दुर्ग / शौर्यपथ / शहर के निगम सरकार में कांग्रेस 20 सालो बाद सत्ता में आई है . निगम के सत्ता में आते ही प्रभारी विभागों में सबसे ज्यादा महत्तवपूर्ण विभाग की गिनती में पीडब्ल्यूडी विभाग आता है . निगम की कांग्रेस सरकार ने पीडब्ल्यूडी का प्रभार निगम के सबसे अनुभवी पार्षद अब्दुल गनी को दिया ताकि शहर के विकास कार्य में तेजी आये और गुणवत्ता से समझौता ना हो किन्तु निगम के इन 4-5 महीनो के कार्यकाल में ऐसे कई वाकये सामने आने लगे जिससे निगम के कार्यो में विरोधाभास नजर आने लगा . पीडब्ल्यूडी विभाग की बात करे तो जो कार्य पीडब्ल्यूडी में सदस्य रहते हुए तात्कालिक पार्षद को गलत लग रहा था आज वही पार्षद और पीडब्ल्यूडी प्रभारी अब्दुल गनी को सही लगने लगा ऐसा क्या हुआ इन ५ महीनो में जो प्रभारी के सोंच में आमूलचूल परिवर्तन दिखने लगा .
बता दे कि शिवनाथ नदी मुक्ति धाम के कार्य में 18 प्रतिशत बिलो की निविदा को एमआईसी की पहली बैठक में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा निरस्त करने की अनुशंसा की गयी थी ये अलग बात है कि 18 प्रतिशत बिलों के इस कार्य जो सांसद सरोज पाण्डेय की अनुशंसा पर हो रहा था के बाद 22 प्रतिशत के कार्य की अनुशंसा को अनुमति प्राप्त हो गयी और बाद में १८ प्रतिशत के मुक्तिधाम के कार्य को भी अनुमति प्राप्त हो गयी एमआईसी की बैठक में . पूर्व पीडब्ल्यूडी प्रभारी दिनेश देवांगन ने शौर्यपथ से चर्चा में कहा कि जब कांग्रेस विपक्ष में थी तब पीडब्ल्यूडी विभाग में सलाहकार समिति में सदस्य रहे अब्दुल गनी १५-२० प्रतिशत बिलों के कार्यो की गुणवत्ता के निम्न स्तर होने की बात कर विरोध करते रहे किन्तु आज जब कांग्रेस की निकाय से लेकर प्रदेश तक सरकार है और अब्दुल गनी पीडब्ल्यूडी प्रभारी है तब उनकी यह निति अब क्यों परिवर्तित हो गयी अब २०-२५ प्रतिशत बिलों कार्य की गुणवत्ता का क्या होगा . क्या अब कांग्रेस के राज में निर्माण के कार्यो की सामग्री की कीमत कम हो गयी क्या महंगाई दर कम हो गयी क्या , मजदूरी कम हो गयी जो अब बिलों रेट पर भी कार्य की अनुशंसा कर रहे है पीडब्ल्यूडी प्रभारी गनी या उन्हें भी मालुम है कि 20-25 प्रतिशत बिलों रेट पर भी कार्य किया जा सकता है . अगर ऐसा है तो क्या सिर्फ तथ्यहीन विरोध कर विपक्ष में रहकर चर्चा में रहना चाहते थे और जनता को गुमराह कर रहे थे .
बता दे कि वर्तमान में ही दुर्ग के एमआईसी भवन में पुताई के कार्य की बात तो ईई गोस्वामी ने बताई किन्तु पुताई , वालपेपर , कांच का दरवाज़ा , खिडकिया आदि के कामो की जानकारी के बारे में ईई गोस्वामी फाइल देख कर बताने की बात कर रहे है किन्तु महीने भर हो गए समय अभाव की बात कहकर जानकारी नहीं दे रहे क्या पीडब्ल्यूडी प्रभारी इस अनियमितता पर कोई सख्त कदम उठाएंगे या फिर मौन रहेंगे . जबकि दो तीन महीने पहले इ एम्आईसी भवन की पुताई को देखने से ही स्पष्ट नजर आता है कि किस स्तर का कार्य हुआ है क्या प्रभारी मामले की निष्पक्ष जाँच करेंगे या सिर्फ मौन रहकर ऐसे कार्यो को बढ़ावा देगे ?
कांग्रेसी कार्यकर्ता भी लगा रहे भेदभाव का आरोप .
पीडब्ल्यूडी प्रभारी तकिया पारा वार्ड से आते है इसी वार्ड के एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने वार्ड की उपेक्षा की बात को सोशल मिडिया में पोस्ट की जबकि इस वार्ड से निगम के कद्दावर मंत्री गनी आते है अगर प्रभारी के वार्ड में ही कांग्रेसी कार्यकर्त्ता उपेक्षा का आरोप लगा रहे है तो फिर शहर की व्यवस्था और आम जनता का क्या होगा . ऐसी चर्चा है कि कांग्रेसी कार्यकर्त्ता के पोस्ट के बाद इस मामले पर हलकी नोकझोक भी हुई थी सच्चाई क्या है ये तो कांग्रेस का अंदरूनी मामला है किन्तु पोस्ट करने वाले कांग्रेसी कार्यकर्त्ता सैफ ने फिर एक पोस्ट की जिसमे उनके द्वारा लिखा गया वाक्य // आज मुझे बहुत तकलीफ हुई नगर निगम दुर्ग जाने के बाद एक मेरे वरिष्ठ नेता मुझे कहते हैं तेरी उंगली बहुत चल रही है Whattsapp मे उंगली कट जाएगी क्या मैं कुछ गलत लिखता हूं // क्या कांग्रेस के वरिष्ट अब कार्यकर्ताओ के सवाल पर ऊँगली काटने तक की धमकी दे सकते है क्या कांग्रेस आलाकमान और शहर विधायक मामले को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जाँच करेंगे . ये वही कार्यकर्ता है जो सालो से विपक्ष में रहने के बाद भी कांग्रेस का दामन नहीं छोड़े आज वही कार्यकर्ता ऐसे शब्द सुनकर निराश हो रहे है ....