दुर्ग / शौर्यपथ / दिल्ली में गणतंत्र दिवस के परेड में लोक कलाकार रिखी क्षत्रीय छत्तीसगढ़ की झांकी का नेतृत्व करेंगे। झांकी में 22 वाद्ययंत्रों की प्रदर्शनी होगी वहीं इसका धुन भी परेड ग्राउंड में गूंजेगा। रिखी सातवीं बार परेड में शामिल हो रहे हैं।
भिलाई के लोक कलाकार रिखी क्षत्रीय नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर होने वाले परेड में छत्तीसगढ़ के लोक वाद्यों की धुन से गणतंत्र पर्व का उत्साह दोगुना करेंगे। इस बार का थीम छत्तीसगढ़ के लोक संगीत का वैभव है। रिखी क्षत्रीय व उनकी टीम करीब दो माह से इसे लेकर लगातार मेहनत कर रही थी। इसके बाद नई दिल्ली से उनके समूह को मंजूरी दी गई है। गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अनेक गणमान्य के बीच लोक वाद्य पर आधारित छत्तीसगढ़ की झांकी प्रदर्शित होगी। इसमें सबसे ऊपर छत्तीसगढ़ का पारंपरिक मुंडा बाजा होगा। रिखी गणतंत्र दिवस पर परेड को लेकर बेहद उत्साहित हैं। वे सात जनवरी को नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। जहां अ यास के कठिन दौर के बाद उनकी टीम राजपथ पर उतरने के लिए तैयार होगी।
रिखी ने बताया कि दुर्लभ लोक वाद्य पर आधारित झांकी का चयन भी कठिन प्रक्रिया के बाद हुआ है, जिसमें राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार के अफसर ने कई दौर पर परखा। शुरुआत में टीम को परखा गया उसके बाद माडल को मंजूरी मिली और अंत में राजपथ पर इस झांकी के साथ बजने वाले संगीत को चयनित किया गया। रिखी ने बताया कि राजपथ पर सिर्फ 55 सेकंड का ही संगीत बजेगा। उन्होंने बताया कि झांकी का ग्राफिक्स माडल उनकी निगरानी में बनाया गया है, इसमें कई बार फेर बदल के बाद अंतिम रूप से चयन किया गया है, जहां रिखी क्षत्रीय सबसे ऊपर रहेंगे और उनके साथ चार कलाकार होंगे, वहीं नीचे झांकी के दोनों हिस्से में चार-चार कलाकार रहेंगे। भिलाई स्टील प्लांट के कनवर्टर शाप से सेवानिवृत्त रिखी क्षत्रीय गणतंत्र दिवस में छत्तीसगढ़ की झांकी के साथ अवसर मिलने पर बेहद उत्साहित हैं और दिल्ली जाने को तैयारी में लगे हुए हैं।