिन इसी कमरे में लगे कई इलेक्ट्रिकल बोर्ड और स्विच खुले हुए तथा बाहर निकले हुए दिखाई दे रहे हैं। यहां भर्ती छोटे-छोटे बच्चे खेलते रहते हैं। यदि खेलते-खेलते किसी बच्चे का हाथ खुले बिजली के स्विच या बोर्ड तक पहुंच जाए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इतनी गंभीर सुरक्षा खामी के बावजूद जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं जाना चिंता का विषय है।
सरकार एक ओर स्वच्छ अस्पताल, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर नगरी सिविल अस्पताल की तस्वीरें इन दावों की वास्तविकता उजागर कर रही हैं। जिस अस्पताल में मरीज बीमारी से राहत पाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां गंदगी, अव्यवस्था और असुरक्षित माहौल उनका स्वागत कर रहा है। यदि समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया तो किसी दिन संक्रमण फैलने या बिजली से जुड़ी दुर्घटना जैसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
क्षेत्रवासियों ने जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि अस्पताल परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, शौचालयों की तत्काल सफाई कराई जाए, बंद पड़े नलों को चालू किया जाए, पेयजल स्थल को पूरी तरह स्वच्छ रखा जाए, अस्पताल परिसर में गुटखा और धूम्रपान पर सख्ती से रोक लगाई जाए तथा कुपोषण कक्ष में खुले पड़े बिजली के बोर्ड और स्विच की तत्काल मरम्मत कर मरीजों और मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब तक कार्रवाई करते हैं या फिर वनांचल के मरीज इसी बदहाल व्यवस्था में इलाज कराने को मजबूर रहेंगे।