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चार साल की सैन्य सेवा के बाद अग्निवीरों के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते, छत्तीसगढ़ में 10% आरक्षण Featured

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31 दिसंबर तक पहले बैच के 18,300 से अधिक अग्निवीरों की सेवा समाप्त होने की तैयारी; साय सरकार ने पुलिस आरक्षक, वनरक्षक और जेल प्रहरी भर्ती में आरक्षण का बनाया प्रावधान

रायपुर। अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सशस्त्र सेनाओं में भर्ती हुए पहले बैच के 18,300 से अधिक अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल वर्ष 2026 के अंत तक पूरा होने जा रहा है। सेवा समाप्ति के बाद इन युवाओं के सामने रोजगार और भविष्य को सुरक्षित करने की चुनौती होगी। इस बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम-2026 को मंजूरी देते हुए तृतीय श्रेणी के चिन्हित पदों पर 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

पुलिस, वन और जेल विभाग में मिलेगा अवसर

राज्य सरकार के निर्णय के तहत पूर्व अग्निवीरों को पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर भर्ती में आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य सैन्य सेवा के दौरान अर्जित अनुशासन, शारीरिक दक्षता और प्रशिक्षण का उपयोग राज्य की सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में करना है।

इस सुविधा का लाभ छत्तीसगढ़ के मूल निवासी उन पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा, जिन्होंने भारतीय सशस्त्र सेनाओं में चार वर्ष का निर्धारित कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया हो। इसके लिए सेवा समाप्ति का वैध डिस्चार्ज प्रमाणपत्र अथवा सर्विस सर्टिफिकेट आवश्यक होगा। आरक्षण का लाभ संबंधित भर्ती नियमों, निर्धारित पात्रता और चयन प्रक्रिया के अधीन मिलेगा।

आरक्षक भर्ती में भी लागू होगा प्रावधान

गृह विभाग के अंतर्गत आरक्षक पदों पर विशेष भर्ती की अनुमति दिए जाने के साथ पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित आरक्षण व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सैन्य सेवा पूरी कर लौटने वाले युवाओं को राज्य पुलिस में शामिल होने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अंतिम चयन के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, शारीरिक मापदंड और अन्य भर्ती शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा।

अग्निवीर भर्ती के लिए युवाओं को प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से युवाओं को सेना और अग्निवीर भर्ती के लिए तैयार करने हेतु रोजगार विभाग के माध्यम से पूर्व-भर्ती लिखित एवं शारीरिक प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है। इससे युवाओं को सैन्य भर्ती की तैयारी में सहायता मिलती है। अब पूर्व अग्निवीरों के लिए राज्य की सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की पहल को इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

₹11.71 लाख की सेवा निधि, लेकिन नियमित सैन्य पेंशन नहीं

अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को नियमानुसार लगभग ₹11.71 लाख की सेवा निधि मिलने का प्रावधान है। हालांकि, चार वर्ष की संविदा सेवा पूरी करने वाले और नियमित कैडर में शामिल नहीं होने वाले अग्निवीरों को नियमित सैन्य पेंशन नहीं मिलती। योजना के अनुसार, प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियमित सैन्य सेवा में शामिल होने का अवसर मिलता है।

ऐसे में सेवा समाप्ति के बाद रोजगार उपलब्ध कराना केंद्र और राज्य सरकारों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है। विभिन्न राज्यों में पूर्व अग्निवीरों को पुलिस, सुरक्षा सेवाओं और अन्य सरकारी पदों पर अवसर देने के लिए अलग-अलग प्रावधान किए जा रहे हैं।

रोजगार और सम्मानजनक पुनर्वास पर टिकी निगाहें

छत्तीसगढ़ में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है, जो सैन्य सेवा के बाद अपने गृह राज्य में रोजगार पाना चाहते हैं। इससे एक ओर पूर्व अग्निवीरों के अनुभव का लाभ राज्य को मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर युवाओं को सेवा समाप्ति के बाद नए करियर की दिशा मिल सकती है।

अब इस पहल का वास्तविक लाभ भर्ती नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन, रिक्त पदों की उपलब्धता और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर निर्भर करेगा। पूर्व अग्निवीरों को समयबद्ध भर्ती और पर्याप्त अवसर मिलते हैं, तो यह कदम उनके सम्मानजनक पुनर्वास के साथ-साथ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भी उपयोगी साबित हो सकता है।

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