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बस्तर में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर, प्रशासन ने संभाला मोर्चा :मूसलाधार बारिश से बाढ़ की स्थिति, दर्जनों लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू; 9 राहत शिविरों में 350 से अधिक प्रभावितों को मिला आश्रय

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रायपुर / शौर्यपथ / बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से बस्तर संभाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। नदी-नाले उफान पर हैं और कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।

कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना में बाढ़ में फंसे करीब 40 लोगों को नावों की मदद से सुरक्षित निकालकर राहत शिविर पहुंचाया गया। तोकापाल के घाट धनोरा से 25 परिवारों को सुरक्षित निकाला गया। पलवा और लोहंडीगुड़ा के भेजा क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी भरने पर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों एवं पंचायत भवनों में स्थानांतरित किया गया।

9 राहत शिविरों में 350 से अधिक लोगों को आश्रय

बस्तर जिले में 9 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक 350 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। जगदलपुर के चार शिविरों में 175 लोग ठहरे हैं। शहीद भगत सिंह स्कूल में 100 से अधिक लोगों के भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था की गई है। नगरनार के नदी बोड़ना शिविर में करीब 40, भैंसगांव में 77, बेलगांव में 35 तथा ग्राम पंचायत भेजा में 26 प्रभावितों को आश्रय दिया गया है।

सभी शिविरों में भोजन, पेयजल, ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

कलेक्टर और एसपी ने प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण

कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा ने प्रभावित क्षेत्रों का सघन निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों ने गंगामुंडा पारा, महादेव घाट, खड़कघाट, मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के आसपास तथा नगरनार-भेजापदर मार्ग सहित विभिन्न जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से चर्चा कर राहत व्यवस्थाओं की जानकारी ली और मैदानी अमले को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।

इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर, निचले क्षेत्रों में सतर्कता

लगातार बारिश से इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया है। ओडिशा स्थित खातीगुड़ा बांध के तीन और मुरान बांध के दो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके मद्देनजर नदी तटीय एवं निचले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में बचाव दल नावों और आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात हैं।

जिला प्रशासन ने नागरिकों से उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार न करने, अफवाहों पर ध्यान न देने और आपात स्थिति में बाढ़ नियंत्रण कक्ष अथवा संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना देने की अपील की है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रशासन, पुलिस एवं आपदा प्रबंधन दल समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।

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