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नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। सुशासन के दावों के बीच वन मंत्री के गढ़ में ही कुशासन की तस्वीर सामने आई है। साय सरकार सरकारी धन की बर्बादी रोकने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के विभाग से जुड़े वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण सामग्री की दुर्दशा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। मंत्री के लगातार बस्तर दौरे के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही यदि सरकारी सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी हो कहां रही है और जिम्मेदारी किसकी है?
वन विद्यालय जगदलपुर में निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया बड़ी मात्रा में सीमेंट उचित रखरखाव के अभाव में बोरियों में ही जमकर पत्थर जैसा हो गया है। मौके पर पड़े ढेर को देखकर इसकी मात्रा लगभग 800 बोरी से अधिक होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक मात्रा विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां बाउंड्रीवाल के साथ ऑडिटोरियम निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित था। निर्माण अधूरा रहने के बाद सीमेंट को शेड के नीचे रखा गया, लेकिन पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण नमी आदि से सीमेंट खराब होने की स्थिति सामने आई है।
सीमेंट खराब हुआ या सरकारी धन?
सवाल यह है कि सीमेंट कब और कितनी मात्रा में खरीदा गया, उसकी कीमत कितनी थी, निर्माण कार्य कब से बंद है और सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की थी? सरकारी पैसा लगाकर खरीदा गया सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही पत्थर बन जाए, तो इसे महज संयोग मानें या निगरानी की नाकामी—इसका जवाब जांच से मिलना चाहिए।
प्रशासन को तत्काल मौके का भौतिक सत्यापन कर सीमेंट की वास्तविक मात्रा, खरीद बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, निर्माण कार्य और भंडारण व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
वही इस मामले पे जनता का कहना है की “सरकारी धन कोई निजी संपत्ति नहीं, जनता की गाढ़ी कमाई है; इसकी बर्बादी पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।”
इस मामले पर वन विद्यालय जगदलपुर के संचालक शमा फारुकी से जब फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उनका कहना है की सीमेंट ठीक है, ओर काम जल्द हि चालू हो जायेगा।
" लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की पत्थर बन चुके सीमेंट से जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कैसे करेंगे? "
By - नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। सुशासन के दावों के बीच वन मंत्री के गढ़ में ही कुशासन की तस्वीर सामने आई है। साय सरकार सरकारी धन की बर्बादी रोकने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के विभाग से जुड़े वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण सामग्री की दुर्दशा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। मंत्री के लगातार बस्तर दौरे के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही यदि सरकारी सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी हो कहां रही है और जिम्मेदारी किसकी है?
वन विद्यालय जगदलपुर में निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया बड़ी मात्रा में सीमेंट उचित रखरखाव के अभाव में बोरियों में ही जमकर पत्थर जैसा हो गया है। मौके पर पड़े ढेर को देखकर इसकी मात्रा लगभग 800 बोरी से अधिक होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक मात्रा विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां बाउंड्रीवाल के साथ ऑडिटोरियम निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित था। निर्माण अधूरा रहने के बाद सीमेंट को शेड के नीचे रखा गया, लेकिन पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण नमी आदि से सीमेंट खराब होने की स्थिति सामने आई है।
सीमेंट खराब हुआ या सरकारी धन?
सवाल यह है कि सीमेंट कब और कितनी मात्रा में खरीदा गया, उसकी कीमत कितनी थी, निर्माण कार्य कब से बंद है और सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की थी? सरकारी पैसा लगाकर खरीदा गया सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही पत्थर बन जाए, तो इसे महज संयोग मानें या निगरानी की नाकामी—इसका जवाब जांच से मिलना चाहिए।
प्रशासन को तत्काल मौके का भौतिक सत्यापन कर सीमेंट की वास्तविक मात्रा, खरीद बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, निर्माण कार्य और भंडारण व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
वही इस मामले पे जनता का कहना है की “सरकारी धन कोई निजी संपत्ति नहीं, जनता की गाढ़ी कमाई है; इसकी बर्बादी पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।”
इस मामले पर वन विद्यालय जगदलपुर के संचालक शमा फारुकी से जब फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उनका कहना है की सीमेंट ठीक है, ओर काम जल्द हि चालू हो जायेगा।
" लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की पत्थर बन चुके सीमेंट से जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कैसे करेंगे? "
पहले अपना घर तो साफ करिए साहब... मुख्य सड़क पर चालान, गौरव पथ पर महीनों से कचरे का अंबार
रिपोर्टर : कृष्णा मंडल / लोकेशन : दंतेवाड़ा
बचेली। स्वच्छ भारत मिशन और ‘स्वच्छ बचेली’ अभियान के तहत नगर पालिका द्वारा शहर को स्वच्छ रखने और गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ लगातार चालानी कार्रवाई किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों के बीच नगर के प्रमुख गौरव पथ पर जगह-जगह लगे कचरे के ढेर नगर पालिका की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
नगर पालिका द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों, गलियों और मोहल्लों में घर-घर सूखा एवं गीला कचरा अलग-अलग रखने के लिए डस्टबिन वितरित किए गए हैं। घरों और दुकानों से नियमित कचरा संग्रहण के लिए कचरा वाहन तथा सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था होने की बात भी कही जाती है। इसके बावजूद शहर के महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग गौरव पथ के कई हिस्सों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दे रहे हैं।
कचरे के ढेर से दुर्गंध, राहगीर परेशान
गौरव पथ पर लंबे समय से जमा कचरे के कारण आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है। सड़क से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में सड़क किनारे जमा कचरा और गंदगी नालियों में पहुंचकर जल निकासी की समस्या बढ़ा सकती है। साथ ही इससे मच्छरों और अन्य संक्रमण फैलाने वाले कीटों के पनपने का खतरा भी बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका द्वारा नियमित रूप से कचरा उठाने और सफाई की व्यवस्था की जाए तो प्रमुख मार्ग पर इस तरह कचरे का ढेर लगने की स्थिति ही नहीं बनेगी।
जनता पर चालान, लेकिन नगर पालिका की जवाबदेही कौन तय करेगा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नगर पालिका द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वाले नागरिकों पर चालानी कार्रवाई की जा रही है, तो नगर पालिका की अपनी सफाई व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा?
स्वच्छता व्यवस्था केवल लोगों पर जुर्माना लगाने से प्रभावी नहीं हो सकती। इसके लिए नियमित कचरा संग्रहण, समय पर कचरा उठाव, सार्वजनिक स्थलों की सफाई और निगरानी की भी उतनी ही आवश्यकता है। नियम यदि नागरिकों के लिए हैं तो व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर पालिका की भी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वच्छता के नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि आम नागरिकों से स्वच्छता बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है और गंदगी फैलाने पर जुर्माना लगाया जाता है, तो नगर पालिका को भी अपने सफाई दायित्वों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
‘स्वच्छ बचेली’ के दावों पर उठ रहे सवाल
गौरव पथ जैसे प्रमुख मार्ग पर कचरे का अंबार नगर पालिका के ‘स्वच्छ बचेली’ अभियान के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रहा है। नागरिकों का कहना है कि अभियान केवल प्रचार और चालानी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भी नजर आना चाहिए।
अब देखना होगा कि नगर पालिका इस मामले में कचरे के ढेर को हटाने के साथ-साथ नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करती है या नहीं। साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर पालिका अपने सफाई वाहनों और कर्मचारियों की व्यवस्था की प्रभावी निगरानी किस प्रकार करती है।
फिलहाल गौरव पथ की तस्वीरें ‘स्वच्छ बचेली’ के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर की ओर इशारा करती नजर आ रही हैं।
वन विभाग की सतर्कता से बची संरक्षित वन्यप्राणी की जान
रायपुर / शौर्यपथ / वन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप और उनके संवेदनशील पहल के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले के मोहला तहसील के ग्राम कुंजंटोला में वन विभाग की टीम ने दुर्लभ वन्यप्राणी पैंगोलिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।
रविवार को ग्राम कुंजंटोला निवासी जयंत कुमार के घर में पैंगोलिन के घुसने की सूचना वन विभाग को मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में परिक्षेत्र अधिकारी पंकज पटेल के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने पैंगोलिन को सुरक्षित पकड़कर आरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया। इस अभियान में डिप्टी रेंजर श्री महेंद्र बघेल और श्री शोभित राम यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह रेस्क्यू अभियान वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, प्रशिक्षित टीम और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील कार्यप्रणाली का अच्छा उदाहरण है। समय पर मिली सूचना और समन्वित प्रयासों के कारण एक दुर्लभ एवं संरक्षित वन्यप्राणी को सुरक्षित बचाया जा सका।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें। लोगों की जागरूकता और सहयोग से वन्यजीवों का संरक्षण और भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शेड्यूल-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित प्रजाति है। इसके संरक्षण के लिए राज्य सरकार विशेष रूप से प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग वन्यजीव संरक्षण, त्वरित रेस्क्यू और जनजागरूकता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल पर मिली आर्थिक राहत
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, वन एवं बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार बीजापुर जिले में नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को पुनर्वास नीति के तहत कुल 32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।
यह सहायता उन नागरिकों के लिए स्वीकृत की गई है, जो नक्सली हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए हैं या स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे पीड़ितों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराना है।
इन पीड़ितों को मिलेगा लाभ
स्वीकृत सहायता राशि के अंतर्गत पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान क्रॉस फायरिंग में गंभीर रूप से घायल नंदू ओयाम और जिला कुंजाम, माओवादियों की मारपीट में घायल ईस्ता बोर्रा, बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल मितराम रावटे, आईईडी विस्फोट में घायल कोरसे संतोष, चिड़ेम कन्हैया और कविता कुड़ियम, माओवादियों की मारपीट से स्थायी रूप से दिव्यांग हुए इच्चामी सुदरू, तथा आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल या स्थायी रूप से दिव्यांग हुए राममूर्ति कारम, बबलू उर्फ मोहन कड़ती, गंगा कलमू, राजेश कुमार यादव और सोढ़ी मुकेश शामिल हैं।
डीबीटी के माध्यम से शीघ्र होगा भुगतान
कलेक्टर श्री विश्वदीप ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से शीघ्र संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सली हिंसा से प्रभावित नागरिकों को राहत, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही है। यह पहल पीड़ित परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और समर्पण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
जगदलपुर में एक सप्ताह के भीतर खाद विभाग की दूसरी बड़ी कार्रवाई, अवैध चावल कारोबारियों में मचा हड़कंप
जगदलपुर, शौर्यपथ। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीब एवं पात्र राशन कार्डधारकों को निःशुल्क वितरित किए जाने वाले चावल की अवैध खरीदी-बिक्री के खिलाफ खाद विभाग ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के भवानी चाट भंडार के पीछे स्थित दीप्ती बाड़ा के एक गोदाम से लगभग 378 बोरा (करीब 186 क्विंटल) पीडीएस चावल, लगभग 3 क्विंटल चना, 100 पीडीएस बारदाना तथा लोडिंग में लगे 12 चक्का ट्रक (CG 04 LC 9409) को जब्त किया है। बताया जा रहा है कि ट्रक रायपुर का है और कार्रवाई के समय उसमें चावल लोड किया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार खाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि गोदाम से बड़ी मात्रा में पीडीएस चावल बाहर भेजने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम ने मौके पर दबिश दी और कार्रवाई को अंजाम दिया। जब्त चावल को सुरक्षित रखने के लिए निकटस्थ शासकीय उचित मूल्य दुकान में रखवाया गया, जबकि ट्रक को आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए कोतवाली थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। पूरे मामले की रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजी गई है।
विभाग के अनुसार, इस मामले का संबंध मोहम्मद जिलानी नामक व्यक्ति से बताया जा रहा है। मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
खाद विभाग की एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। लगातार हो रही छापेमार कार्रवाई से शहर में पीडीएस चावल की अवैध खरीदी-बिक्री से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। विभाग के सख्त रुख से ऐसे कारोबार में संलिप्त लोगों के बीच भय का माहौल देखा जा रहा है।
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि संबंधित व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य द्वारा शासकीय उचित मूल्य (राशन) दुकान का संचालन किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि कहीं कथित अवैध चावल खरीदी-बिक्री के साथ-साथ पात्र हितग्राहियों के लिए आवंटित पीडीएस राशन के वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता या हेराफेरी तो नहीं हुई। इस संबंध में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पीडीएस का चावल शासन द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे चावल का अवैध भंडारण, परिवहन अथवा व्यापार न केवल शासन की जनकल्याणकारी योजना को प्रभावित करता है, बल्कि पात्र हितग्राहियों के अधिकारों पर भी सीधा असर डालता है। अब इस मामले में जांच पूरी होने और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
बारिश में भवन से टपक रहा पानी, जीवनरक्षक दवाओं की सुरक्षा पर सवाल; DMF और CSR फंड के बावजूद नहीं हुआ स्थायी समाधान
रिपोर्टर: कृष्णा मंडल
लोकेशन: दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा। प्रदेश के सबसे अधिक डीएमएफ (DMF) और सीएसआर (CSR) फंड प्राप्त करने वाले जिलों में शामिल दंतेवाड़ा में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के एकमात्र जिला अस्पताल में करोड़ों रुपये मूल्य की जीवनरक्षक दवाओं का स्टोर रूम जर्जर हालत में पहुंच चुका है। बारिश के दौरान भवन से पानी रिसने के कारण दवाओं के खराब होने का खतरा बना हुआ है।
स्थिति यह है कि अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारी स्टोर रूम में रखी दवाओं को बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लेने को मजबूर हैं। जिस भवन की मरम्मत या नए निर्माण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है, वहां फिलहाल अस्थायी इंतजामों के भरोसे दवाओं को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में हर वर्ष भवन निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन अस्पताल के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक मेडिसिन स्टोर की हालत बेहद खराब बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब दंतेवाड़ा को DMF और CSR के माध्यम से पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, तब भी इस भवन के सुधार को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
बारिश के मौसम में भवन के भीतर पानी रिसने से जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार कई दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है, ऐसे में नमी और रिसाव उनकी गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या करोड़ों रुपये की दवाओं की सुरक्षा केवल तिरपाल के भरोसे की जा सकती है? इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान शीघ्र किया जाना चाहिए, ताकि मरीजों के उपचार के लिए रखी गई दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार; 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' योजनाओं पर दिया जोर
रायपुर / शौर्यपथ / कोण्डागांव जिले के मर्दापाल में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने शनिवार को नवनिर्मित ग्राम पंचायत भवन एवं महतारी सदन का लोकार्पण किया। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से बने पंचायत भवन तथा 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन को उन्होंने ग्रामीणों को समर्पित करते हुए इसे गांव के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
महतारी सदन बनेगा महिला सशक्तिकरण का केंद्र
लोकार्पण के बाद मंत्री श्री कश्यप ने बिहान स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका गतिविधियों और आय में आए बदलाव की जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलने लगे हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
इस अवसर पर श्री कश्यप ने कहा कि महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
फलदार पौधों और पशुपालन को अपनाने की अपील
वन मंत्री ने महिलाओं से फलदार पौधों का रोपण, पशुपालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर योजना और मेहनत के साथ इन गतिविधियों को अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महतारी सदन महिला स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता कोर्राम, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती यशोदा कश्यप, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, जनपद सदस्य श्रीमती कौशल्या कोर्राम, श्रीमती जयमती कश्यप, श्री रामूराम कोर्राम, श्री रामचन्द्र कश्यप, श्री रामकुमार कोर्राम, श्री रमेश सेठिया, श्री आसमन कोर्राम, श्री लक्ष्मीकांत बेलसरिया, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक श्री विनय सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
शौर्यपथ की नजर
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन और महतारी सदन जैसी आधारभूत सुविधाएं केवल भवन नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम हैं। यदि इन केंद्रों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए तो स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने के साथ महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता भी सशक्त होगी।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संवेदनशील नेतृत्व एवं वन एवं प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस अभियान के तहत करीब 1,200 बच्चों को पुनः विद्यालयी शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।
कलेक्टर श्री विश्वदीप एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग के शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों की घर-घर सर्वेक्षण के माध्यम से पहचान की गई। इसके बाद उन्हें आवासीय पोर्टा केबिन विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर शिक्षा की नई शुरुआत कराई गई है।
खेल-खेल में लौट रहा स्कूल का भरोसा
वर्षों से स्कूल से दूर रहे बच्चों को सीधे पढ़ाई में शामिल करने के बजाय पहले उन्हें विद्यालय के माहौल से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसके लिए खेलकूद, चित्रकला, नृत्य, टेलीविजन आधारित गतिविधियां और शैक्षणिक भ्रमण जैसी मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया, ताकि बच्चों में विद्यालय के प्रति अपनापन और रुचि विकसित हो सके।
90 दिन का विशेष ब्रिज कोर्स
बच्चों की शैक्षणिक स्थिति को मजबूत करने के लिए 90 दिवसीय विशेष ब्रिज कोर्स संचालित किया जा रहा है। इस दौरान भाषा, लेखन, पठन और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे बच्चे नियमित पढ़ाई के लिए तैयार हो सकें।
मूल्यांकन के बाद तय होगी कक्षा
ब्रिज कोर्स पूर्ण होने के बाद बच्चों की मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा के परिणाम के आधार पर उनकी सीखने की क्षमता का आकलन कर उन्हें उपयुक्त कक्षा में नियमित प्रवेश दिया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि वर्षों बाद इतनी बड़ी संख्या में बच्चे दोबारा विद्यालय लौट रहे हैं। ऐसे में उनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित देखभाल और बेहतर सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश
जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों—डीईओ, डीएमसी, बीईओ, बीआरसी एवं संकुल समन्वयकों—की बैठक लेकर निर्देश दिए हैं कि बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण अध्यापन और भोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे सहजता से विद्यालयी वातावरण में ढल सकें।
शौर्यपथ की नजर
बीजापुर जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 1200 बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास है। यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है तो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी शाला त्यागी बच्चों को वापस विद्यालय तक लाने के लिए यह एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
