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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव का शुभारंभ
अंचल के विकास के लिए सिरपुर बैराज जल्द ही स्वीकृत होगी
रायपुर /
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि सिरपुर को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके अंतर्गत आधुनिक सड़क, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, पर्यटक सुविधा केंद्र एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर का टूरिस्ट कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।
सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल सिरपुर में आयोजित तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव का भव्य शुभारंभ अवसर पर आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय उक्त बात कही हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता खाद्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि सिरपुर की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस गौरवशाली विरासत से परिचित हो सकें। उन्होंने जिलेवासियों को माघी पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महानदी के तट पर स्थित श्री गंधेश्वर महादेव के आशीर्वाद से यह क्षेत्र निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सिरपुर छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आज जिले को लगभग 200 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात दी गई है, जिससे सड़क, पुल, पेयजल , पर्यटन, पेयजल एवं अधोसंरचना के क्षेत्र में तेजी आएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज यहां मलेशिया,कोरिया, जापान के बौद्ध विचारक पधारे है, उनका मैं स्वागत करता हूं।उन्होंने कहा कि सिरपुर में सनातन, बौद्ध और जैन संस्कृति का विस्तार हुआ, यह संस्कृति का अदभुत संगम है। सिरपुर में पर्यटन के विकास की संभावनाओं को देखते हुए सरकार इसे विश्व धरोहरों में शामिल करने गंभीरता से प्रयास कर रही है। देश दुनिया में सिरपुर का नाम होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंचल के विकास के लिए सिरपुर बैराज की स्वीकृति भी जल्दी होगी। सिकासेर जलाशय से कोडार जलाशय में पानी लाने के लिए योजना पर शीघ्रता से कार्य जारी है। इससे क्षेत्र के किसानों को लगातार सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
खाद्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने कहा कि सिरपुर महोत्सव आज जिले की विशिष्ट पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि सिरपुर महोत्सव के माध्यम से जिले को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इससे युवाओं को आगे बढ़ने का मंच मिल रहा है और स्थानीय प्रतिभाओं को नई दिशा प्राप्त हो रही है। प्रभारी मंत्री श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं एवं गरीब वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
विधायक महासमुंद श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि आज इस पावन धरती सिरपुर में इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महोत्सव का साक्षी बनने का अवसर मिला है। यह वही भूमि है जहाँ धर्म, कला और ज्ञान का अद्भुत संगम हुआ है। विधायक श्री सिन्हा ने कहा कि आज हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सिरपुर के संरक्षण, विकास और वैश्विक पहचान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सड़क, बिजली, जल, पर्यटन सुविधाओं और आधारभूत संरचनाओं के विकास से यह क्षेत्र नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर हो रहा है।
इस अवसर पर विधायक महासमुंद श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, विधायक बसना श्री संपत अग्रवाल, साजा विधायक श्री ईश्वर साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोंगरा पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष श्री चन्द्रहास चन्द्राकर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भीखम सिंह ठाकुर, नगर पालिका अध्यक्ष महासमुंद श्री निखिल कांत साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दिशा दीवान, नगर पंचायत अध्यक्ष बसना डॉ. खुशबू अभिषेक अग्रवाल, पूर्व विधायक डॉ विमल चोपडा, राज्य मुख्य आयुक्त, भारत स्काउट एवं गाइड संघ श्री इंद्रजीत सिंह खालसा गोल्डी,कलेक्टर श्री विनय लंगेह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रभात कुमार, साडा के सीईओ श्री धम्म शील गणवीर ,जिला पंचायत सीईओ श्री हेमंत नंदनवार सहित, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
डीके कॉलेज बलौदाबाजार में राज्य स्तरीय एनएसएस शिविर का हुआ समापन
रायपुर /
दाऊ कल्याण शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलौदाबाजार में आयोजित 7 दिवसीय राज्य स्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) शिविर का मंगलवार को गरिमामय समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
राज्य स्तरीय इस शिविर में प्रदेश के 9 विश्वविद्यालयों एवं उनसे सम्बद्ध महाविद्यालयों के कुल 270 स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। सात दिनों तक चले शिविर के दौरान विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि युवाओं में अपार ऊर्जा होती है और यदि इस ऊर्जा को सही दिशा में लगाया जाए तो राष्ट्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एनएसएस जैसे शिविर युवाओं को अनुशासन, संयम और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराते हैं, जो जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं।
उन्होंने संगत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अच्छी संगत व्यक्ति के व्यक्तित्व को सकारात्मक रूप से गढ़ती है, इसलिए युवाओं को सदैव अच्छे विचारों और मूल्यों से जुड़ना चाहिए। स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का स्मरण कराते हुए उन्होंने युवाओं से उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नई पहल कर रही है, ताकि प्रदेश के युवाओं को यहीं उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा एवं संस्थान उपलब्ध हो सकें।
समापन समारोह में पूर्व विधायक श्री प्रमोद शर्मा, भारत स्काउट एवं गाइड के राज्य उपाध्यक्ष श्री विजय केशरवानी, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री जितेन्द्र महले सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी शामिल हुए।
रायपुर, ।
कृषि उपज मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता और शासकीय राजस्व की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने सख़्त रुख अपनाते हुए ई-मंडी प्रणाली में हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। नगरी कृषि उपज मंडी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुटकेल स्थित थोक धान व्यापारी शिवम ट्रेडर्स के विरुद्ध गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर प्रशासन ने फर्म को सीलबंद कर दिया है तथा संचालक के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।
अनुविभागीय दण्डाधिकारी, नगरी के आदेश पर गठित चार सदस्यीय जांच दल ने 11 जनवरी 2026 को फर्म का स्थल निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया। जांच प्रतिवेदन 14 जनवरी 2026 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें ई-मंडी/एग्री पोर्टल से जारी अनुज्ञा पत्रों, स्टॉक पंजी (बी-1) तथा बोराई मंडी चेक पोस्ट के आवक-जावक अभिलेखों का सूक्ष्म मिलान किया गया।
जांच के दौरान यह सामने आया कि फर्म द्वारा ई-मंडी पोर्टल से जारी अनुज्ञा पत्रों की तुलना में स्टॉक पंजी में धान की जावक मात्रा अधिक दर्शाई गई। कई मामलों में पीडीएफ दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर धान की मात्रा बढ़ाई गई, बिना वैध ई-मंडी अनुज्ञा पत्र के धान का परिवहन किया गया तथा चेक पोस्ट पर संशोधित व भ्रामक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
जांच दल के अनुसार कुल 47 अनुज्ञा पत्रों में कूट रचना कर लगभग 5,656 क्विंटल धान का अवैध परिवहन किया गया। इस फर्जीवाड़े से छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 के अंतर्गत मंडी शुल्क, कृषक कल्याण शुल्क एवं निराश्रित शुल्क सहित लगभग ₹2.48 लाख के कर अपवंचन की संभावना पाई गई है।
इन गंभीर तथ्यों के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), नगरी के निर्देशानुसार शिवम ट्रेडर्स को मौके पर ही सीलबंद कर दिया गया। साथ ही फर्म संचालक संतोष खंडेलवाल के विरुद्ध कूट रचना कर फर्जी अनुज्ञा पत्र तैयार करने एवं अवैध परिवहन के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 339 एवं 340 के तहत थाना बोराई में FIR दर्ज की गई है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता, किसानों के हितों की रक्षा तथा शासकीय राजस्व का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। कर अपवंचन, दस्तावेजों में छेड़छाड़ या किसी भी प्रकार की अनियमितता पर आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी तथा मंडी क्षेत्रों में सघन निरीक्षण अभियान लगातार चलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने गौमाता पर बनी पहली फिल्म-'गोदान' का किया ट्रेलर लॉन्च
मुख्यमंत्री ने की फिल्म-'गोदान' को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने की घोषणा
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गौमाता पर बनी पहली फिल्म-'गोदान' का ट्रेलर लॉन्च किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गौमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। गौमाता ना सिर्फ आध्यात्मिक रूप से पूजनीय हैं बल्कि गाय का आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बहुत महत्व है। मुख्यमंत्री श्री साय ने फिल्म-'गोदान' को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री किए जाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने फिल्म-'गोदान' के ट्रेलर लॉन्च के अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ में गौ संवर्धन के लिए बहुत कार्य हो रहा है। गौशाला में गायों के चारा के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि को 20 रुपए से बढ़ाकर 35 रुपए किया गया है साथ ही गौशाला को अब 25 लाख रुपए की सहायता राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गोधाम भी बनाए जा रहे हैं जहां घुमंतू गौवंश की उचित देखभाल की जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मान्यता है कि गौमाता में 33 कोटि देवी- देवताओं का वास रहता है। हर अनुष्ठान से पहले पंचगव्य का उपयोग किया जाता है। ये बहुत खुशी की बात है कि गौमाता पर केंद्रित पहली फिल्म-'गोदान' का आज ट्रेलर लॉन्च किया जा रहा है। इस फिल्म के माध्यम से सभी को गौमाता के महत्व को और बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। मैं इस फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बहुत बधाई देता हूं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमें गौमाता के महत्व के प्रति जन-जन को जागरूक करना है। गाय के गोबर से बनी जैविक खाद ही ऑर्गेनिक खेती का आधार है। दो घंटे 9 मिनट की इस फिल्म के माध्यम से गौ संवर्धन का संदेश दर्शकों तक पहुंचेगा। फिल्म का माध्यम एक बहुत सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा एक बड़े दर्शक वर्ग तक सकारात्मक संदेश को पहुंचाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने फिल्म के पोस्टर तथा गीत ' गौमाता के प्राणों को बचा लो देशवासियों' का भी लॉन्च किया। उन्होंने पंचगव्य उत्पाद के गिफ्ट पैक का भी विमोचन किया। गौमाता की महत्ता को अभिव्यक्त करने वाली कामधेनु फिल्म प्रोडक्शंस की फिल्म गोदान 6 फरवरी को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
इस अवसर पर श्री अजीत महापात्र, श्री शांतनु शुक्ला, फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक श्री विनोद चौधरी, डॉ आईपी सिंह, श्री सुबोध राठी सहित अन्य गणमान्यजन और मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
रायपुर /भारत के आर्थिक भविष्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला एक ऐतिहासिक क्षण सामने आया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी और सशक्त नेतृत्व में संपन्न हुई ‘Mother of All Deals’ यानी IndiaEUTradeDeal भारत को एक सशक्त आर्थिक शक्ति के रूप में वैश्विक पटल पर नए शिखर तक पहुँचाने वाली सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह युगांतरकारी डील भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का विश्वसनीय, सशक्त और प्रभावशाली केंद्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह समझौता भारत की आर्थिक विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत करेगा तथा देश को वैश्विक व्यापार की मुख्यधारा में निर्णायक भूमिका प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता केवल व्यापारिक करार भर नहीं है, बल्कि यह भारत के करोड़ों युवाओं के सपनों को पंख देने वाला अवसर है। इससे रोजगार, निवेश, तकनीक और नवाचार के नए द्वार खुलेंगे, जिससे युवाओं की आकांक्षाओं को नई दिशा और गति मिलेगी।
उन्होंने आगे कहा कि #IndiaEUTradeDeal देश की आर्थिक आकांक्षाओं को मजबूती प्रदान करते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का एक सुदृढ़ आधार बनेगा। यह समझौता आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को वैश्विक सहयोग के साथ जोड़ते हुए भारत को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और समृद्धि की ओर अग्रसर करेगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह भारत की सामूहिक शक्ति, नीति-निर्माण क्षमता और वैश्विक नेतृत्व का प्रतीक है, जो आने वाले वर्षों में देश को आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
रायपुर / गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा आज यहां राजधानी रायपुर में पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और परेड की सलामी ली गई। परेड निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव श्री विकास शील और पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम भी उपस्थित थे।
राज्यपाल श्री डेका ने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह पवित्र अवसर हमें राष्ट्र की एकता और अखण्डता को सहेजते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता हैं। गणतंत्र दिवस भारतीय लोकतंत्र की महान परंपरा तथा हमारे संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।
विज्ञानसम्मत बाल साहित्य का लेखन अनिवार्य : डॉ. विकास दवे
साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं : श्री बलदाऊ राम साहू
रायपुर,/ रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप में बाल साहित्य की प्रासंगिकता का सत्र ख्यातिलब्ध साहित्यकार नारायण लाल परमार को समर्पित रहा। जिसमें साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. विकास दवे, बाल साहित्यकार श्री बलदाऊ राम साहू बतौर वक्ता परिचर्चा में शामिल हुए, जिसके सूत्रधार श्री एस के बिसेन रहे। इस अवसर पर देवभोग के कृष्ण कुमार अजनबी द्वारा लिखित बाल कविता संग्रह आंखों का तारा, श्री ओमप्रकाश जैन की पुस्तक जीवन चक्र और श्री संतोष कुमार मिरी की पुस्तक जीवन बोध का विमोचन किया गया।
परिचर्चा में अपने संबोधन में डॉ. विकास दवे ने कहा कि बाल साहित्य का पाठक एकमात्र ऐसा पाठक है जो स्वयं क्रेता नहीं होता, न ही निर्णायक होता है। एक समय था जब बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों में बच्चे अपने पालकों से बाल साहित्य खरीदने की जिद करते थे। डॉ. दवे ने कहा कि हमें बच्चों को सरल साहित्य सिखाना होगा। अंग्रेजी के नाम पर हम कितने सारे उपक्रम कर रहे हैं। उन्होंने पालकों से अपील की कि बच्चों को बाल साहित्य लेकर दें साथ ही एक हिंदी शब्दकोश भी दें ताकि जब कोई शब्द समझ न आए वह शब्दकोश में ढूंढ सके।उन्होंने आज के समय में विज्ञानसम्मत बाल साहित्य के लेखन को अनिवार्य बताया।
श्री बलदाऊ राम साहू ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों को गढ़ता है, उन्हें विचार देता है। बाल साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। बाल साहित्य को यदि हम पाठ्यपुस्तक से निकाल दें तो कुछ नहीं बचता। बाल साहित्य बच्चों को प्रेरित करता है। बच्चों को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों में पढ़ने की परंपरा कम हो रही है, बाल पत्रिकाएं बंद होती जा रही हैं।
श्री साहू ने कहा कि शिक्षक बच्चों का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं कर पाते। लोग बाल साहित्य को मनोरंजन का साधन नहीं, सद्विचारों का विचारों का संग्रह है। बच्चों को संवेदनशील मनुष्य बनाने में बाल साहित्य का बड़ा महत्व है। श्री साहू ने बाल साहित्य को जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बाल साहित्य बच्चों के लिए भाषा संस्कार की पाठशाला है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को बाल साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा।
परिचर्चा के सूत्रधार श्री एस के बिसेन ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि धीरे-धीरे पुस्तकों से पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियां गायब हो रही हैं। उन्होंने नैतिक शिक्षा के पाठ में बाल साहित्य को बहुत जरूरी बताया और कहा कि बाल साहित्य संस्कार और व्यवहार का मूल आधार है।
शासन और साहित्य विषय पर पूर्व आईएएएस अधिकारियों के साथ सूत्रधार कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने की चर्चा
प्रेमचंद, शरद जोशी, सार्त्र और वाक्लाव हैवेल जैसे साहित्यकारों विचारकों के उद्दरणों के साथ सार्थक चर्चा का हुआ आयोजन
लाला जगदलपुरी मंडप में हुआ आयोजन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय केयूर भूषण को किया गया नमन
रायपुर । शासन और साहित्य विषय पर आज लाला जगदलपुरी मंडप में दिलचस्प चर्चा हुई। सूत्रधार थे कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और अतिथि वक्ता थे पूर्व आईएएस अधिकारी श्री बीकेएस रे, श्रीमती इंदिरा मिश्रा, डॉ. सुशील त्रिवेदी और डॉ. संजय अलंग। साहित्य में गहरी दिलचस्पी रखने वाले और अपनी प्रशासनिक क्षमता से प्रदेश में पहचान छोड़ने वाले अधिकारियों ने सूत्र बताए कि किस तरह साहित्य शासन-प्रशासन को जनकल्याण के लिए लगातार सकारात्मक दिशा में लेकर जाता है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि साहित्य समाज को जगाता है। डॉ. सिंह ने कहा कि अगर साहित्य केवल प्रशंसा करता है तो वो कमजोर हो जाता है और शासन यदि केवल नियंत्रण करता है तो वो कठोर हो जाता है इसलिए लोकतंत्र की असली ताकत यही है कि आलोचना को सुना जाए और संवेदना को नीति में बदला जाए। उन्होंने हिंदी साहित्य के इतिहास के प्रसंग बताते हुए कहा कि किस प्रकार वीरगाथा काल में कवियों ने राष्ट्रबोध जगाया और भक्तिकाल में उन्होंने वो मानक बताये जिससे शासन को चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्य हमेशा केंद्र में रहा है और साहित्यकारों ने अपने प्रखर विचारों को हमेशा रखा। इस मौके पर डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि साहित्य की शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता संग्राम में हमारे अनेक नेता साहित्यकार रहे। उस दौर में अंग्रेजों की आलोचना करने वाले साहित्यकारों की किताबों पर बैन लगाया गया। यह साहित्य की शक्ति है। उन्होंने दिनकर को उद्धृत करते हुए कहा कि जब राजनीति फिसलती है तो साहित्य उसे संभालता है। यह साहित्य की बड़ी शक्ति है। डॉ. संजय अलंग ने कहा कि साहित्यकार जो देखते हैं उसे लिख देते हैं यह आलोचना भी होती है और प्रशंसा भी होती है। नमक का दरोगा कहानी पढ़े तो ये ईमानदार अधिकारी की कहानी है और इस कहानी ने न जाने कितने लोगों के भीतर ईमानदारी के भाव भरे लेकिन सिस्टम में विसंगतियों को भी अनेक कहानियां अथवा निबंध सामने लाते हैं। उन्होंने शरद जोशी के लिखे व्यंग्य लेख जीप पर सवार इल्लियां का जिक्र किया। श्रीमती इंदिरा मिश्रा ने लेखिका तसलीमा नसरीन का जिक्र किया कि उन्होंने सच्चाई को सामने लाने की हिम्मत दिखाई और उन्हें निर्वासन सहना पड़ा। साहित्य सच को सामने लाता है और समाज को आइना दिखाता है। साहित्य संवेदनशीलता लाता है और जनकल्याणकारी शासन की नींव तैयार करता है। इस मौके पर बीकेएस रे ने कहा कि साहित्य हमारे मनोविज्ञान को बदलता है और एक संवेदनशील मनुष्य बेहतर प्रशासक बनता है। श्री रे ने फ्रांस के स्टूडेंट मूवमेंट का उदाहरण बताते हुए कहा कि नोबल पुरस्कार प्राप्त जीन पाल सार्त्र के नेतृत्व में हो रहे मूवमेंट को रोकने कैबिनेट के बैठक में चर्चा चली। जब किसी ने सार्त्र को गिरफ्तार करने की बात कही तो चार्ल्स डी गाव ने कहा कि हम इस सदी के वाल्तेयर को गिरफ्तार करने का जोखिम नहीं उठा सकते। यह साहित्य की शक्ति है। श्री रे ने वाक्लाव हैवल जैसे विचारकों के प्रमुख उद्दरणों को रखा और इसके माध्यम से अपनी बात कही। सूत्रधार डॉ. गौरव सिंह ने अंत में चर्चा के निष्कर्ष के रूप में कहा कि साहित्य संवेदनशीलता प्रदान करता है समझ प्रदान करता है इसलिए हर युग में वो केंद्र में रहा है। उन्होंने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव जैसे आयोजनों से साहित्य के प्रति लोगों की जागरकूता बढ़ाने में मदद मिलती है।
इस अवसर पर उप संचालक श्री सौरभ शर्मा ने शासकीय गमछा पहनाकर स्वागत किया एवं संयुक्त संचालक श्री हीरा देवांगन ने प्रतीक चिन्ह प्रदान किया। साथ ही कुछ नवोदित साहित्यकारों के पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
रायपुर साहित्य उत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल
रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल श्री डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर प्रदान करता है।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।
श्री डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवांे के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए।
श्री डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। श्री डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं।
समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।
समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक श्री अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा , राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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