कोंडागांव, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कोंडागांव जिला 2012 से जिला घोषित हो गया था जिसके बाद से अब तक जिले में सभी जिलेवासियों को शासन की सभी योजनाओं को पूरा किया जा रहा है । मगर एक तरफ ध्यान दिया जाए तो एक बड़ी बात सामने आती है देश एक कठनाई से गुजर रहा है जहाँ पेट्रोल व डीजल की किल्लत देखा जा रहा है।
वही अगर बात करे कोंडागांव की तो
न्यायालय कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर जेल भेजती है जो कोंडागांव मुख्यालय से 60 से 50 किलोमीटर दूर पड़ता है जहाँ रोजना कैदियों को लाने में मशक्कत की जाती है अगर कोंडागांव जिला मुख्यालय में भी एक जेल या उप जेल बन जाए तो पुलिस को राहत मिलेगी।
समस्या क्या है?
कोंडागांव को 2012 में जिला घोषित किया गया था
इसके बावजूद यहां अभी तक जिला जेल/उप-जेल नहीं है
कोर्ट (न्यायालय) से कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर भेजा जाता है
यह दूरी लगभग 50–60 किलोमीटर है
इससे क्या दिक्कतें हो रही हैं?
पुलिस को रोज कैदियों को ले जाने में अधिक मेहनत और संसाधन खर्च
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच आर्थिक बोझ
सुरक्षा जोखिम भी बढ़ता है (लंबी दूरी पर ट्रांजिट)
कैदियों और उनके परिजनों को असुविधा
अब देखने वाली बात होगी कि शौर्यपथ की इस खबर से जिला प्रशासन व शासन क्या कदम उठाएगी।