1281 प्रतिभागियों ने 16 कला विधाओं में निखारी प्रतिभा, लोक संस्कृति और आधुनिक तकनीक का हुआ अनूठा संगम
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, कला, संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प और आधुनिक रचनात्मकता को एक मंच पर समेटने वाला संस्कृति विभाग का प्रतिष्ठित कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ रंगारंग प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक उल्लास के बीच भव्य रूप से संपन्न हो गया। 25 मई से 9 जून तक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर में आयोजित 16 दिवसीय शिविर में प्रदेशभर से आए 1281 प्रतिभागियों ने 16 विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी प्रतिभा को नई उड़ान दी।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना समय की मांग : बृजमोहन अग्रवाल
समापन समारोह के मुख्य अतिथि एवं रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मिट्टी, प्रकृति और सृजन से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा, "जिस दिन बच्चे मिट्टी से जुड़कर सृजन करना सीख जाएंगे, उनका जीवन संवेदनशीलता और आनंद से भर जाएगा। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं की जानकारी देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।"
उन्होंने सुझाव दिया कि ‘आकार’ जैसे शिविर प्रदेश के सभी संभागों में आयोजित किए जाएं तथा छत्तीसगढ़ी हस्तशिल्प और पारंपरिक आभूषणों के लिए स्थायी विक्रय केंद्र विकसित किए जाएं, ताकि कलाकारों को बेहतर बाजार और आर्थिक अवसर मिल सकें।
परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम
संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि ‘आकार’ केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने का सशक्त अभियान है।
इस वर्ष शिविर की विशेषता रही कि प्रतिभागियों को एक ओर टेराकोटा, गोदना कला, जूट शिल्प, रजवार भित्ति चित्र, मंडला-मांडना कला, कथक, भरथरी गायन और लोककलाओं का प्रशिक्षण दिया गया, वहीं दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कला तकनीकों से भी परिचित कराया गया। इससे परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण हुआ।
लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर रहा समापन समारोह
समापन अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने पूरे परिसर को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत सुवा, कर्मा, पंथी नृत्य, बांसगीत, भरथरी गायन और लोकसंगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों की मधुर ध्वनि और कलाकारों की जीवंत ऊर्जा ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कला गुरुओं को किया गया सम्मानित
समारोह में मुख्य अतिथि ने विभिन्न विधाओं के प्रशिक्षकों और कला गुरुओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। शिविर में प्रदेश के प्रतिष्ठित कलाकारों और विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देकर उनकी रचनात्मक क्षमता को नई दिशा प्रदान की।
सांस्कृतिक चेतना का नया अध्याय
‘आकार-2026’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर केवल इतिहास की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी है। 1281 प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, अनुभवी कला गुरुओं का मार्गदर्शन और लोक संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों ने इस आयोजन को प्रदेश के सांस्कृतिक कैलेंडर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बना दिया।