BEO तोकापाल ने भेजी ‘तस्वीर’, पर ज़मीनी हकीकत पर सवाल बरकरार
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। शासकीय प्राथमिक शाला बुरूंगपाल, पटेलपारा में मध्यान भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्रकाशित खबर के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आता दिखाई दिया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) तोकापाल ने मामले में प्रतिक्रिया देते हुए समूह की बैठक लेकर बच्चों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी दी है। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी बताई गई है।
BEO तोकापाल द्वारा भेजे गए संदेश में कहा गया है कि मध्यान भोजन व्यवस्था को सुधारने के लिए संबंधित स्व-सहायता समूह को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों को अच्छा, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है।
राशि पंचायत की, निगरानी किसकी?
MDM राशि और समूह की नियुक्ति को लेकर दी गई यह सफाई अपने आप में कई सवाल छोड़ जाती है। यदि पैसा समूह को और नियुक्ति पंचायत की जिम्मेदारी है, तो फिर बच्चों की थाली में कमी आने पर जिम्मेदार कौन है?और सबसे अहम—अब तक निगरानी व्यवस्था कहां थी?
तस्वीर में सब सही, ज़मीनी हकीकत?
मामले में BEO तोकापाल की ओर से एक तस्वीर भी भेजी गई है, जिसमें मूली, बैंगन, पत्तागोभी की सब्ज़ी, दाल और चावल बना हुआ दिख रहा है। तस्वीर में भोजन भरपूर और संतुलित नजर आता है, लेकिन सवाल यह नहीं कि आज क्या बना—सवाल यह है कि हर दिन क्या बनेगा। क्या यही भोजन अब तोकापाल ब्लॉक की प्रत्येक शाला में बच्चों को प्रतिदिन दिया जाएगा?क्या सभी स्कूलों में तय मेनू चार्ट का सख्ती से पालन होगा, या तस्वीरें सिर्फ जवाब देने का माध्यम बनेंगी?
खबर से पहले क्यों नहीं जागा सिस्टम?
जानकारों का मानना है कि यदि नियमित निरीक्षण, अचानक जांच और जवाबदेही पहले से तय होती, तो बच्चों के भोजन को लेकर शिकायतें सामने ही क्यों आतीं? खबर आने के बाद बैठक और तस्वीरें भेजना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्था स्थायी होगी?
अब सिर्फ वादे नहीं, परिणाम चाहिए
फिलहाल विभाग की यह सक्रियता कागज और मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई दे रही है। असली परीक्षा अब ज़मीनी स्तर पर होगी—जहां बच्चों की थाली रोज भरेगी या फिर कुछ दिनों बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आएंगे।