विडंबना यह है कि खरीदनें वालों में नगरपालिका व पुलिस विभाग के कर्मचारी भी शामिल है।
मिली जानकारी के मुताबिक जिला प्रशासन ने संक्रमण को रोकने 15 मई तक जिले में लॉकडाउन का आदेश जारी किया है ।
सप्ताह में एक दिन प्रत्येक रविवार को संक्रमण की चेन तोड़ने पूर्ण लॉक डाउन लगाया गया है। केवल इमरजेंसी सेवा को अस्पताल और मेडिकल को इससे मुक्त रखा गया है।
परंतु धमतरी शहर में इसकी खुलकर धज्जियां उड़ई जा रही है।
एक डेयरी संचालक द्वारा अपने डेरी फॉर्म में खुलकर चिकन मुर्गा मुर्गी बेचते दिखाई दिया। इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि उक्त डेरी फॉर्म मे नगर निगम की कर्मचारी भी चिकन खरीदते दिखाई दिए। यही नहीं कुछ पुलिसकर्मी भी देसी मुर्गा लेकर जाते दिखे बताया गया है कि डेयरी संचालक की नगर निगम कर्मचारी पार्षद और पुलिस वालों से अच्छी जमती है। इसी की एवज में उसने रेट का भी जमकर फायदा उठाया बताया गया है कि chaube kakrel मार्केट में ₹180 में बिक रहा है, उसकी बिक्री ढाई सौ से 300 तक की गई ।वही देसी मुर्गा ₹500 किलो से ₹600 किलो तक बेचा गया। इसी तरह सिहावा रोड के कुछ काम वाले भी दिन भर दिन भर बायलर चिकन बेचते दिखाई दिए। परंतु कोई भी टीम इन पर रोक लगाने नहीं पहुंची।
इस दौरान सोशल डिस्टेंस की खुलकर धज्जियां उड़ी।
संपूर्ण लॉक डाउन होने के बावजूद सुबह 9:00 से 12:00 तक इन जगहों में अच्छी खासी भीड़ दिखाई दी। नगर निगम की टीम पुलिस विभाग कि वाहन उन जगहों पर ही दौड़ लगाती रही, जहां मुर्गा मटन मार्केट है।
पूर्ण लॉक डाउन के दौरान जलालपुर, नंदी चौक, बांसवाड़ा, नाचन के पास सिहावा रोड के फॉर्म, रामबाग में खुलकर चिकन की बिक्री हुई।