पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक हर महीने 7,314 रुपये अतिरिक्त ब्याज भुगतान के निर्देश; बिना रेरा पंजीयन परियोजना विकसित करने पर धारा 59 के तहत अलग कार्रवाई होगी
रायपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने रायपुर के सेजबहार स्थित ‘वात्सल्य गौरव-1, फेज-1’ परियोजना में विकास कार्य अधूरे रहने और पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किए जाने के मामले में प्रमोटर को आबंटी के पक्ष में 6,87,496 रुपये ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। प्राधिकरण ने यह भी निर्देश दिया है कि परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक 1 नवंबर 2026 से प्रतिमाह 7,314 रुपये ब्याज का भुगतान किया जाए। परियोजना का रेरा पंजीयन नहीं कराए जाने के मामले में प्रमोटर के विरुद्ध पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
2019 से अक्टूबर 2026 तक का ब्याज देना होगा
प्राधिकरण के अनुसार, आबंटी द्वारा जमा की गई 8,12,643 रुपये की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की गणना करते हुए 6,87,496 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक निर्धारित मासिक ब्याज राशि का भुगतान करना होगा।
अधूरे विकास कार्य और प्रमाण पत्र नहीं मिलने पर कार्रवाई
सुनवाई के दौरान परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप विकास कार्य पूरे नहीं होने तथा सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किए जाने का मामला सामने आया। प्राधिकरण ने परियोजना को अपूर्ण मानते हुए भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के तहत विलंब के लिए ब्याज भुगतान का आदेश पारित किया।
बिना पंजीयन परियोजना विकसित करने पर अलग प्रकरण
CG-RERA ने परियोजना का पंजीयन नहीं कराए जाने को भी गंभीरता से लिया है। आदेश में धारा 3 के तहत पंजीयन की अनिवार्यता का उल्लेख करते हुए प्रमोटर के विरुद्ध धारा 59 के अंतर्गत पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रावधान के तहत बिना अनिवार्य पंजीयन परियोजना का विज्ञापन, विपणन, बुकिंग या विक्रय करने पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
भूखंड बेचने के बाद भी विकास की जिम्मेदारी प्रमोटर की
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि भूखंडों का विक्रय कर देने मात्र से प्रमोटर की वैधानिक जिम्मेदारियां समाप्त नहीं होतीं। स्वीकृत ले-आउट के अनुसार सड़क, नाली, विद्युत, पेयजल और अन्य निर्धारित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करना प्रमोटर का दायित्व है।
CG-RERA का यह आदेश उन आबंटियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें परियोजनाओं में विकास कार्य अधूरे रहने या आवश्यक प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह मामला रियल एस्टेट परियोजनाओं में समयबद्ध विकास, पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों के पालन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।