रायपुर/लोरमी / लोरमी के डबरी पारा तालाब का जल्द ही जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। मिशन अमृत 2.0 के तहत राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने इसके लिए ₹2 करोड़ 57 लाख 62 हजार की स्वीकृति दी है। परियोजना के तहत तालाब की सफाई, गहरीकरण, जल गुणवत्ता में सुधार, जल निकासी और नागरिक सुविधाओं के विकास सहित विभिन्न कार्य किए जाएंगे।
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव की पहल पर स्वीकृत इस परियोजना का उद्देश्य तालाब परिसर को स्वच्छ, सुंदर और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है। कार्यों को नौ माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण के बाद पांच वर्ष तक संचालन-संधारण भी परियोजना में शामिल है।
टहलने के लिए पाथवे, बैठने को बेंच और तीन घाट
परियोजना के अंतर्गत तालाब के किनारों पर पाथवे, नागरिकों के बैठने के लिए बेंच तथा तीन घाट बनाए जाएंगे। किनारों को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए आरसीसी रिटेनिंग वॉल का निर्माण होगा। परिसर में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी और हरियाली विकसित की जाएगी।
तालाब के पुनर्जीवन के लिए गहरीकरण, डी-सिल्टिंग, साफ-सफाई और जलकुंभी हटाने का काम भी होगा। पानी की उपलब्धता के लिए बोरवेल और पंप की व्यवस्था की जाएगी।
पानी की गुणवत्ता सुधारने लगेंगे चार फ्लोटिंग एरेटर
तालाब के पानी की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए चार फ्लोटिंग एरेटर और दूषित जल के उपचार के लिए 10 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलडी) क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा।
बारिश और अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए नालियां, बायो-स्वेल तथा ओवरफ्लो पाइपलाइन बनाई जाएगी। परियोजना का कुल क्षेत्रफल 7,026 वर्गमीटर है, जिसमें 4,615 वर्गमीटर जल क्षेत्र शामिल है।
गुणवत्ता के साथ समय-सीमा पर जोर
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि तालाब का जीर्णोद्धार नागरिकों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा, ताकि लोगों को टहलने, बैठने और बेहतर वातावरण में समय बिताने की सुविधा मिल सके।
विभागीय सचिव श्री सोनमणि बोरा ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने, नियमित निगरानी रखने और सभी कार्य निर्धारित नौ माह में पूरे करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जल शोधन और निकासी की तकनीकी गुणवत्ता के साथ निर्माण के बाद पांच वर्ष तक उचित संचालन-संधारण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।