समय पर पहचान और निःशुल्क उपचार से हुआ सफल हृदय ऑपरेशन
रायपुर / कई बार समय पर हुई एक छोटी-सी पहल किसी की पूरी जिंदगी बदल देती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश तथा कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में संचालित जिला प्रशासन के नवाचार 'प्रोजेक्ट धड़कन' ने एक बार फिर ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। ग्राम सरोरा की महज डेढ़ माह की बालिका रूचिता पटेल के हृदय में छेद की समय पर पहचान कर उसका पूरी तरह निःशुल्क सफल ऑपरेशन कराया गया। आज रूचिता स्वस्थ है और उसके परिवार के चेहरे पर लौट आई मुस्कान, प्रोजेक्ट धड़कन की संवेदनशील और प्रभावी पहल की बड़ी सफलता है।
रूचिता को डेढ़ माह की आयु में सर्दी-जुकाम की शिकायत होने पर परिजन उसे चिकित्सक के पास लेकर गए। प्रारंभिक जांच के दौरान चिकित्सक ने उसकी हृदय गति सामान्य से अधिक पाई और विस्तृत जांच की सलाह दी। इसी दौरान आंगनबाड़ी केंद्र में परिजनों ने बालिका की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने तत्काल प्रोजेक्ट धड़कन की टीम से संपर्क किया।
प्रोजेक्ट धड़कन की टीम ने परिवार को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करते हुए तत्काल चिकित्सकीय प्रक्रिया प्रारंभ कराई। तिल्दा स्थित निजी अस्पताल में जांच के दौरान पता चला कि रूचिता के हृदय में 8 एमएम का छेद है। इसके बाद प्रोजेक्ट धड़कन के समन्वय से रायपुर के अस्पताल में उसका पूरी तरह निःशुल्क हृदय ऑपरेशन कराया गया। सफल शल्य चिकित्सा के बाद लगभग 15 दिनों के उपचार उपरांत रूचिता को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
रूचिता के पिता श्री युगल पटेल मिस्त्री का कार्य करते हैं तथा माता श्रीमती विश्वासा पटेल गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति महंगे उपचार का खर्च वहन करने की नहीं थी। ऐसे समय में प्रोजेक्ट धड़कन के माध्यम से निःशुल्क उपचार उपलब्ध होने से परिवार को बड़ी राहत मिली।
आज रूचिता पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन व्यतीत कर रही है। परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, प्रोजेक्ट धड़कन की टीम एवं उपचार में सहयोग करने वाले चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता और उपचार से उनकी बेटी को नया जीवन मिला है।
जिले में संचालित प्रोजेक्ट धड़कन के तहत अब तक 1,69,353 से अधिक बच्चों की हृदय संबंधी स्क्रीनिंग की जा चुकी है। स्क्रीनिंग के दौरान 165 संदिग्ध मामलों की पहचान हुई, जिनमें से 40 बच्चों में हृदय रोग की पुष्टि हुई। इनमें 24 बच्चों का सफल हृदय ऑपरेशन कराया गया, जबकि 15 बच्चों का उपचार एवं नियमित फॉलो-अप जारी है।